Exclusive: भारत के साथ क्रिकेट संबंधों को सुधारने के लिए बेचैन बांग्लादेश, BCCI को लिखा पत्र
बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने क्रिकेट संबंधों को सुधारने की पहल की है। नई सरकार के गठन के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने BCCI को पत्र लिखा है। ...और पढ़ें

बांग्लादेश क्रिकेट टीम
HighLights
नई बांग्लादेश सरकार ने BCCI को पत्र लिखा
पिछले टी-20 विश्व कप विवाद के बाद संबंध बिगड़े
BCB ने भारतीय टीम के दौरे का अनुरोध किया
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण नई दिल्ली। इस साल टी-20 विश्व कप के दौरान भारत में खेलने से इन्कार करने वाला बांग्लादेश अब भारत के साथ अपने क्रिकेट संबंधों को सुधारना चाहता है। नई सरकार के गठन के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को एक पत्र लिखा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंध बहुत खराब हो गए थे। इसका असर दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ा।
बीसीसीआई के आदेश के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान का आईपीएल का करार खत्म कर दिया था। जिसके बाद बीसीबी ने भारत में अपनी टीम को विश्व कप खेलने के लिए नहीं भेजा। चेयरमैन जय शाह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने उसके बाद बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टी-20 विश्व कप में शामिल किया था।
BCB ने BCCI को लिखा पत्र
बीसीसीआई के विश्वस्त सूत्रों ने दैनिक जागरण को बताया कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने बीसीसीआई को पत्र लिखा है। इसमें बीसीसीआई और बीसीबी के पुराने मजबूत संबंधों का हवाला दिया गया है। साथ ही भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे को लेकर भी अनुरोध किया गया है।भारतीय टीम को पिछले साल बांग्लादेश में तीन वनडे और तीन टी-20 मैच खेलने जाना था लेकिन बीसीसीआई ने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए उसे इस साल सितंबर के लिए टाल दिया था लेकिन टी-20 विश्व कप विवाद के बाद इस दौरे का रद होना तय था।
अगले साल एशिया कप की मेजबानी भी बांग्लादेश के पास है। अगर भारतीय टीम वहां नहीं जाएगी तो फिर उस टूर्नामेंट को दुबई या श्रीलंका स्थानांतरित करना होगा। बीसीबी के एक अधिकारी ने भी माना कि उन्होंने बीसीसीआई को पत्र लिखा है। उन्होंने इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया।
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यूनुस सरकार के दौरान बिगड़े संबंध
यूनुस सरकार के दौरान मई 2025 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड में नए अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी, जिसमें अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने पदभार संभाला था। बुलबुल के कार्यकाल में ही बांग्लादेश ने भारत में खेलने से इन्कार किया था और पाकिस्तान के साथ मिलकर टूर्नामेंट के बहिष्कार का रुख अपनाया था। हालांकि बाद में पाकिस्तान अपने फैसले से पीछे हट गया और भारत के विरुद्ध मैच खेला, जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा। इसमें बांग्लादेश का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। बीसीसीआई के पदाधिकारी ने कहा कि हमें पत्र मिला है लेकिन हम केंद्र सरकार के रुख का इंतजार करेंगे।
केंद्र सरकार से बातचीत और अनुमति के बिना कुछ नहीं होगा। अगर इतिहास के पन्नों को पलटें तो बीसीसीआई की वजह से ही बांग्लादेश को टेस्ट देश का दर्जा मिला था। बांग्लादेश ने भी आईसीसी में हमेशा बीसीसीआई का साथ दिया लेकिन पिछली कार्यकारी सरकार के दौरान उनका रवैया बदल गया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी इसमें काफी योगदान निभाया था।
नई सरकार बनने के बाद शुरू हुई कवायद
बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी की सरकार आने के बाद खेल मंत्री अनीमुल हक ने भारत के साथ फिर से क्रिकेट संबंधों को सुधारने की पहल की है। अमीनुल का मानना है कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना जरूरी है और खेल के क्षेत्र में विवादों को कूटनीतिक बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। अमीनुल हक इससे पहले इस संबंध में भारत के उप उच्चायुक्त से मुलाकात कर चुके हैं। हक ने खेल मंत्री बनने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों के चयन पर भी सवाल उठाए थे।
चरम पर पहुंच गया था विवाद
भारत और बांग्लादेश के बीच खराब होते संबंधों के बावजूद आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने पिछले साल आईपीएल नीलामी में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदा जिसका देश में जबरदस्त विरोध हुआ। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और भारत में रहमान को खरीदने के विरोध को देखते हुए बीसीसीआई ने केकेआर को मुस्तफिजुर का करार खत्म करने को कहा।
केकेआर ने तुरंत करार खत्म कर दिया, जिस पर तत्कालीन बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद बीसीबी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपनी टीम को भारत भेजने से इन्कार कर दिया और अपने मैचों को श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग की। आईसीसी ने जब बीसीबी की यह मांग नहीं मानी तो उसने ग्रुप बदलने की मांग की। इस पर भी आईसीसी नहीं मानी और उसने अंत में बांग्लादेश की जगह स्काटलैंड को टी-20 विश्व कप में शामिल किया। हालांकि आईसीसी ने बांग्लादेश पर कोई खेल या प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं लगाया और भविष्य में मेजबानी के अवसर देने का भरोसा दिया।