हृदय रोगियों को तेल बंद करने की जरूरत नहीं, खाने में ये चीजें फायदेमंद; क्या कहते हैं AIIMS के विशेषज्ञ
एम्स दिल्ली के डॉ. अंबुज राय के अनुसार, हृदय रोगियों को तेल पूरी तरह बंद करने की आवश्यकता नहीं है। ...और पढ़ें
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हृदय रोग में तेल का उपयोग पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं। एआई जनरेटेड

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अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। हृदय रोग में भी अच्छे वसा वाले नट्स और तेल शरीर के लिए जरूरी होते हैं। इसलिए हृदय रोग में तेल का उपयोग पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं, क्योंकि भारतीय स्वाद अनुसार तैयार भोजन पद्धति से इसे काबू में रखा जा सकता है। सीमित मात्रा में सही प्रकार के तेल और नट्स दिल और शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
यह कहना है अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज राय का। उनके अनुसार, दिल के मरीजों को तेल पूरी तरह बंद करने की आवश्यकता नहीं। बादाम और अखरोट जैसे नट्स और सरसों या मूंगफली जैसे तेल शरीर को आवश्यक अच्छे वसा प्रदान करते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भी होते हैं।
दिल की बीमारी को केवल दवाओं से ही नहीं
दावा किया कि दिल की बीमारी को केवल दवाओं से ही नहीं, बल्कि सही भोजन प्रबंधन से भी नियंत्रित और इसके खतरे को कम किया जा सकता है। बताया कि यदि पूरा परिवार मिलकर इस प्रकार का भोजन अपनाए तो इसे लंबे समय तक जारी रखना आसान हो जाता है।
इसी के मद्देनजर भारतीय परिस्थितियों व स्वाद को ध्यान में रख हुए शोध में दिल के मरीजों के लिए इंडियन अडैप्टेड मेडिटेरेनियन डाइट (आइएएमडी) तैयार की गई है। बताया कि दुनिया में मेडिटेरेनियन डाइट को दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है, लेकिन भारतीय घरों में इसे उसी रूप में अपनाना आसान नहीं होता। इसलिए भारतीय मसालों, दालों और स्थानीय खाद्य पदार्थों को शामिल करके इसे विकसित किया गया है।
मोटे अनाज, दाल और मसालों पर आधारित भोजन
इस भोजन में सरसों या मूंगफली का तेल, रागी, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज, दालें, हरी सब्जियां, फल, बादाम और अखरोट जैसे नट्स और सीमित मात्रा में तेल को शामिल किया गया है। दावा है कि यह भोजन शरीर में सूजन बढ़ाने वाले प्रभाव को कम करने में मदद करता है और दिल की सेहत को बेहतर बनाता है।
शोध में पाया गया कि हृदय रोग के जिन मरीजों ने इस भोजन पद्धति को अपनाया, उनके शरीर के भार सूचकांक, शुगर और कोलेस्ट्राल के स्तर में सुधार देखा गया।
पोषण विशेषज्ञ भी रहे शामिल
इस शोध में पोषण विशेषज्ञों की टीम भी शामिल रही। इसमें द जार्ज इंस्टीट्यूट फार ग्लोबल हेल्थ में पोषण कार्यक्रम की प्रमुख डा. सुपर्णा घोष और उनकी टीम भी इस शोध में शामिल रहीं।
मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
डॉ. अंबुज राय ने बताया कि वर्ष 2025 में यह शोध अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘बीएमसी न्यूट्रिशन’ और ‘जर्नल आफ क्लिनिकल लिपिडोलाजी’ में प्रकाशित हुआ।
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140 मरीजों पर चल रहा है परीक्षण
अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की मदद से 140 मरीजों पर इस भोजन पद्धति का चिकित्सकीय परीक्षण चल रहा है।
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