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    Air India की फ्लाइट में टर्बुलेंस का सच खोलेगा ब्लैक बाक्स, काॅकपिट वाॅइस-फ्लाइट डेटा रिकाॅर्डर की होगी जांच

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 09:41 PM (GMT+05:30)

    फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में भीषण टर्बुलेंस के बाद DGCA और AAIB ने जांच शुरू कर दी है। हादसे की असली वजह जानने के लिए अब विमान के ब्ल ...और पढ़ें

    ब्लैक बॉक्स की जांच से टर्बुलेंस की वजह पता चलेगी। फोटो: आर्काइव

    ब्लैक बॉक्स की जांच से टर्बुलेंस की वजह पता चलेगी। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. DGCA और AAIB ने एयर इंडिया टर्बुलेंस की जांच शुरू की

    2. ब्लैक बॉक्स, CVR, FDR से हादसे की असल वजह पता चलेगी

    3. जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट एक महीने में, पूर्ण रिपोर्ट एक वर्ष में

    गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई2379 में अचानक आए भीषण टर्बुलेंस के बाद अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है।

    हवा के अप्रत्याशित झटकों के बीच दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए अब विमान के ब्लैक बाॅक्स की जांच की जाएगी। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार महानिदेशालय व अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के प्रोटोकाल के तहत ब्लैक बाक्स से डेटा निकालने और उसका विश्लेषण करने का काम करेंगे।

    क्या होता है ब्लैक बॉक्स में

    सीवीआर (काॅकपिट वाॅइस रिकाॅर्डर): यह काॅकपिट के भीतर पायलटों की बातचीत, अलार्म, स्विच ऑन-ऑफ होने की आवाजें और केबिन से आए संदेशों को रिकाॅर्ड करता है। इससे स्पष्ट होगा कि क्या वेदर रडार से कोई शुरुआती चेतावनी मिली थी और पायलटों ने क्रू को क्या निर्देश दिए।

    एफडीआर (फ्लाइट डेटा रिकाॅर्डर): यह विमान की गति, ऊंचाई, इंजन का प्रदर्शन, ऑटोपायलट का स्टेटस और टर्बुलेंस के दौरान विमान पर पड़े 'जी-फोर्स' जैसे 800 से अधिक तकनीकी पैरामीटर्स का डेटा रिकाॅर्ड करता है।

    पूर्व मामलों का हवाला और जांच के कड़वे नतीजे

    भारत में टर्बुलेंस का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले हुए हादसों की आधिकारिक जांच रिपोर्टों में कई गंभीर कमियां और नतीजे सामने आ चुके हैं।

    • स्पाइसजेट दुर्गापुर हादसा (मई 2022 - बोइंग 737): मुंबई से दुर्गापुर जा रही फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस से 17 से अधिक यात्री और क्रू घायल हुए थे। जांच में सामने आया कि रडार से खराब मौसम के संकेत मिलने के बावजूद विमान का रूट मोड़ने में देरी की गई। इसके अलावा, झटके शुरू होने और 'सीट बेल्ट साइन' आन करने के बीच यात्रियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। जांच के बाद जिम्मेदार पायलटों का लाइसेंस निलंबित किया गया था।
    • एयर इंडिया एक्सप्रेस तटीय रूट हादसे (2019-2020): 35,000 फीट की ऊंचाई पर बिना किसी बादल के 'क्लियर-एयर टर्बुलेंस' के कारण विमान अचानक 200 से 500 फीट नीचे गिर गया। जांच में सामने आया कि जिन यात्रियों ने सीटबेल्ट नहीं बांधी थी, वे सीधे छत और ओवरहेड बिन से टकराए, जबकि सर्विस ट्राली चालू रहने के कारण केबिन क्रू अधिक चोटिल हुए।

    जांच में लग सकता है एक महीने से एक साल का समय

    नियमों के तहत एयर एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो 30 दिनों के भीतर प्राथमिक तथ्यों वाली 'प्रारंभिक रिपोर्ट' जारी करेगी, जबकि विस्तृत 'अंतिम जांच रिपोर्ट' आने में 1 वर्ष का समय लग सकता है। लैब में डेटा निकालकर 3डी सिमुलेशन के जरिए हादसे के वक्त आसमान में घटित पूरे दृश्य का पुननिर्माण किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि टर्बुलेंस को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन पूर्व हादसों की जांच से मिले सबक, बेहतर कॉकपिट समन्वय और सख्त सीटबेल्ट अनुपालन से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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