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    Women's T20 World Cup 2026 में शर्मनाक विदाई के बाद टीम इंडिया को करना होगा आत्ममंथन, क्या हरमनप्रीत कौर की जाएगी कप्तानी?

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 06:50 PM (IST)

    महिला टी-20 विश्व कप में भारत की हार के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं और टीम को आत्ममंथन की सख्त जरूरत है। ...और पढ़ें

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम

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    पीटीआई, नई दिल्ली। महिला टी-20 विश्व कप में भारत के एक बार फिर नाकाम रहने के बाद कप्तान के तौर पर हरमनप्रीत कौर के भविष्य पर तो सवाल उठ ही रहे हैं और अब यह भी तय है कि टीम को आत्ममंथन करने की सख्त जरूरत है। छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के हाथों रविवार को मिली छह विकेट से हार ने भारत की सेमीफाइनल खेलने की उम्मीदें तोड़ दीं।

    टूर्नामेंट से पहले प्रबल दावेदारों में गिनी जा रही भारतीय टीम वनडे विश्व कप वाली फॉर्म नहीं दोहरा सकी। टी-20 विश्व कप में लगातार दूसरी बार हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत नॉकआउट में नहीं पहुंच सका जिससे इस प्रारूप में टीम की प्रगति को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं।

    हरमनप्रीत कौर को ही कप्तान के तौर पर देखना चाहते हैं मजूमदार

    ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद कोच अमोल मजूमदार और हरमनप्रीत ने ‘पुनर्विचार’ शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन बात सिर्फ पुनर्विचार की नहीं बल्कि नए सिरे से टीम तैयार करने की भी है। भारत को वनडे विश्व कप दिलाने वाली कप्तान हरमनप्रीत के भविष्य को लेकर चर्चायें फिर होने लगी है।

    37 वर्ष की हरमनप्रीत भारत की सबसे सफल टी20 कप्तान रही हैं, लेकिन विश्व कप ऐसा मंच है, जहां से तकदीरें बनती और बिगड़ती हैं। मजूमदार से हालांकि जब पूछा गया कि क्या हरमनप्रीत को कप्तान रहना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है लेकिन मेरा जवाब यही होगा कि हां।

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    विश्व कप में भारत तीनों विभागों में रहा नाकाम

    हालांकि, इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता कि उनकी कप्तानी में भारत इंग्लैंड में तीनों विभागों में नाकाम रहा। टूर्नामेंट से पहले टीम संयोजन स्थिर नहीं था और बल्लेबाजी क्रम में बदलाव होता रहा। टी-20 विश्व कप 2024 के बाद से हरमनप्रीत 24 पारियों में चार बार ही 50 के स्कोर से आगे बढ़ सकी हैं । उन्होंने रविवार को ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध शानदार पारी खेली, लेकिन टूर्नामेंट के बाकी मैचों में वह उतना योगदान नहीं दे सकीं।

    ऑलराउंडरों के नहीं मिले विकल्प

    टूर्नामेंट के दौरान भी तेज आक्रमण, मध्यक्रम के संयोजन और ऑलराउंडरों के विकल्प को लेकर सवालों के जवाब नहीं मिल सके। पांच ग्रुप मैचों में तेज आक्रमण में कई बदलाव किए गए। नंदनी शर्मा और क्रांति गौड़ ने तीन तीन मैच खेले, जबकि रेणुका सिंह और अरूंधति रेड्डी को दो ही मैचों में उतारा गया। हरफनमौला तेज गेंदबाज अमनजोत कौर और ऑफ स्पिनर श्रेयंका पाटिल की चोट ने मुश्किलें बढाई। बांए हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने छह से कम की किफायत दर से 14 विकेट चटकाए। रेणुका जैसी अनुभवी गेंदबाज का पूरा इस्तेमाल नहीं करना भी समझ से परे रहा।

    रनगति और क्षेत्ररक्षण में भी खाई मात

    बल्लेबाजी में बीच के ओवरों में रनगति बहुत ही कम रही। यास्तिका भाटिया और जेमिमा रोड्रिग्स ने निराश किया जिससे ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा पर दबाव बना। स्मृति मंधाना का स्ट्राइक रेट भी चिंता का विषय रहा। इसके अलावा भारत का क्षेत्ररक्षण भी काफी लचर रहा। भारतीय टीम ने पांच मैचों में दस कैच टपकाए, वहीं बांग्लादेश के विरुद्ध भी पहले पांच ओवर में चार कैच छूटे।

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