क्या आप जानते हैं PAN Card का पुराना नाम? जानिए कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्यों जरूरी है यह 10 अंकों का कोड
Pan Card History: पैन कार्ड की शुरुआत 1972 में हुई और यह अब वित्तीय पहचान का अहम दस्तावेज है। इसके 10 अंकों में धारक की स्थिति और नाम से जुड़ी महत्वपू ...और पढ़ें

भारत में कब शुरू हुआ था Pan Card? (AI-Generated Photo)
HighLights
पैन कार्ड 1972 में शुरू हुआ, 1976 में अनिवार्य किया गया।
कौन था जिसके नाम सबसे पहले बना पैन कार्ड
10 अंकों में छिपी है धारक की पूरी वित्तीय पहचान और स्थिति।
नई दिल्ली: आज के समय में बैंक में खाता खुलवाने से लेकर प्रॉपर्टी खरीदने तक, हर बड़े वित्तीय काम के लिए पैन कार्ड (PAN Card) का होना अनिवार्य है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पैन कार्ड को आप हमेशा अपने वॉलेट में रखते हैं, उसकी शुरुआत कब हुई थी? इसका इस्तेमाल सबसे पहले किस पीढ़ी ने किया और इसके 10 अंकों में आखिर ऐसा क्या राज छिपा है जो इसे इतना जरूरी बनाता है?
आइए, आपकी इन सभी उलझनों को दूर करते हैं और पैन कार्ड के इतिहास से लेकर इसके 10 अंकों की अहमियत तक, सब कुछ विस्तार से समझते हैं:
भारत में कब शुरू हुआ PAN Card?
भारत में पैन (Permanent Account Number) की शुरुआत भारत सरकार द्वारा साल 1972 में की गई थी। बाद में इसे आयकर अधिनियम (Income Tax Act) 1961 की धारा 139A के तहत कानूनी रूप दिया गया। शुरुआत में पैन कार्ड बनवाना वैकल्पिक (Optional) था, लेकिन 1976 में सरकार ने इसे सभी करदाताओं के लिए अनिवार्य कर दिया।
पैन कार्ड से पहले क्या था?
पैन कार्ड के आने से पहले टैक्स पेयर्स को एक GIR (General Index Register) नंबर दिया जाता था। यह पूरी तरह से एक मैनुअल सिस्टम था और यह नंबर राष्ट्रीय स्तर पर यूनिक नहीं होता था। इस वजह से टैक्स असेसमेंट के दौरान गलतियों और पहचान में गड़बड़ी के बहुत मामले सामने आते थे। इसी समस्या को सुलझाने के लिए पैन कार्ड लाया गया।
सबसे कम और सबसे ज्यादा उम्र के पैन कार्ड होल्डर कौन हैं?
5 दिन की उम्र में बना पैन कार्ड (सबसे युवा)
यह जानकर आपको हैरानी होगी कि देश में सबसे कम उम्र में पैन कार्ड बनवाने का रिकॉर्ड एक 5 दिन की बच्ची के नाम है। बिहार के मुंगेर की रहने वाली 'आशी' का जन्म 21 फरवरी को हुआ और महज 5 दिन बाद, 26 फरवरी को ही उसका पैन कार्ड अलॉट हो गया। इससे पहले यह रिकॉर्ड जयपुर के आर्यन चौधरी के पास था, जिनका पैन कार्ड 7 दिन की उम्र में बना था।
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120 साल की 'दादी' को इनकम टैक्स का सलाम (सबसे बुजुर्ग)
भारत की सबसे बुजुर्ग पैन कार्ड होल्डर 120 वर्षीय गिरिजा देवी थीं (अब उनका निधन हो चुका है)। प्यार से लोग उन्हें 'दादी' बुलाते थे। उनके पैन कार्ड पर जन्म का वर्ष 1903 दर्ज था। साल 2020 में आयकर विभाग ने उन्हें देश की सबसे बुजुर्ग करदाता मानते हुए विशेष रूप से सम्मानित भी किया था।
क्या है आपके PAN कार्ड के 10 अंकों का मतलब?
पैन कार्ड पर दर्ज 10 अंकों का नंबर सिर्फ एक रैंडम नंबर नहीं है, बल्कि इसके हर अक्षर और नंबर का एक खास मतलब होता है। इस 10 डिजिट के कोड में अल्फाबेट और न्यूमेरिकल दोनों शामिल होते हैं।
* शुरुआती 3 कैरेक्टर: पहले तीन कैरेक्टर हमेशा अल्फाबेट (AAA से ZZZ तक) होते हैं।
* चौथा कैरेक्टर (स्टेटस): यह सबसे महत्वपूर्ण है, जो बताता है कि कार्डधारक कौन है।
* P – Individual (आम नागरिक)
* C – Company (कंपनी)
* H – Hindu Undivided Family (HUF)
* F – Firm (फर्म)
* A – Association of Persons
* T – Trust
* G – Government (सरकारी संस्था)
* 5वां कैरेक्टर (आपका नाम): यदि आप 'Individual' (P) हैं, तो 5वां कैरेक्टर आपके सरनेम (Surname/Last Name) का पहला अक्षर होता है।
* अगले 4 अंक: ये 0001 से लेकर 9999 तक के सीक्वेंशियल नंबर होते हैं।
* आखिरी कैरेक्टर: यह हमेशा एक अल्फाबेट होता है, जिसे एक खास फॉर्मूले (चेक डिजिट) के जरिए जनरेट किया जाता है।
क्यों जरूरी है पैन कार्ड?
आज के समय में पैन कार्ड सिर्फ टैक्स चुकाने का जरिया नहीं, बल्कि हमारी पूरी वित्तीय पहचान (Financial Identity) का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। इसका मुख्य इस्तेमाल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए होता है, लेकिन इसके अलावा किसी भी बैंक में नया खाता खुलवाने, 50 हजार रुपये से ज्यादा का कैश जमा करने या निकालने, बैंक से लोन और क्रेडिट कार्ड लेने के लिए भी यह पूरी तरह अनिवार्य है। इतना ही नहीं, अगर आप शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, 5 लाख रुपये से ज्यादा की कोई प्रॉपर्टी (अचल संपत्ति) खरीदते या बेचते हैं, या फिर टू-व्हीलर को छोड़कर कोई भी नया वाहन (Car/Jeep) खरीदते हैं, तो वहां भी बिना पैन कार्ड के आपका कोई भी लेन-देन पूरा नहीं हो सकता।