क्या है Claude Cowork agent, इससे IT कंपनियों को कितना खतरा, 2 लाख करोड़ की गिरावट के बाद क्या करें निवेशक?
भारतीय आईटी शेयरों में 4 फरवरी को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स में 8% से ज्यादा टूट गया। दरअसल, एंथ्रोपिक के नए लीगल एआई टूल 'क्ल ...और पढ़ें

एंथ्रोपिक के नए एआई टूल से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
HighLights
भारतीय आईटी शेयरों में 4 फरवरी को भारी गिरावट।
एंथ्रोपिक AI टूल 'क्लाउड कोवर्क एजेंट' ने चिंता बढ़ाई।
आईटी कंपनियों का 2 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप साफ।
नई दिल्ली। भारतीय आईटी कंपनियों (IT Shares Crash)के शेयरों में 4 फरवरी को भारी गिरावट आई, और निफ्टी आईटी इंडेक्स में इंट्रा डे में एक बड़ी मंदी देखने को मिली। टेक शेयरों में यह कमजोरी एंथ्रोपिक (Anthropic AI tool) के उस लीगल एआई टूल के लॉन्च किए जाने से हुई, जिससे आईटी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं फिर से उभर आईं। 3 फरवरी को अमेरिका में दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर इस डर से बुरी तरह गिरे और इसका असर आज इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा समेत कई कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल रहा है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद से इसका सबसे खराब प्रदर्शन रहा। उधर, AI के मोर्चे पर तेजी से हो रहे डेवलपमेंट के बीच मार्केट एनालिस्ट ने निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
बिकवाली से 2 लाख करोड़ का नुकसान
आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के कारण भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों के शेयरों के कुल बाजार पूंजीकरण से 2 लाख करोड़ रुपये कम हो गए। कोफोर्ज के शेयर 8 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए, जबकि परसिस्टेंट सिस्टम्स, एमफैसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई।
वहीं, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि विप्रो के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
क्या है Claude Cowork agent?
Anthropic ने अपने Claude Cowork agent के लिए नए AI plug-ins/extensions जारी किए हैं जो legal, sales, marketing, compliance और data analysis में काम को automate कर सकते हैं - ये वे क्षेत्र हैं जो पारंपरिक रूप से महंगे, licensed software द्वारा संचालित होते हैं।
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क्या AI टूल आईटी कंपनियों के लिए खतरा?
वैल्थ मैनेजर अभिषेक भट्ट की मानें तो ये टूल्स सीधे तौर पर legal research platforms, analytics databases और professional-services software के साथ कॉम्पिटिशन करते हैं, और यही बात निवेशकों को डरा रही है कि आने वाले समय में IT कंपनियों का काम "लोगों की संख्या" से नहीं, बल्कि "AI की क्षमता" से मापा जाएगा। इससे डर पैदा हुआ कि AI उच्च-मार्जिन, लंबी अवधि की subscription revenue मॉडल को नुकसान कर सकता है यानी जो कंपनियाँ अब तक अपनी बड़ी टीमों के दम पर मोटी कमाई कर रही थीं, उन्हें अब AI के युग में टिकना मुश्किल हो सकता है।
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अभिषेक भट्ट ने कहा, आज की 6% गिरावट सिर्फ एक दिन का उतार-चढ़ाव नहीं है। यह एक बड़े बदलाव का संकेत है। निवेशक के तौर पर, आपको यह तय करना है कि आप किस कंपनी के साथ हैं - जो बदलाव को गले लगा रही है या जो उससे डर रही है। अगले कुछ महीनों में, हर IT कंपनी की quarterly results में यह साफ दिखेगा कि वे AI के साथ कैसे खड़ी हैं। उन नंबरों पर नजर रखें। वही आपको असली तस्वीर दिखाएंगे।