अब महीनों का इंतजार खत्म, कंपनी छोड़ते ही सिर्फ 48 घंटे में होगा F&F सेटलमेंट; नए लेबर कोड में क्या बदला?
नए लेबर कोड के तहत अब नौकरी छोड़ने पर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट सिर्फ 48 घंटे में होगा, जिससे कर्मचारियों को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ...और पढ़ें
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दो दिनों में आएगा f&f
HighLights
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट अब 48 घंटे में।
ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की शर्त खत्म।
देरी होने पर कंपनी पर कानूनी कार्रवाई संभव।
नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बेहद शानदार खबर है। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई कर्मचारी अपनी कंपनी से इस्तीफा देता है या उसे निकाला जाता है, तो उसे अपनी ही मेहनत की कमाई (full and final settlement) पाने के लिए 2 से 3 महीने तक HR और फाइनेंस डिपार्टमेंट के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन 1 अप्रैल से लागू हो चुके 'न्यू लेबर कोड' (New Labour Codes) के बाद यह पूरी व्यवस्था हमेशा के लिए बदल चुकी है।
क्या है नया नियम?
नए श्रम कानूनों (new wage codes) के लागू होने से न सिर्फ फुल एंड फाइनल (f&f) सेटलमेंट की समय सीमा बदलेगी, बल्कि आपकी ग्रेच्युटी (gratuity), पीएफ (PF) और इन-हैंड सैलरी के गणित में भी बड़ा बदलाव आएगा।
सिर्फ 2 दिन (48 घंटे) में होगा Full & Final सेटलमेंट
नए कानून के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी इस्तीफा (Resignation) देता है, उसे कंपनी से निकाला जाता है , या छंटनी (Retrenchment) होती है, तो कंपनी को कर्मचारी के आखिरी वर्किंग डे (Last Working Day) के बाद सिर्फ 2 कार्य दिवसों के भीतर उसका पूरा बकाया (सैलरी, छुट्टियां, और अन्य भत्ते) चुकाना होगा। अभी तक भारत में ज्यादातर कंपनियां कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल करने में 45 दिन से लेकर 90 दिन तक का समय लेती हैं, जिससे नौकरी बदलने वाले व्यक्ति को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। नया नियम कर्मचारियों को इस मानसिक और आर्थिक परेशानी से बचाएगा।
ग्रेच्युटी के नियमों में राहत
अभी तक किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का हकदार बनने के लिए एक ही कंपनी में लगातार 5 साल तक काम करना अनिवार्य होता है। नए लेबर कोड में फिक्स्ड टर्म (Fixed-Term) या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है। अब उन्हें ग्रेच्युटी के लिए 5 साल का इंतजार नहीं करना होगा। अगर वे 1 साल भी काम करते हैं, तो उन्हें उनकी सेवा अवधि के अनुपात में ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।
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1 अप्रैल से क्या बदला?
नए 'कोड ऑन वेजेज' के सेक्शन 17(2) के नियमों के अनुसार, अब सभी कंपनियों के लिए यह पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है कि वे कर्मचारी के आखिरी वर्किंग डे (Last Working Day) के समाप्त होने के महज 2 वर्किंग डेज (यानी 48 घंटे) के भीतर उसका पूरा बकाया पैसा यानी 'फुल एंड फाइनल सेटलमेंट' (F&F) क्लियर कर दें।
अगर हुई देरी तो क्या होगा?
बता दें कि अगर कंपनी 2 दिन यानी 48 घंटों में भुगतान नहीं करती है, तो इसे कानूनी उल्लंघन माना जा सकता है। कर्मचारी लेबर डिपार्टमेंट में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं और देरी की अवधि के लिए तय ब्याज दर के साथ भुगतान की मांग भी कर सकते हैं।
इस्तीफा देने से पहले ये 3 काम करना है जरूरी
1. सबसे पहले आप यह जरूर सुनिश्चित करें कि आप अपना तय नोटिस पीरियड सही तरीके से पूरा कर रहे हैं या नहीं। यदि आप नोटिस पीरियड आधे में छोड़ते हैं, तो कंपनी 'नोटिस पे' काटकर आपका हिसाब 2 दिन में कर देगी।
2. अपने सारे निवेश के सबूत (Investment Proofs) इस्तीफा देने के तुरंत बाद जमा कर दें, ताकि टैक्स कटने के बाद आपकी नेट सैलरी और F&F सही आ सके।
3. सबसे जरूरी बात यह है कि इस्तीफा देने से पहले अपनी कंपनी के HR से पूछें कि क्या उन्होंने 1 अप्रैल 2026 के नए लेबर कोड के हिसाब से पे-रोल सिस्टम को अपडेट कर दिया है। अगर हां तो आपके F&F में कोई दिक्कत नहीं आएगी।