Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    300 फीट नीचे कैसे गिरी AI की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट? टर्बुलेंस मामले में सही Sequence Of Events बताएगा वजह

    Updated: Wed, 12 Aug 2026 07:04 AM (IST)

    एअर इंडिया की उड़ान एआइ 2379 में 4 अगस्त को हुई 300 फीट की अचानक गिरावट की जांच शुरू हो गई है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह त ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

    HighLights

    1. एअर इंडिया की उड़ान एआइ 2379 में अचानक गिरावट।

    2. तकनीकी खराबी या भीषण टर्बुलेंस की जांच जारी।

    3. ब्लैक बॉक्स और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की होगी जांच।

    गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। एअर इंडिया की उड़ान एआइ 2379 में 4 अगस्त को हुई अचानक 300 फीट की खौफनाक गिरावट के कारण का पता लगाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

    शुरुआत में एयरलाइन प्रशासन ने इसे महज एक हवा के दबाव यानी ''इन-फ्लैश टर्बुलेंस'' का मामला बताकर टालने की कोशिश की थी, लेकिन अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआइबी) की औपचारिक जांच शुरू होने के बाद मुख्य बहस इस बात पर टिक गई है कि हादसे का असली ट्रिगर क्या था।

    घटनाओं का सही क्रम बना सिरदर्द

    जांचकर्ताओं के सामने अब सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल यह है कि घटनाओं का सही क्रम (सिक्वेंस आफ इवेंट्स) आखिर क्या था? क्या विमान में पहले कोई गंभीर तकनीकी खराबी आई थी, जिसके कारण हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हुआ, आटोपायलट अपने आप बंद हो गया और प्लेन तेजी से नीचे गिरने लगा?

    या फिर कहानी का दूसरा पहलू यह है कि आसमान में अचानक आए भयंकर टर्बुलेंस (हवा के झटके) ने प्लेन के सेंसर्स को प्रभावित किया, जिससे सिस्टम में तरह-तरह की वार्निंग ट्रिगर हुईं और नतीजतन आटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया।

    बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान एयरबस ए320 में एक साथ कई सिस्टम चेतावनी बोर्ड पर चमकी थीं। अगर तकनीकी खराबी पहले आई, तो इसका मतलब है कि प्लेन के कंट्रोल सिस्टम में ही कोई मूलभूत दिक्कत थी, जिसे संभालने के लिए क्रू को तुरंत मैनुअल कंट्रोल लेना पड़ा।

    एयरलाइन पायलट एसोसिएशन आफ इंडिया के अध्यक्ष कैप्टन सैम थामस के मुताबिक, स्थिति को भांपते हुए पायलट-इन-कमांड ने को-पायलट को तुरंत नोज नीचे करने का निर्देश दिया था ताकि विमान को स्टाल होने से बचाया जा सके।

    कुदरत का मिजाज या मशीन की नाकामी

    हालांकि, इसी त्वरित कदम की वजह से पैदा हुए ''नेगेटिव-जी'' फोर्स ने यात्रियों को सीटों से उछाल दिया और कई लोग घायल हो गए।

    लेकिन अगर पहला कारण टर्बुलेंस था, तो मामला बिल्कुल अलग रूप ले लेता है। कुदरती हवा के प्रचंड थपेड़े अक्सर विमान के आटोपायलट की सीमाओं को पार कर जाते हैं, जिससे सिस्टम सुरक्षा के लिहाज से खुद-ब-खुद डिस्कनेक्ट हो जाता है।

    खबरें और भी

    ऐसी स्थिति में कंप्यूटर जो खराबी के अलर्ट दिखाता है, वे हादसे का कारण न होकर केवल परिणाम होते हैं।

    अब पूरी गुत्थी इसी बात पर अटकी है कि क्या टर्बुलेंस ने तकनीकी सिस्टम को पंगु बनाया या तकनीकी पंगुता ने विमान को गोता लगाने पर मजबूर किया।

    ब्लैक बाक्स, फ्लाइट डेटा रिकार्डर और काकपिट वॉयस रिकार्डर की जांच के बाद ही एएआइबी यह साफ कर पाएगा कि हवा में उन चंद सेकंडों के भीतर विमान कैसे गिरना शुरु हुआ, कुदरत के मिजाज ने या मशीन की नाकामी से।

    यह भी पढ़ें- गांजा पीकर फ्लाइट उड़ा रहा था एअर इंडिया का पायलट, दूसरे टेस्ट में हुई पुष्टि; सीट से गायब होने का भी अंदेशा

    यह भी पढ़ें- एअर इंडिया फ्लाइट टर्बुलेंस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच शुरू, एयरबस और बीईए की टीम आएगी दिल्ली