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    RERA Rules: बिल्डर्स नहीं वसूल पाएंगे मनमाना मेंटेनेंस चार्ज, फ्लैट-दुकानों के नए रेट्स लागू

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 04:43 PM (IST)

    RERA Guidelines: रेरा ने बिल्डरों द्वारा फ्लैट मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर ग्राहकों से लिए गए लाखों रुपये के दुरुपयोग पर नकेल कसी है। नए नियमों के ...और पढ़ें

    RERA Rules: बिल्डर्स नहीं वसूल पाएंगे मनमाना मेंटेनेंस चार्ज, रेरा ने तय किए फ्लैट-दुकानों के नए रेट्स; प्रति वर्ग फुट लगेंगे इतने रुपए!

    RERA Rules: बिल्डर्स नहीं वसूल पाएंगे मनमाना मेंटेनेंस चार्ज, रेरा ने तय किए फ्लैट-दुकानों के नए रेट्स; प्रति वर्ग फुट लगेंगे इतने रुपए!

    HighLights

    1. बिल्डरों को मेंटेनेंस फंड के लिए अलग खाता खोलना होगा।

    2. फंड को सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले बैंक में FD कराना होगा।

    3. RWA को ब्याज सहित पूरा पैसा और हिसाब देना होगा।

    नई दिल्ली। क्या आप भी घर खरीदने की योजना बना रहे हैं? या फिर आप आने वाले सालों में घर खरीदने वाले हैं? तो आपके लिए एक राहत की खबर सामने आई है। रेरा (Real Estate (Regulation and Development) Act) ने अब उन बिल्डर्स पर नकेल कसी है, जो फ्लैट मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर ग्राहकों से लाखों रुपये जमा करा लेते हैं और बाद में उनके पास उस पैसे का कोई हिसाब नहीं होता।

    रेरा ने इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी (IFMS) यानी मेंटेनेंस फंड को लेकर नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए हैं। इन नए नियमों के आने के बाद अब बिल्डर (Builder) चाहकर भी ग्राहकों के पैसे में हेराफेरी नहीं कर पाएंगे। इससे घर खरीदने वालों के लिए काफी ज्यादा राहत मिलेगी। आइए जानते हैं, क्या है ये पूरा नियम और किस राज्य में तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

    पर्सनल अकाउंट में नहीं रख पाएंगे पैसा!

    रेरा के नए नियों के हिसाब से अब सारे बिल्डर्स मेंटेनेंस सिक्योरिटी का पैसा अपने पर्सनल या करंट अकाउंट में नहीं रख पाएंगे। इस फंड का पैसा सेफ रखने के लिए बिल्डर को अब अलग से नया अकाउंट खुलवाना पड़ेगा, साथ ही इस पैसे को उस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराना होगा जो सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा हो। इससे ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सेफ रहेगा और उस पर ब्याज भी बढ़ता रहेगा।

    किस प्रॉपर्टी पर लगेगा कितना चार्ज?

    RERA ने अलग-अलग तरह की प्रॉपर्टी के लिए अलग-अलग अमाउंट भी फिक्स किया है। अब बिल्डर प्रॉपर्टी के साइज और कैटेगरी के हिसाब से मेंटेनेंस सिक्योरिटी ग्राहकों से ले पाएंगे।

    प्रॉपर्टी की कैटेगरी तय की गई दरें (प्रति वर्ग फुट)
    मल्टीस्टोरी फ्लैट्स (ग्रुप हाउसिंग) ₹20 से लेकर ₹100 तक
    कमर्शियल दुकानें (बिना एसी वाली) ₹40
    कमर्शियल दुकानें (सेंट्रल एसी वाली) ₹50

    देना होगा पाई-पाई का हिसाब!

    प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देखा जाता है कि बिल्डर मेंटेनेंस का पैसा दबाकर बैठ जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। जैसे ही सोसायटी का कॉमन एरिया (जैसे पार्क, लिफ्ट, क्लब हाउस) निवासियों की संस्था यानी RWA या AOA को सौंपा जाएगा, बिल्डर को मेंटेनेंस सिक्योरिटी का पूरा पैसा ब्याज समेत उनके खाते में ट्रांसफर करना होगा। इसके साथ ही बिल्डर को लिखित में एक-एक पैसे का हिसाब देना होगा कि किस फ्लैट मालिक से कितना पैसा मिला और कितना खर्च हुआ

    पैसे का इस्तेमाल पर रोक!

    मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर लिए गए पैसे का इस्तेमाल अब बिल्डर हर जगह नहीं कर पाएंगे। इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ सोसायटी की लिफ्ट, पार्क, जेनरेटर और बड़े सामूहिक उपकरणों की मरम्मत या उन्हें बदलने के लिए ही किया जा सकेगा। इसे रोजमर्रा के दूसरे मेंटेनेंस खर्चों में नहीं जोड़ा जाएगा।

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    एक-एक पैसे का होगा ऑडिट!

    कड़े नियमों के साथ-साथ, अब RWA या AOA को भी हर साल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से इस पैसे का ऑडिट कराना होगा। ऑडिट रिपोर्ट आने के तीन महीने के भीतर इसे सोसायटी की मीटिंग (AGM) में सभी मूल निवासियों के सामने पेश करना जरूरी होगा, ताकि कोई गड़बड़ी न हो सके।

    किस राज्य में लागू हुआ ये नियम?

    मेंटेनेंस सिक्योरिटी को लेकर ये नियम फिलहाल उत्तर प्रदेश में लागू हुआ है। ऐसे में जो लोग यूपी में घर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, उनके लिए इस नियम से काफी ज्यादा फायदा हो सकता है। इस नियम का मकसद पैसे को सुरक्षित रखना, सिस्टम में पारदर्शिता रखना और बिल्डरों की जवाबदेही तय करना है।

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