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    FCNR FD vs NRE FD: तो NRIs यहां से बनाते हैं पैसा! 50 हजार डॉलर निवेश करने पर कहां मिलता है ज्यादा रिटर्न?

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 01:14 PM (IST)

    Best FD for NRI 2026 : FCNR FD विदेशी मुद्रा में निवेश है जिसमें करेंसी जोखिम कम होता है, जबकि NRE FD रुपये में निवेश है जिसमें उच्च ब्याज दरें लेकिन ...और पढ़ें

    FCNR FD vs NRE FD (AI-Generated Photo)

    FCNR FD vs NRE FD (AI-Generated Photo)

    HighLights

    1. FCNR FD में विदेशी मुद्रा, करेंसी जोखिम कम।

    2. NRE FD में रुपये में निवेश, उच्च ब्याज दरें।

    3. निवेश का फैसला करेंसी मूवमेंट, जोखिम क्षमता पर।

    नई दिल्ली| विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRI) के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश हमेशा एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है, लेकिन जब बात FCNR(B) FD और NRE FD के बीच चुनाव की आती है, तो मामला थोड़ा पेचीदा हो जाता है। आइए जानते हैं कि दोनों स्कीम्स के अपने-अपने फायदे और जोखिम क्या हैं, और निवेश से पहले इनकी बारीकियों को समझना क्यों जरूरी है।

    FCNR FD क्या है?

    FCNR (Foreign Currency Non-Resident) FD में निवेश विदेशी मुद्रा जैसे डॉलर, पाउंड या यूरो में किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें करेंसी एक्सचेंज का जोखिम नहीं होता। यानी अगर रुपये में गिरावट आती है, तो भी आपके निवेश की वैल्यू पर असर नहीं पड़ता। हालांकि, इसकी ब्याज दरें आमतौर पर NRE FD के मुकाबले थोड़ी कम होती हैं, जिससे कुल रिटर्न सीमित रह सकता है।

    NRE FD में क्या है सही?

    दूसरी ओर, NRE (Non-Resident External) FD में निवेश रुपये में होता है। इसमें ब्याज दरें आमतौर पर ज्यादा होती हैं, जिससे शॉर्ट टर्म में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। लेकिन यहां सबसे बड़ा जोखिम करेंसी फ्लक्चुएशन का है। अगर रुपये की वैल्यू गिरती है, तो डॉलर में कन्वर्ट करने पर निवेश का वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है। यानी ज्यादा ब्याज के बावजूद असली कमाई पर असर पड़ सकता है।

    $50,000 निवेश में कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न?

    रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई NRI $50,000 निवेश करता है, तो NRE FD ज्यादा आकर्षक लग सकती है, लेकिन यह फायदा तभी तक है जब तक रुपये की स्थिति स्थिर रहती है। वहीं, FCNR FD उन निवेशकों के लिए बेहतर मानी जाती है जो स्थिरता चाहते हैं और करेंसी रिस्क से बचना चाहते हैं।

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    दोनों ही विकल्पों में एक समानता यह है कि इन पर मिलने वाला ब्याज भारत में टैक्स-फ्री होता है और पैसा आसानी से विदेश भेजा जा सकता है। ऐसे में निवेश का फैसला पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक ज्यादा रिटर्न चाहता है या कम जोखिम के साथ सुरक्षित निवेश।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो NRI निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला करना सही नहीं है बल्कि करेंसी मूवमेंट, निवेश अवधि और व्यक्तिगत जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही सही विकल्प चुनना चाहिए।

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