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श्रीलंका से दूसरे ड्रॉ टेस्ट ने बढ़ाई भारत की मुश्किलें, अब करो या मरो की स्थिति में फंस गई टीम इंडिया

Updated: Sat, 29 Aug 2026 09:01 AM (IST)

भारत के लिए आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना मुश्किल होता दिख रहा है। कोलंबो में श्रीलंका ने ...और पढ़ें

भारती की बढ़ी मुश्किलें

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली: श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट सीरीज में भारत के लिए परिणाम अपेक्षानुरूप नहीं रहे। भारतीय टीम जब श्रीलंका दौरे पर पहुंची थी तो उसके सामने ये सीरीज 2-0 से जीतकर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल का दावा मजबूत करने की भी चुनौती थी।

गॉल टेस्ट 165 रन से जीतकर भारतीय टीम ने इस ओर कदम बढ़ाया, लेकिन श्रीलंका ने कोलंबो टेस्ट ड्रॉ कराकर फिलहाल उसकी राह काफी मुश्किल कर दी है। अब भारतीय टीम को डब्ल्यूटीसी चक्र 2025-27 में सात टेस्ट मैच खेलने हैं। इनमें से दो न्यूजीलैंड और पांच टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया से होने हैं और अगर उसे डब्ल्यूटीसी फाइनल में जगह बनानी है तो इन सभी मैचों में असाधारण प्रदर्शन करना होगा।

नहीं मिले ज्यादा अंक

भारतीय टीम जब श्रीलंका पहुंची थी तो उसके पास नौ टेस्ट मैच थे। श्रीलंका में भारत ने दो टेस्ट की सीरीज 1-0 से अपने नाम की, लेकिन इस दौरे से 24 में से सिर्फ 16 अंक ही मिल सके। भारत अब डब्ल्यूटीसी अंक तालिका में 51.52 प्रतिशत अंक (पीसीटी) के साथ पांचवें स्थान पर है। अब भारत के पास इस डब्ल्यूटीसी चक्र में सिर्फ सात टेस्ट बचे हैं। अक्टूबर-नवंबर में न्यूजीलैंड के विरुद्ध उसके घर में दो और फिर दिसंबर-जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट मैच।

अगर भारत अपने बाकी सातों टेस्ट जीत लेता है, तो उसका पीसीटी 70.37 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। ऐसे में उसके फाइनल में पहुंचने की संभावना मजबूत हो जाएगी। वहीं अगर भारत छह टेस्ट जीतता है और एक हारता है, तो उसका पीसीटी करीब 65 प्रतिशत रहेगा। पिछले दो डब्ल्यूटीसी चक्र के परिणाम को देखें तो यह स्कोर फाइनल की दौड़ में बनाए रखने के लिए काफी अहम हो सकता है, लेकिन तब भारत को दूसरी टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी।

न्यूजीलैंड से हार बिगाड़ेगी खेल

सबसे मुश्किल स्थिति तब बनेगी अगर भारतीय टीम न्यूजीलैंड से 0-2 हार जाए और ऑस्ट्रेलिया को घरेलू सीरीज में 5-0 से हरा दे। ऐसी स्थिति में भारत का अंतिम पीसीटी करीब 59.26 प्रतिशत रहेगा और तब फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए उसे दूसरे मुकाबलों के नतीजों पर काफी निर्भर रहना पड़ेगा। यानी भारत के लिए अब समीकरण बिल्कुल स्पष्ट है कि न्यूजीलैंड में जीत और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध घरेलू सीरीज में शानदार प्रदर्शन ही फाइनल का टिकट दिलाने का सबसे मजबूत रास्ता है। श्रीलंका में मिली 1-0 की जीत ने उम्मीद तो जिंदा रखी है, लेकिन अब एक भी खराब सीरीज भारत पर भारी पड़ सकती है।

ऑस्ट्रेलिया सबसे मजबूत दावेदार

ऑस्ट्रेलिया फिलहाल 80 प्रतिशत पीसीटी के साथ तालिका में शीर्ष पर है। उसके 10 मैचों में आठ जीत और दो हार हैं। उसके 12 टेस्ट बाकी हैं, जिनमें से उसे दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध तीन, न्यूजीलैंड के विरुद्ध चार और भारत के विरुद्ध पांच टेस्ट मैच खेलने हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए छह जीत और एक ड्रॉ उसे 65 प्रतिशत से ऊपर ले जाएगा, जबकि सात जीत और एक ड्रॉ उसे करीब 70 प्रतिशत तक पहुंचा सकता है।

दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड भी मजबूत

दक्षिण अफ्रीका 72.22 प्रतिशत के साथ मजबूत स्थिति में है। उसके 10 टेस्ट बाकी हैं, जिनमें आठ घरेलू मैदान पर हैं। छह जीत और एक ड्रॉ उसे 66.67 प्रतिशत तक पहुंचा सकता है। न्यूजीलैंड भी 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत और श्रीलंका के विरुद्ध उसके घरेलू टेस्ट तथा ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध चार मुकाबले उसकी राह तय करेंगे। सात जीत उसे करीब 70.83 प्रतिशत तक पहुंचा सकती हैं। वहीं बांग्लादेश चौथे स्थान पर है और उसके छह टेस्ट बाकी हैं। चार मैच घरेलू मैदान पर हैं। अगर वह चार टेस्ट जीतकर दो ड्रा करता है तो उसका पीसीटी 66.67 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

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