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    Vedanta News: अनिल अग्रवाल की वेदांता ने डीमर्जर के बाद अंबानी की रिलायंस को भी छोड़ा पीछे, FIIs ने पलटी बाजी

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 10:16 AM (GMT+05:30)

    वेदांता लिमिटेड ने डीमर्जर के बाद निवेशकों के बीच मजबूत पकड़ बनाई है, जून 2026 तिमाही में 4.9 लाख नए खुदरा शेयरधारक जुड़े और FII ने भी हिस्सेदारी बढ़ा ...और पढ़ें

    जून 2026 तिमाही में वेदांता से 4.9 लाख नए खुदरा शेयरधारक जुड़े।

    जून 2026 तिमाही में वेदांता से 4.9 लाख नए खुदरा शेयरधारक जुड़े।

    HighLights

    1. जून 2026 तिमाही में 4.9 लाख नए खुदरा शेयरधारक जुड़े।

    2. FIIs ने वेदांता में अपनी हिस्सेदारी 13.93% से 15.77% बढ़ाई।

    3. कंपनी का P/E 5.9 और डिविडेंड यील्ड 13% है।

    नई दिल्ली। Vedanta News: अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड ने डीमर्जर के बाद निवेशकों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी खुदरा निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कंपनियों में शीर्ष पर रही।

    इस दौरान करीब 4.9 लाख नए रिटेल शेयरधारक वेदांता से जुड़े। खास बात यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने भी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।

    वेदातां ने HDFC और रिलायांस को छोड़ा पीछे

    कैपिटलाइन के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी Q1 FY27 में वेदांता के शेयरधारकों की संख्या में करीब 4.9 लाख की बढ़ोतरी हुई। कैपिटलाइन द्वारा ट्रैक की गई कंपनियों में यह सबसे बड़ी वृद्धि रही।

    इस मामले में वेदांता ने विप्रो, बजाज ऑटो, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। इन कंपनियों में भी तिमाही के दौरान खुदरा निवेशकों की संख्या बढ़ी, लेकिन वेदांता में हुई बढ़ोतरी सबसे ज्यादा रही।

    इसके उलट टाटा मोटर्स पीवी, यस बैंक, सुजलॉन एनर्जी, अडानी ग्रीन एनर्जी और बीएचईएल जैसी कंपनियों में खुदरा शेयरधारकों की संख्या में कमी दर्ज की गई।

    FII ने भी बढ़ाया भरोसा

    वेदांता में सिर्फ छोटे निवेशकों की दिलचस्पी नहीं बढ़ी, बल्कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी में भी इजाफा हुआ है। कंपनी में FII हिस्सेदारी 31 मार्च 2026 के 13.93% से बढ़कर 30 जून 2026 को 15.77% हो गई।

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    यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दौरान भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत कमजोर रहा। NSE पर सूचीबद्ध कंपनियों में FII की औसत हिस्सेदारी Q4 FY26 में घटकर 15.8% रह गई थी, जो करीब 17 वर्षों का निचला स्तर बताया गया है।

    ऐसे माहौल में वेदांता में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ना कंपनी की डीमर्जर के बाद की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की कमाई की संभावनाओं को लेकर भरोसे का संकेत माना जा सकता है।

    कम वैल्यूएशन और दमदार डिविडेंड

    वेदांता का आकर्षण केवल शेयरधारकों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। कंपनी का P/E Ratio 5.9 बताया गया है, जो इसे अपनी कैटेगरी के कम वैल्यूएशन वाले शेयरों में रखता है।

    इसके साथ ही कंपनी की डिविडेंड यील्ड 13% है। यानी कम वैल्यूएशन के साथ निवेशकों को मजबूत डिविडेंड रिटर्न भी मिल रहा है। यही संयोजन वेदांता को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।

    शानदार तिमाही प्रदर्शन ने बढ़ाया भरोसा

    खुदरा और संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ऐसे समय में सामने आई है, जब वेदांता ने परिचालन के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है।

    कंपनी का निरंतर परिचालन से होने वाला लाभ सालाना आधार पर 152% बढ़कर 5,294 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कंपनी का EBITDA करीब दोगुना होकर 98% की बढ़ोतरी के साथ 8,469 करोड़ रुपये पहुंच गया।

    कंपनी ने तिमाही के दौरान अपने शुद्ध कर्ज में भी 2,200 करोड़ रुपये से अधिक की कमी की। इससे उसकी बैलेंस शीट और वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है।

    रेटिंग के मोर्चे पर भी कंपनी को सकारात्मक संकेत मिले। CRISIL और ICRA ने वेदांता को AA+/Stable रेटिंग दी है, जिसे पिछले करीब एक दशक में कंपनी की सबसे ऊंची रेटिंग बताया गया है।

    डीमर्जर के बाद नई कंपनियों ने भी बनाई वैल्यू

    वेदांता लिमिटेड के अलावा डीमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई नई वेदांता कंपनियों ने भी निवेशकों के लिए अच्छा मूल्य सृजित किया है। डीमर्जर के बाद पहली तिमाही में इन सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 71,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ा।

    यह तेजी समूह के अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र और केंद्रित कंपनियों के रूप में देखने को लेकर बाजार की सकारात्मक धारणा को दर्शाती है।

    Hindustan Zinc ने भी दिखाया दम

    वेदांता समूह की प्रमुख कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक ने भी जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी ने जिंक उत्पादकों के बीच दुनिया के सबसे ऊंचे EBITDA मार्जिन में से एक दर्ज किया।

    मजबूत चांदी की कीमतों, बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लागत नियंत्रण से कंपनी को फायदा मिला। हिंदुस्तान जिंक ने दुनिया के कम लागत वाले जिंक उत्पादकों में अपनी स्थिति भी बरकरार रखी।

    कंपनी ने इस दौरान 11 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया, जिससे शेयरधारकों को रिटर्न देने की उसकी रणनीति और मजबूत हुई।

    डीमर्जर के बाद बदल रही है Vedanta की तस्वीर

    वेदांता के खुदरा शेयरधारकों की संख्या में इतनी बड़ी वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब कंपनी हाल ही में डीमर्जर की प्रक्रिया से आगे बढ़ी है। निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से संकेत मिलता है कि बाजार कंपनी को सिर्फ हाई-डिविडेंड स्टॉक के तौर पर नहीं देख रहा है।

    मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज में कमी, आकर्षक वैल्यूएशन और डीमर्जर के बाद अलग-अलग कारोबार पर फोकस की रणनीति ने वेदांता के प्रति निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है। अगर कंपनी इसी तरह वित्तीय अनुशासन और कैश फ्लो पर पकड़ बनाए रखती है, तो आने वाली तिमाहियों में भी निवेशकों की नजर इस शेयर पर बनी रह सकती है।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)