252 साल पुरानी नवरत्न कंपनी मझगांव डॉक ने रचा इतिहास, 250 करोड़ में खरीद लिया श्रीलंका का सबसे बड़ा शिपयार्ड
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने श्रीलंका के सबसे बड़े शिपयार्ड, कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी (CDPLC) में 51% हिस्सेदारी 250 करोड़ ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
कोलंबो। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण की घोषणा की है। भारत के रक्षा मंत्रालय की दिग्गज नवरत्न कंपनी, MDL ने श्रीलंका के सबसे बड़े शिपयार्ड 'कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी' (CDPLC) में 51% नियंत्रक हिस्सेदारी का अधिग्रहण ( Mazagon Dock Acquires Sri Lanka's Largest Shipyard) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस अधिग्रहण के बाद CDPLC अब आधिकारिक तौर पर MDL की सहायक कंपनी (सब्सिडियरी) बन गई है। इस बड़े कदम को भारत सरकार के 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।
कितने करोड़ रुपये में हुई खरीद?
मझगांव डॉक ने इस 51% हिस्सेदारी के लिए 2.68 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) का कुल निवेश किया है। बोर्ड का पुनर्गठन: इस अधिग्रहण के साथ ही CDPLC के निदेशक मंडल (बोर्ड) का पुनर्गठन किया गया है। MDL के सीएमडी (CMD), कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) को 7 अप्रैल 2026 से CDPLC का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
बोर्ड में MDL के अन्य नामित सदस्यों में बीजू जॉर्ज (निदेशक-शिपबिल्डिंग), रुचिर अग्रवाल (निदेशक-वित्त) और विश गोविंदासामी शामिल हैं। वहीं, थिमिरा एस. गोडाकुंबुरा CDPLC के एमडी और सीईओ के रूप में बने रहेंगे।
CDPLC को मिला इतिहास का सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
MDL के मजबूत रणनीतिक समर्थन के चलते CDPLC ने अपने 52 साल के इतिहास का सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। नवंबर 2025 में, CDPLC ने फ्रांस की 'ऑरेंज मरीन' के साथ लगभग 150 मिलियन अमरीकी डॉलर का समझौता किया है। इसके तहत दो अत्याधुनिक 'केबल लेइंग और रिपेयर' जहाजों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी डिलीवरी 2028 और 2029 में होनी है।
इन 100-मीटर लंबे जहाजों में ABB एज़िपॉड इकाइयों के साथ हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक प्रणोदन (Propulsion) तकनीक होगी। पहले जहाज का कील (Yard No. 0263) 1 अप्रैल 2026 को ही रख दिया गया है।
भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग में वृद्धि
इस साझेदारी के पहले ठोस परिणाम के रूप में 7 अप्रैल 2026 को CDPLC और भारत के ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DCI) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत के उच्चायुक्त संतोष झा की उपस्थिति में हुआ। इसके अलावा, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के जहाजों की मरम्मत का काम CDPLC को सौंपने के लिए भी चर्चा चल रही है।
20% मुनाफा कमाने का लक्ष्य
इस अवसर पर कैप्टन जगमोहन ने कहा, *"MDL द्वारा CDPLC का अधिग्रहण न केवल हमारे दो संगठनों के लिए, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। हम चालू वित्त वर्ष में नए ऑर्डर और भारत से जुड़े शिप रिपेयर बिजनेस के जरिए CDPLC के राजस्व और मुनाफे में 20% की वृद्धि हासिल करने के प्रति आश्वस्त हैं।"

यह भी पढ़ें: भारत की मदद से भूटान चला इतिहास बनाने! 7 साल से अटके 1200 MW के सबसे बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पर लगी मुहर
कितने साल पुरानी है मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। NSE डेटा के मुताबिक इसका बाजार पूंजीकरण (Market Cap) ₹ 99,643 करोड़ है। इसके शेयर कीमत ₹ 2,470 है। ये कंपनी 252 साल पहले 1774 में बनी थी। MDL भारत का एक प्रमुख शिपयार्ड है। यह एकमात्र भारतीय शिपयार्ड है जिसने नौसेना के लिए विध्वंसक और पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया है। 1960 से अब तक कंपनी ने युद्धपोत, पनडुब्बी, कार्गो/यात्री जहाज और अपतटीय प्लेटफॉर्म सहित 801 जहाजों का निर्माण किया है। यह 4 नीलगिरी-श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट्स का प्रमुख निर्माता है और 'नवरत्न' का दर्जा प्राप्त करने वाला देश का इकलौता शिपयार्ड है।
