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    राजिम और गरियाबंद में है प्रकृति और आस्था के अद्भुत संसार

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 09:02 PM (IST)

    रायपुर से राजिम और गरियाबंद की यात्रा प्रकृति, इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम है, जहां त्रिवेणी संगम, प्राचीन मंदिर और मनमोहक झरने पर्यटकों को आकर्षित ...और पढ़ें

    यहां नदियां करती हैं शिव का जलाभिषेक

    यहां नदियां करती हैं शिव का जलाभिषेक

    HighLights

    1. राजिम में महानदी, पैरी, सोंढूर नदियों का अद्भुत त्रिवेणी संगम।

    2. गरियाबंद में विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग भूतेश्वरनाथ महादेव।

    3. जतमई, घटारानी और चिंगरा पगार के मनमोहक झरने पर्यटकों को लुभाते।

    जितेंद्र सिंह दहिया, रायपुर। रायपुर से राजिम और गरियाबंद की ओर बढ़ते ही यह एहसास होने लगता है कि यह यात्रा केवल किसी धार्मिक स्थल तक पहुंचने की नहीं, बल्कि प्रकृति, इतिहास और आस्था के अद्भुत संसार से साक्षात्कार की है।
     
    महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का त्रिवेणी संगम दूर से ही यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। घाटों पर गूंजती मंदिरों की घंटियां, बहता जल और श्रद्धालुओं की आस्था ऐसा वातावरण रचती है, जो मन को सहज ही शांति और ऊर्जा से भर देता है। राजिम से आगे बढ़ते ही गरियाबंद का प्राकृतिक वैभव खुलने लगता है।
     
    पहाड़ों से उतरते झरने, सघन साल वन, प्राचीन मंदिर, वन्यजीवों से समृद्ध अभयारण्य और पुरातात्विक धरोहरें इस जिले को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशिष्ट पहचान दिलाती हैं। जुलाई से फरवरी तक गरियाबंद की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है।
     
    Raipur (4)

    यहां नदियां करती हैं शिव का जलाभिषेक

    वर्षाकाल के दिनों में रायपुर से 50 किमी दूर स्थित राजिम का कुलेश्वर महादेव मंदिर एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है। जब महानदी, पैरी और सोंढूर का जलस्तर बढ़ता है, तो मंदिर चारों तरफ से जल से घिर जाता है।
     
    यहां लहरें जब बार-बार शिवलिंग का स्पर्श करने के लिए आगे बढ़ती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है, मानों तीनों नदियां स्वयं भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने को आतुर हो रही हैं। 
     
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    राजीव लोचन: इतिहास का जीवंत अध्याय

    आठवीं शताब्दी का भगवान विष्णु को समर्पित राजीव लोचन मंदिर प्राचीन शिल्पकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। नल राजवंश के काल में निर्मित इस भव्य मंदिर के विशाल स्तंभों और दीवारों पर उकेरी गई आकृतियां उस दौर के कलाकारों की कुशलता की कहानी कहती हैं।
     
    मंदिर के गर्भगृह की दिव्यता और पत्थरों पर झलकता इतिहास श्रद्धालुओं को सदियों पुरानी संस्कृति के बहुत करीब ले जाता है।

    भूतेश्वरनाथ : प्राकृतिक शिवलिंग का आकर्षण 

    गरियाबंद शहर से तीन किलोमीटर दूर स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव को विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंगों में गिना जाता है। मान्यता है कि यह शिवलिंग हर वर्ष आकार में थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है। सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां आसपास के धमतरी, बालोद, महासमुंद आदि जिलों सहित ओडिशा और महाराष्ट्र से भी हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
     
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    मनमोहक झरनें : जतमई-घटारानी से चिंगरा पगार तक

    घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे जतमई, घटारानी और चिलका जैसे जलप्रपात अपनी शीतल जलधारा और मनमोहक वातावरण से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। झरने, हरियाली और शांत परिवेश शहरी भागदौड़ से दूर सुकून का एहसास कराते हैं।
     
    रोमांच पसंद करने वालों के लिए बारूका गांव के पास स्थित चिंगरा पगार जलप्रपात खास आकर्षण है। लगभग 130 फीट ऊंचाई से गिरते इस बरसाती झरने तक पहुंचने के लिए करीब तीन किमी की ट्रैकिंग करनी पड़ती है। ऊंची पहाड़ियों, सघन वनों और निर्मल जलधारा से घिरा यह स्थल ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और पिकनिक के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    कैसे पहुंचे और कहां ठहरें?

    गरियाबंद रायपुर से लगभग 90 किमी दूर है। रेल और हवाई यात्रा के लिए निकटतम केंद्र रायपुर है। रायपुर पहुंचने के बाद अभनपुर-राजिम मार्ग से सड़क मार्ग द्वारा लगभग दो से ढाई घंटे में गरियाबंद आसानी से पहुंचा जा सकता है। रायपुर से नियमित बस, टैक्सी और निजी वाहन की सुविधा उपलब्ध है।
     
    ठहरने के लिए गरियाबंद शहर में होटल हैं, जबकि जतमई क्षेत्र में वन विभाग का नेचर कैंप और निजी रिसार्ट पर्यटकों को प्रकृति के बीच ठहरने का अवसर देते हैं।