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    बेन स्टोक्स ने 'बैजबॉल' स्टाइल से बदल दी थी टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा, विवाद के साथ खत्म हुआ करियर

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 09:07 PM (IST)

    बेन स्टोक्स ने न्यूजीलैंड के खिलाफ निर्णायक टेस्ट हारने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जिससे इंग्लैंड के भविष्य पर संकट के बादल छा ग ...और पढ़ें

    बेन स्टोक्स

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    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। कभी इंग्लैंड की सबसे बड़ी उम्मीद रहे कप्तान बेन स्टोक्स ने सिद्धांतों की ऐसी चिता जलाई कि उसमें जलकर उनका करियर तो असमय राख हुआ ही, इंग्लैंड के भविष्य पर भी गहरे संकट के बादल छा गए। न्यूजीलैंड से तीसरे और निर्णायक टेस्ट में हार के साथ बेन स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

    अब यह महान ऑलराउंडर कभी इंग्लैंड की जर्सी में दिखाई नहीं देगा। स्टोक्स ने एक दिन पहले ही रविवार को घोषणा की थी कि सोमवार उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी दिन होगा। सोमवार को इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड के 372 रन के लक्ष्य के सामने 212 रन पर सिमट गई और स्टोक्स की कप्तानी में उनकी आखिरी सीरीज में टीम को 1-2 से हार मिली, लेकिन स्टोक्स की पूरी कहानी यह नहीं है।

    बेन स्टोक्स ने बदल दिया था खेलने का स्टाइल

    इस जुझारू ऑलराउंडर ने चार साल पहले इंग्लिश टेस्ट क्रिकेट में नई जान फूंकी थी। हालांकि तब किसी को नहीं पता था कि उनकी आखिरी सीरीज ऐसी होगी जिसे वह कभी नहीं याद रखना चाहेंगे। कुछ दिन पहले ही कप्तान स्टोक्स व उनके साथी एटकिंसन से जुड़ी नाइटक्लब की घटना पूरी तरह से गैर-जरूरी और खुद पर केंद्रित हरकत थी।

    यह एक ऐसे बागी ऑलराउंडर की तरफ से हैरान कर देने वाला कदम था, जिसने शानदार प्रदर्शन से अपनी पहचान बनाई थी, लेकिन नाइटक्लब के बाहर लड़ाई की हरकत ने उनके करियर में दाग लगा दिया। उन्हें दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया और जब वह तीसरे टेस्ट में कप्तानी करने आए तो ये तय हो गया कि अब वह और इंग्लैंड टीम एक साथ आगे नहीं चल सकती।

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    इंग्लैंड को पहली बार दिलाया विश्व कप

    इंग्लैंड को पहली वनडे विश्व कप ट्राफी और एशेज में इंग्लैंड को सफलता दिलाने वाले स्टोक्स न्यूजीलैंड के विरुद्ध तीसरे मुकाबले के बीच में ही अपनी विदाई की कहानी लिखने में जुट गए थे। हालांकि, इस घोषणा के बीच भी वह मैदान पर हमेशा की तरह इंग्लैंड के लिए नायक बने रहे।

    न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में उनका पूरे 11 ओवर का लंबा स्पेल, संन्यास की घोषणा के ठीक बाद उनका विकेट चटकाना उनके संघर्ष की गवाही देता रहेगा। अगला वाकया इससे भी बड़ा उदाहरण था। वह चौथे दिन हार बचाने के लिए लड़ने आए। वह इंग्लैंड के लिए बल्ले से भी कप्तान की जिम्मेदारी निभाने को तैयार थे। उन्होंने दिन के अंत तक चार विकेट गंवा चुके इंग्लैंड के लिए इस बीच 30 रन की अहम पारी खेली और मुश्किल पहाड़ जैसे लक्ष्य को कुछ छोटा करने का अपना अंतिम प्रयास किया।

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