सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    शेयर बाजार में 'देसी' पैसों की सुनामी, DII ने झोंके ₹8.5 लाख करोड़; विदेशी बिकवाली हुई बेअसर

    By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 09:07 AM (IST)

    घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने वित्त वर्ष 26 में भारतीय शेयर बाजार में 8.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर एफपीआई की बिकवाली के प्रभाव को कम किया। इस ...और पढ़ें

    डीआईआई ने 8.5 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया।

    डीआईआई ने 8.5 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया।

    HighLights

    1. डीआईआई ने 8.5 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया।

    2. एफपीआई की बिकवाली के प्रभाव को सफलतापूर्वक कम किया।

    3. घरेलू निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी बढ़कर 17% हुई।

    आईएएनएस, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) वित्त वर्ष 26 में एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे हैं और इस दौरान उन्होंने 8.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की 1.8 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली के शेयर बाजार पर प्रभाव को कम करने में मदद मिली है। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई।

    घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी से डीआईआई की हिस्सेदारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर लिस्टेड सिक्योरिटीज में बढ़कर 17 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं, एफपीआई की हिस्सेदारी घटकर 15 महीने के निचले स्तर 15.8 प्रतिशत पर आ गई है।

    म्यूचुअल फंड में भी किया बड़ा निवेश

    इसके अलावा, घरेलू निवेश में म्यूचुअल फंड का बड़ा हिस्सा रहा। इन्होंने लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपए का योगदान दिया, जिसमें लगातार सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) निवेश और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का अहम रोल रहा।

    यह ट्रेंड निवेशकों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच देखने को मिला है। साल के दौरान डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 22.5 करोड़ हो गई, जो डिजिटल ऑनबोर्डिंग और मार्केट तक आसान पहुंच की वजह से व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।

    खबरें और भी

    सेबी की रिपोर्ट में भारत के कैपिटल मार्केट के बढ़ते विस्तार पर भी जोर दिया गया। कॉरपोरेट इंडिया ने पब्लिक इक्विटी ऑफरिंग के जरिए रिकॉर्ड 2.35 लाख करोड़ रुपए जुटाए। इसमें इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ), फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) और राइट्स इश्यू शामिल हैं।

    डेट मार्केट में भी जबरदस्त हलचल

    यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 26 में रिकॉर्ड 257 कंपनियों ने एसएमई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके 11,587 करोड़ रुपए जुटाए, जबकि राइट्स इश्यू के ज़रिए जुटाई गई पूंजी 134.2 प्रतिशत बढ़कर 46,168 करोड़ रुपए हो गई।

    प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए जुटाया गया फंड 76.3 प्रतिशत बढ़कर 1.48 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि शेयर बायबैक 143.6 प्रतिशत बढ़कर 19,238 करोड़ रुपए हो गया।

    कंपनियों ने अपने लगभग पूरे ऑफर साइज का इस्तेमाल किया। साथ ही, डेट मार्केट में भी जबरदस्त हलचल देखी गई, जिसमें पब्लिक डेट इश्यू के जरिए फंड जुटाने में 39.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 11,343 करोड़ रुपए हो गया।

    सेबी के अनुसार, ये घटनाक्रम भारत के कैपिटल मार्केट की बढ़ती परिपक्वता और मजबूती को दिखाते हैं, जहां घरेलू बचत ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फ्लो के असर को कम कर रही है।

    बाजार नियामक ने यह भी कहा कि घरेलू भागीदारी बढ़ने, रिटेल ओनरशिप में बढ़ोतरी और फंड जुटाने के अलग-अलग तरीकों ने एक बड़े और ज्यादा स्थिर मार्केट इकोसिस्टम में योगदान दिया है, भले ही विदेशी निवेशक साल भर शुद्ध विक्रेता बने रहे।

    यह भी पढ़ें- JP ग्रुप की जेपी पावर को खरीदने वाली Adani Power ने दिया बड़ा अपडेट, प्रमोटर्स ने बढ़ाई हिस्सेदारी