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    लिवर फेल्योर के 30% मामलों की वजह हेपेटाइटिस-ए और ई, AIIMS अध्ययन में बड़ा खुलासा

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 11:33 PM (IST)

    एम्स के शोध के अनुसार, भारत में तीव्र लिवर फेल्योर के लगभग 30% मामलों के लिए हेपेटाइटिस-ए और ई संक्रमण जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों ने दूषित पानी, खराब ख ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. तीव्र लिवर फेल्योर के 30% मामले हेपेटाइटिस-ए, ई से।

    2. दूषित भोजन, पानी से फैलते हैं हेपेटाइटिस-ए, ई संक्रमण।

    3. स्वच्छता, टीकाकरण, जांच से लिवर रोगों से बचाव संभव।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारत में तीव्र लिवर फेल्योर के करीब 30 प्रतिशत मामलों के लिए हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई संक्रमण जिम्मेदार हैं। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के शोध में यह सामने आया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, तीव्र लिवर फेल्योर एक गंभीर स्थिति है, जिसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और समय पर जांच से इन संक्रमणों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. प्रमोद गर्ग ने बताया कि लिवर शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन, मेटाबालिज्म, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और प्रतिरक्षा से जुड़े 500 से अधिक कार्य करता है।

    बिना लक्षण के बढ़ती रहती है बीमारी

    लिवर में सूजन की स्थिति को हेपेटाइटिस कहा जाता है। यह बीमारी शुरुआती दौर में कई बार बिना किसी लक्षण के बढ़ती रहती है और बाद में सिरोसिस, लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।

    एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रो. शालिमार ने बताया कि तीव्र हेपेटाइटिस में पीलिया, उल्टी, जी मिचलाना और भूख कम लगने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अधिकांश मरीज चार से छह सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण धीरे-धीरे लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

    प्रो. प्रमोद गर्ग के अनुसार हेपेटाइटिस-ए और ई दूषित भोजन और पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस-बी और सी संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, असुरक्षित यौन संबंध और प्रसव के दौरान मां से बच्चे में फैल सकते हैं।

    हेपेटाइटिस-सी के 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का तीन माह की एंटीवायरल दवाओं से इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस-बी को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया में करीब 25.4 करोड़ लोग क्रानिक हेपेटाइटिस-बी और पांच करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। भारत में चार करोड़ से अधिक हेपेटाइटिस-बी और करीब 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं।

    38% भारतीय वयस्कों में फैटी लिवर की समस्या

    विशेषज्ञों ने फैटी लिवर को भी बढ़ता खतरा बताया। अध्ययन के अनुसार करीब 38 प्रतिशत भारतीय वयस्कों में फैटी लिवर की समस्या है, जबकि करीब 35 प्रतिशत बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। मोटापा, खराब खानपान, अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

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    डाक्टरों ने लोगों से टीकाकरण, नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम, शराब से दूरी और डाक्टर की सलाह के बिना दवा न लेने की अपील की है। उनका कहना है कि समय पर पहचान होने पर हेपेटाइटिस से होने वाली गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।

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