NSE ने जारी किया बयान: सोमवार की ट्रेडिंग में नहीं हुई कोई तकनीकी गड़बड़ी, फ्यूचर्स के मुकाबले कैश मार्केट में प्रीमियम के चलते था कंफ्यूजन
NSE ने सोमवार को ट्रेडिंग में गड़बड़ी से इनकार किया और बताया कि निफ्टी का अंतिम स्तर नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के कारण था। इस नई प्रणाली से F&O स ...और पढ़ें

एनएसई ने जारी किया स्पष्टीकरण
HighLights
NSE ने सोमवार की ट्रेडिंग में गड़बड़ी से किया इनकार
नया 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) बना वजह
ब्रोकरों ने निवेशकों को 3 बजे तक ट्रेड निपटाने की सलाह दी
नई दिल्ली। NSE ने साफ किया कि सोमवार को ट्रेडिंग में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। स्टॉक एक्सचेंज ने बताया कि निफ्टी का जो लेवल दिख रहा था, वही उस दिन की आधिकारिक क्लोजिंग वैल्यू थी, भले ही सेशन के आखिर में इसमें तेज उछाल आया हो, जिसने कई मार्केट पार्टिसिपेंट्स को चौंका दिया।
एनएसई ने ये कदम 3 अगस्त को शुरू किए गए नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) की वजह से उठाया। इससे F&O सेगमेंट में शेयरों की क्लोजिंग कीमत तय करने का तरीका बदल गया है।
क्या है नया सिस्टम?
नए सिस्टम के तहत, खरीदने और बेचने के ऑर्डर को एक ही कीमत वाले क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए मैच किया जाता है। ऑक्शन में जो कीमत तय होती है, वही शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग कीमत बन जाती है, और इसी से निफ्टी का आखिरी क्लोजिंग लेवल तय होता है।
CAS के लिए अलग-अलग ऑर्डर बुक होने के कारण अलग-अलग एक्सचेंजों पर स्टॉक की क्लोजिंग कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। इंडेक्स की वैल्यू भी अलग-अलग हो सकती हैं क्योंकि वे इसमें शामिल स्टॉक्स की एक्सचेंज-स्पेसिफिक क्लोजिंग कीमतों से निकाली जाती हैं।
ब्रोकर्स ने की निवेशकों से अपील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सोमवार को नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के पहले दिन के बाद, कई ब्रोकरों ने रिटेल क्लाइंट्स को सलाह दी कि वे दोपहर 3 बजे तक अपने ट्रेड स्क्वायर-ऑफ कर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि मेन इंडेक्स और कुछ खास शेयरों में कैश और फ्यूचर्स की कीमतों के बीच असामान्य अंतर देखा गया, जिससे मार्केट में शामिल लोगों के बीच कन्फ्यूजन पैदा हो गया।
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ब्रोकरेज फर्मों ने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि जब तक मार्केट नए सिस्टम के हिसाब से एडजस्ट नहीं हो जाता, तब तक वे दोपहर 3:00 बजे से 3:05 बजे के बीच अपनी पोजीशन बंद कर लें।
यह एडवाइजरी मार्केट के एक असामान्य पैटर्न के बाद जारी की गई, जिसमें दोपहर 3:15 बजे के बाद कैश मार्केट में ट्रेडिंग फ्यूचर्स मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर हुई। आम तौर पर, 'कॉस्ट ऑफ कैरी' की वजह से फ्यूचर्स की ट्रेडिंग स्पॉट प्राइस के मुकाबले प्रीमियम पर होती है।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)