अपने ही नियमों में उलझा AIIMS, अगर एक विभाग में बंद की कीमोथेरेपी तो दूसरे में जारी क्यों? उठ रहे सवाल
एम्स दिल्ली कीमोथेरेपी को लेकर अपने ही बनाए नियमों का पालन नहीं कर रहा है। फरवरी 2023 में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में कीमोथेरेपी बंद कर इसे मेडिकल ऑन्कोलॉजी ...और पढ़ें

एम्स में रेडिएशन आंकोलॉजी से बंद कर दी थी सेवा। फोटो: आर्काइव
HighLights
एम्स दिल्ली कीमोथेरेपी नियमों का पालन नहीं कर रहा
फरवरी 2023 में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में सेवा बंद की गई
अब अन्य विभागों में भी कीमोथेरेपी दी जा रही है
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली कीमोथेरेपी को लेकर अपने ही बनाए नियमों का पालन नहीं कर रहा है। एम्स का कहना है कि कीमोथेरेपी मेडिकल आंकोलाॅजी का कार्यक्षेत्र है न कि रेडिएशन आंकोलाॅजी का।
2023 में रेडिएशन आंकोलाॅजी से बंद की गई थी सेवा
इस नियम का हवाला देते हुए एम्स निदेशक ने फरवरी 2023 में एम्स ने रेडिएशन आंकोलाॅजी विभाग में कीमोथेरेपी को अपने इस नियम का हवाला देते हुए फरवरी 2023 में एम्स निदेशक ने रेडिएशन आंकोलाूजी कीमोथेरेपी सेवाएं बंद कर इसे पूरी तरह मेडिकल आंकोलाॅजी विभाग के अधीन कर दिया था।
प्रबंधन ने विशेषज्ञता का दिया था तर्क
प्रबंधन का तर्क था कि उपचार विशेषज्ञता के आधार पर ही होना चाहिए। यहां तक कि रेडिएशन आंकोलाॅजी के जिस स्थान पर कीमोथेरेपी दी जाती थी, तत्काल प्रभाव से उसे भी मेडिकल आंकोलाॅजी के हवाले कर दिया गया था।
उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी
चेतावनी जारी की थी कि अगर रेडिएशन आंकोलाॅजी का कोई की कर्मी कोई इसके बाद ऐसा करते हुए पाया गया कि उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अब खुद नियमों का पालन नहीं कर रहा एम्स
पर, अब सामने आया है कि एम्स अपने ही बनाए नियमों का पालन नहीं कर रहा, मेडिकल आंकोलाजी के अलावा भी उसके तमाम विभागों कीमोथेरेपी दी जा रही है, यहां तक कि सर्जरी में भी। एम्स प्रबंधन भी इस बात को स्वीकार करता है।
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प्रबंधन की मंशा पर उठ रहे सवाल
ऐसे में एम्स प्रबंधन की मंशा को लेकर सवाल उठ रहे है कि जब पहले यह सेवा केवल एक विभाग तक सीमित बताई गई, तो अन्य विभागों में इसे अब तक कैसे जारी रखा गया है।
निदेशक से जुड़े विभाग में भी जारी सेवा
यहां तक कि एम्स निदेशक से जुड़े विभाग में कीमोथेरेपी दी जा रही है। यदि यह स्थिति संस्थान के भीतर ही नीति के असमान पालन पर चिकित्सकों सहित संस्थान कर्मियों में असंतोष के साथ आक्रोश को जन्म दे रही है।
मरीजों में बढ़ा भ्रम और असमानता
मरीजों और उनके स्वजन का कहना है कि इस असंगति का सीधा असर कैंसर रोगियों के उपचार पर पड़ रहा है। एक ओर रेडिएशन आंकोलाॅजी में यह सेवा बंद है, वहीं दूसरी ओर अन्य विभागों में जारी रहने से भ्रम और असमानता की स्थिति बन रही है।
अन्य संस्थानों में नहीं है ऐसा नियम
विशेषज्ञों का कहना है कि देश के अन्य एम्स, बड़े चिकित्सा संस्थान, पीजीआई और मेडिकल काॅलेजों में इस तरह का कोई नियम नहीं है और सभी जगह रेडिएशन आंकोलाॅजी में कीमोथेरेपी दी जा रही है।
नीति में समानता जरूरी, नहीं तो भरोसे पर असर
कोई भी दिल्ली एम्स के मनमाने नियम का अनुशरण नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी सेवा को एक स्पष्ट नीति के तहत सीमित किया जाता है, तो उसका समान रूप से पालन आवश्यक है। अन्यथा इससे न केवल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, बल्कि इसका मरीजों के भरोसे पर भी असर पड़ता है।
एम्स प्रबंधन का जवाब क्या है?
एम्स प्रबंधन इस विरोधाभास को लेकर अब क्या नीति अपनाता है और क्या सभी विभागों के लिए एक समान नीति सुनिश्चित करता है या फिर पूर्व की व्यवस्था को बहाल करता है। इस बाबत, पूछे जाने पर एम्स नई दिल्ली के जनसंपर्क कायार्लय ने स्वीकार किया कि मेडिकल आंकोलाॅजी के साथ पीडियाट्रिक आंकोलाॅजी में कीमोथेरेपी चल रही है।
अन्य विभागों पर चुप्पी
जब उनसे आधा दर्जन के करीब अन्य विभागों में जहां कीमोथेरेपी चल रही, का लिखित में नाम देकर उनके बारे में जानकारी चाही गई तो प्रश्न पढ़ने के बाद भी कोई उत्तर नहीं दिया गया।
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