NSE IPO: DRHP फाइलिंग से हुआ बड़ा खुलासा, को-लोकेशन और डार्क फाइबर केस पर ये बात आई सामने
NSE ने अपनी डीआरएचपी में बताया है कि को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले अभी भी अनसुलझे हैं, जिसके निपटारे के ...और पढ़ें

NSE के को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले अभी भी अनसुलझे हैं।
HighLights
एनएसई ने सेबी को 1,491 करोड़ रुपये के निपटान का प्रस्ताव दिया।
को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले अभी भी अनसुलझे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं ये महत्वपूर्ण कानूनी मामले।
आईएनएस, नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपनी डीआरएचपी (DRHP) में बताया है कि अभी भी को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामला अनसुलझे बने हुए हैं और एक्सचेंज भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ मामले को निपटाने के लिए 1,491.21 करोड़ रुपये भुगतान का प्रस्ताव दे रहा है।
NSE IPO पेपर्स के 'जरूरी कानूनी मामलों' वाले हिस्से में दी गई ये जानकारियां सुप्रीम कोर्ट, सेबी और दूसरे कानूनी फोरम के सामने चल रही कार्यवाही से जुड़ी हैं। डार्क फाइबर मामले में, नियामक सेबी ने चिंता जताई थी कि कुछ ट्रेडिंग सदस्यों को एक अनऑथराइज्ड सर्विस प्रोवाइडर के जरिए खास पॉइंट-टू-पॉइंट कनेक्टिविटी दी गई थी, जिससे उन्हें कथित तौर पर बाजार के दूसरे भागीदारों के मुकाबले लेटेंसी का फायदा मिला।
क्या है पूरा मामला?
अप्रैल 2019 में, सेबी के एक होल-टाइम मेंबर ने NSE को ब्याज सहित 62.58 करोड़ रुपये वापस करने और एक्सचेंज के नेटवर्क आर्किटेक्चर का समय-समय पर ऑडिट कराने का निर्देश दिया। इसके बाद, जून 2022 में एक अलग कानूनी कार्यवाही के जरिए सेबी ने 7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
हालांकि, बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (एसएटी) ने दोनों आदेशों को रद्द कर दिया, जिसके बाद सेबी ने इन फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अपीलें अभी भी लंबित हैं, इसी बीच एनएसई ने जून 2025 में 222.66 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव पेश किया, जिसे मार्च 2026 में संशोधित करके 267.65 करोड़ रुपये कर दिया गया। सेटलमेंट आवेदन को अभी अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है।
दूसरा मामला एनएसई की 'टिक-बाय-टिक' आर्किटेक्चर के तहत काम करने वाली को-लोकेशन सुविधा के जरिए कुछ ट्रेडिंग मेंबर्स को प्राथमिकता के आधार पर एक्सेस और जल्दी कनेक्टिविटी देने के आरोपों से जुड़ा है।
अप्रैल 2019 में, सेबी ने एक्सचेंज को ब्याज सहित 624.89 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया और कुछ गैर-मौद्रिक निर्देश जारी किए। साथ ही, नियामक ने माना कि एसएनई ने सेबी (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक) नियमों का उल्लंघन नहीं किया था।
पैसे वापस करने के आदेश को पलटा
जनवरी 2023 में, एसएटी ने पैसे वापस करने के आदेश को पलट दिया और फैसला सुनाया कि एनएसई ने स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन नियमों के मुख्य प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया था। हालांकि, उसने एक्सचेंज को 'इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड' में 100 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया।
एक अलग फैसले में, एसएटी ने सेबी द्वारा लगाए गए 1 करोड़ रुपये के जुर्माने को भी रद्द कर दिया। इसके बाद सेबी ने एसएटी के दोनों आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। विवाद को सुलझाने के लिए, एनएसई ने जून 2025 में 1,164.73 करोड़ रुपये के सेटलमेंट अमाउंट का प्रस्ताव रखा, जिसे बाद में मार्च 2026 में बढ़ाकर 1,223.56 करोड़ रुपये कर दिया गया। डीआरएचपी के अनुसार, को-लोकेशन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में अपील और सेटलमेंट की अर्जियां अभी भी लंबित हैं।
को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में संशोधित सेटलमेंट प्रस्तावों की कुल राशि 1,491.21 करोड़ रुपये है। NSE के लिए असल में अतिरिक्त कैश आउटफ्लो कम हो सकता है, क्योंकि एक्सचेंज पहले ही सेबी के पास काफी बड़ी रकम जमा कर चुका है। अगस्त 2024 में जारी की गई वित्तीय जानकारी के अनुसार, मार्केट रेगुलेटर के पास जमा राशि लगभग 1,107 करोड़ रुपये थी।
