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जब बिशन सिंह बेदी की सलाह ने पाकिस्तान को भारत में जिताया था टेस्ट, पूर्व पाक दिग्गज ने सुनाया 1987 का वो दिलचस्प किस्सा

Published: Thu, 13 Aug 2026 09:00 AM (IST)

पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट स्पिनर और पूर्व चीफ सेलेक्टर इकबाल कासिम ने मौजूदा पीढ़ी के क्रिकेटरों की आलोचना की है।

भारत बनाम पाकिस्‍तान

भारत बनाम पाकिस्‍तान

HighLights

  1. स्किल से ज्यादा पैसे के पीछे भाग रहे युवा- इकबाल

  2. कासिम ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों को जमकर लताड़ा

  3. इकबाल कासिम ने खोले ड्रेसिंग रूम के बड़े राज

स्‍पोर्ट्स डेस्‍क, नई दिल्‍ली। पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट स्पिनर और पूर्व चीफ सेलेक्टर इकबाल कासिम ने मौजूदा पीढ़ी के क्रिकेटरों की आलोचना करते हुए कहा है कि बहुत से युवा खिलाड़ी अपनी स्किल्स और खेल की समझ को बेहतर बनाने के बजाय पैसे कमाने पर फोकस कर रहे। कासिम ने 50 टेस्ट मैच खेले हैं और कई बार नेशनल सिलेक्शन कमिटी में भी रहे हैं। उन्‍होंने सेलेक्शन से जुड़े फैसलों में लंबे समय की प्लानिंग और निरंतरता की कमी पर भी सवाल उठाए हैं।

अच्छी-खासी सैलरी मिलती

PTI के अनुसार, उन्होंने कहा, "मैं कई बार चीफ सेलेक्टर और सेलेक्शन कमिटी का सदस्य रहा हूं। हमने बिना किसी सैलरी या फीस के मानद तौर पर काम किया है।" उन्होंने कहा, "आजकल सेलेक्शन कमेटी में रहने के लिए सेलेक्टरों को अच्छी-खासी सैलरी मिलती है, लेकिन मुझे फैसले लेते समय विजन की कमी दिखती है।"

पैसे कमाने पर ज्‍यादा ध्यान

फर्स्ट-क्लास करियर में 999 विकेट लेने वाले पूर्व स्पिनर का मानना है कि युवा खिलाड़ियों में कमिटमेंट की कमी से पाकिस्तान क्रिकेट पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं अतीत या उस समय के बारे में बात नहीं करना चाहता जब हम क्रिकेट खेलते थे। लेकिन सच कहूं तो, मुझे ज्‍यादातर युवा खिलाड़ियों में अपने खेल की समझ और स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए ध्यान देने और कड़ी मेहनत करने में दिलचस्पी या कमिटमेंट की कमी दिखती है। वे पैसे कमाने पर ज्‍यादा ध्यान देते हुए लगते हैं।"

अब ऐसा कम ही देखने को मिलता

कासिम ने कहा कि अब खिलाड़ियों के पास पैसे कमाने के ज्‍यादा मौके हैं, लेकिन कई युवा खिलाड़ी सफलता का मतलब सिर्फ पाकिस्तान सुपर लीग का कॉन्ट्रैक्ट पाना ही समझते हैं। "पिछले कुछ दशकों में क्रिकेट में बहुत बदलाव आया है, लेकिन सफलता का फॉर्मूला वही है - कोई खिलाड़ी अपनी स्किल्स और गेम को समझने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कितना समय देता है। पाकिस्तान क्रिकेट में अब ऐसा कम ही देखने को मिलता है।"

उन्‍होंने कहा, "युवा खिलाड़ी कोच, असिस्टेंट और डेटा पर बहुत निर्भर रहते हैं; वे खुद से चीजों को समझने या उन पर काम करने में समय नहीं लगाते।" उन्होंने कहा कि बेहतरीन खिलाड़ियों ने हमेशा अपनी स्किल्स, फिटनेस और मैच की स्थितियों को समझने की क्षमता पर खुद से काम किया है।

कासिम ने कहा, "मुझे लगता है कि अपने देश के लिए खेलना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा इनाम है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक खिलाड़ी के तौर पर आप जितना बेहतर बनेंगे, पैसा अपने आप उतना ही ज्‍यादा आएगा। आपको उसके पीछे भागने की जरूरत नहीं है।"

मशहूर टेस्ट जीत को भी याद किया

कासिम ने 1987 में बैंगलोर में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मशहूर टेस्ट जीत को भी याद किया, जहां भारत के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी की सलाह ने उनके खेलने के तरीके को बेहतर बनाने में मदद की थी। "बैंगलोर टेस्ट के रेस्ट डे पर एक फंक्शन में हमारी मुलाकात बिशन साहब से हुई थी। वे दूसरी पारी में मनिंदर सिंह की बॉलिंग से खुश नहीं थे। उनका कहना था कि जिस पिच पर गेंद बहुत टर्न हो रही थी, वहां मनिंदर गेंद को इतना टर्न करा रहे थे कि बल्लेबाज को आउट करना (चाहे LBW हो या कैच) लगभग नामुमकिन हो गया था।"

कासिम ने बताया कि उन्होंने बेदी की सलाह मानी, सही जगहों पर गेंदबाजी की और पिच से मिलने वाले नैचुरल टर्न का फायदा उठाया। इससे पाकिस्तान को मैच जीतने में मदद मिली। उन्होंने यह भी याद किया कि कैसे उन्होंने कप्तान मिसबाह-उल-हक के विरोध के बावजूद वेस्टइंडीज दौरे के लिए शाहिद अफरीदी को टीम से बाहर करने से मना कर दिया था।

उन्होंने बताया, "मैंने जका साहब और कप्तान मिसबाह से (जो अफरीदी को टीम में नहीं चाहते थे) कहा कि 16 सबसे अच्छे खिलाड़ियों को चुनना सेलेक्टर का काम है और अपनी पसंद के 11 खिलाड़ियों को खिलाना कप्तान का काम है। इसलिए मैं अफरीदी को टीम से नहीं हटाऊंगा। मिसबाह ने मुझसे कहा कि वह उन्हें नहीं खिलाएंगे, तो मैंने कहा ठीक है, यह आपका फैसला है, लेकिन वह दौरे पर जाएंगे।"

आखिरकार अफरीदी खेले और अपने पहले ही मैच में कई विकेट लिए। कासिम का मानना है कि अलग-अलग अधिकारियों के बीच दखलअंदाजी पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिससे कन्‍फयूजन और विवाद पैदा होते हैं।

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