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    क्रिकेट के काले दौर का सच! सौरव गांगुली ने सचिन-कुंबले से फिक्सिंग पर किया था सवाल, सालों बाद हुआ खुलासा

    Updated: Fri, 15 May 2026 04:58 PM (IST)

    पूर्व भारतीय कप्‍तान सौरव गांगुली ने 2000 में हुए फिक्सिंग विवाद पर 26 साल बाद खुलकर बात की। ...और पढ़ें

    सौरव गांगुली।

    सौरव गांगुली।

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    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कप्‍तान सौरव गांगुली ने 2000 में हुए फिक्सिंग विवाद पर 26 साल बाद खुलकर बात की। दादा ने खुलासा किया कि उन्होंने पर्सनली सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले से पूछा था कि क्या भारतीय क्रिकेट के सबसे काले दौर में से एक के दौरान मैच फिक्सिंग के लिए उनसे कभी संपर्क किया गया था।

    राज शामानी के साथ एक पॉडकास्ट में गांगुली ने 2000 के उस दौर को याद किया, जब कई इंटरनेशनल क्रिकेटरों के सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के आरोपों से भारतीय क्रिकेट हिल गया था। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोन्ये का नाम फिक्सिंग में आया था। वहीं भारत के पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा भी इसमें शामिल थे।

    इसके बाद 27 साल के गांगुली को भारतीय टीम की कमान सौंपी गई। गांगुली ने कहा कि उन्हें खुद इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह मुद्दा कितना व्यापक था। उन्होंने सीनियर साथियों से बात करके स्थिति को समझने की कोशिश की।

    मैं सचिन-द्रविड़ से पूछता था

    गंगुली ने कहा, "मेरे कप्तान बनने से ठीक पहले भारतीय टीम जिन समस्याओं का सामना कर रही थी, (सट्टेबाजी, मैच फिक्सिंग) मुझे इनके बारे में पता भी नहीं था। मैं सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ से पूछता रहता था, 'क्या सच में ऐसा होता है?' क्या किसी ने आपसे संपर्क किया है? क्योंकि मुझसे तो किसी ने नहीं किया था।"

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    दादा ने कहा, "मैंने सचिन से पूछा, 'तुझे किसी ने पूछा?' उन्होंने कहा नहीं। हम सभी टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट खेलते थे। अनिल कुंबले से भी पूछा, उन्होंने कहा, 'नहीं। किसी ने मुझसे नहीं पूछा।' इसलिए मुझे ठीक से पता ही नहीं था कि यह मामला क्या है। कप्तानी तो बस एक जिम्मेदारी थी। इसलिए मेरे दिमाग में ये सब बातें नहीं थीं।"

    भारतीय क्रिकेट में हुआ बदलाव

    भारतीय क्रिकेट उन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा था। अजहरुद्दीन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया था। वहीं अजय जडेजा को पांच साल का निलंबन मिला। गांगुली को न केवल टीम को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, बल्कि फैंस का विश्‍वास भी जीतना था। गांगुली ने कहा कि अपने करियर की शुरुआत में ही कप्तानी संभालना चुनौतीपूर्ण था। उन्हें उन सीनियर खिलाड़ियों की कप्तानी करनी थी जिनके नेतृत्व में वे पहले खेल चुके थे।

    गांगुली की कप्तानी में भारत ने एक नए युग में प्रवेश किया और विश्व क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन किया। भारत ने विदेशों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया। ऑस्ट्रेलिया में 2003-04 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी ड्रॉ की। पाकिस्तान में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती। 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती और उसी साल आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब पर संयुक्‍त रूप से कब्‍जा जमाया।

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