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    बीपीएल मरीजों को नहीं मिल रहा सीटी स्कैन-एमआरआई, फरीदाबाद नागरिक अस्पताल में व्यवस्था गड़बड़

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 10:15 PM (GMT+05:30)

    फरीदाबाद के बादशाह खान अस्पताल में बीपीएल कार्डधारकों को सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधा नहीं मिल पा रही है। बिचौलियों की दखलंदाजी रोकने के लिए 'डे केयर फ ...और पढ़ें

    फरीदाबाद के बादशाह खान अस्पताल में बीपीएल कार्डधारकों को सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधा नहीं मिल पा रही है।

    फरीदाबाद के बादशाह खान अस्पताल में बीपीएल कार्डधारकों को सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधा नहीं मिल पा रही है।

    अनिल बेताब, फरीदाबाद। जिला नागरिक बादशाह खान अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप नीति(पीपीपी) के तहत चल रहे सेंटर में ओपीडी में आने वाले बीपीएल कार्डधारक मरीजों को सीटी स्कैन व एमआरआइ की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

    ऐसे में पात्र होने के बाद भी आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निराश ही लौटना पड़ रहा है। या फिर निजी संस्थानों में टेस्ट कराने को मजबूर हैं। जबकि प्रदेश सरकार की ओरसे नागरिक अस्पताल में लगभग 10 वर्ष पहले पीपीपी के तहत सेंटर शुरू किया गया था,ताकि नागरिक अस्पताल में कम शुल्क पर आम मरीजों को यह सुविधा मिल सके और बीपीएल को निश्शुल्क मिले।

    हैरानी की बात है कि इस सुविधा का लाभ लेने को कई बिचौलिये भी सक्रिय हो गए और उन लोगों का टेस्ट कराने लगे, जो हकदार भी नहीं हैं। पहले अस्पताल प्रबंधन के सत्यापन के बाद ही बीपीएल कार्डधारक का टेस्ट हो पाता था। सत्यापन अब भी होगा, मगर डे केयर फाइल बनाई जाएगी।

    इस मामले में गड़बड़ीकी शिकायत के चलते ही अब स्वास्थ्य महानिदेशक डा. मनीष बंसल के आदेश पर ओपीडी के डाक्टर की सलाह पर बीपीएल कार्डधारक के टेस्ट नहीं हो रहे हैं। डीजी के आदेश अनुसार मरीज की डे केयर फाइल बनाई जानी अनिवार्य की गई है।

    डॉक्टर सभी मरीजों की फाइल नहीं बना रहे हैं। बहुत से डॉक्टरों को डीजी के आदेश के बारे में पूरी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में कई बीपीएल कार्डधारकों को टेस्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है और वी निराश लौट रहे हैं। डीजी के आदेश से पहले ओपीडी पंजीकरण कार्ड पर ही सीटी स्कैन व एमआरआइ कर दिया जाता था।

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    बीपीएल कार्ड होने पर भी नहीं हुआ सीटी स्कैन

    गौछी गांव निवासी मनीषा बीपीएल कार्डधारक हैं। उनकी बेटी नेहा के पेट में दर्द है। उल्टी भी हो रही है। नागरिक अस्पताल में आने पर डाक्टर ने पेट का सीटी स्कैन करवाले की सलाह दी तो वह सेंटर में आ गए। मनीषा ने बताया कि सेंटर में
    उनकी बेटी का सीटी स्कैन नहीं हो पाया। उन्हें बताया गया कि फाइल बनने पर ही सीटी स्कैन हो पाएगा।

    डीजी ने अनिवार्य की है मरीज की फाइल बनाना, लोग कर रहे व्यवस्था में सुधार की मांग डीजी ने मरीज की फाइल बनाना तो अनिवार्य कर दिया है, मगर अब मरीज और स्वजन पूछ रहे हैं कि हकदार कहां जाएं। सामाजिक संस्थाओं ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है।

    नवप्रयास सेवा संगठन के अध्यक्ष सुनील यादव कहते हैं कि सबसे पहले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की परेशानी पर ध्यान दिया जाना चाहिए। गड़बड़झाला अगर कहीं है तो उसे रोका जाना ठीक है। मगर मरीजों को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य निदेशालय के अधिकारी इसे गंभीरता से लें और व्यवस्था में सुघार होना चाहिए।

    डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि जिन मरीजों को सीटी स्कैन और एमआआइ की जरूरत है। उनकी डे केयर फाइल बनाई जाए।
    इससे हर मामले में मरीज की केस हिस्ट्री विभाग के पास होगी। व्यवस्था को बेहतर करने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है।सीएमओ और पीएमओ को इस मामले में व्यवस्था बनानी चाहिए।
    -डॉ. मनीष बंसल, स्वास्थ्य महानिदेशक, हरियाणा।

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