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    एअर इंडिया विमान में 300 फीट के ड्रॉप मामले में सरकार सख्त, सीईओ तलब; जांच में फ्रांस की बीईए और एयरबस शामिल

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:30 PM (IST)

    फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान में 300 फीट के ड्राप और तकनीकी खराबी के मामले में केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है और एअर इंडिया के सीईओ क ...और पढ़ें

    एयर इंडिया फ्लाइट टर्बुलेंस मामले में सरकार हुई सख्त।

    एयर इंडिया फ्लाइट टर्बुलेंस मामले में सरकार हुई सख्त।

    HighLights

    1. एअर इंडिया उड़ान में 300 फीट का ड्राप और तकनीकी खराबी

    2. नागर विमानन मंत्रालय ने एअर इंडिया सीईओ को तलब कर जवाब मांगा

    3. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अब इस बहुस्तरीय जांच में शामिल हो गईं

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान (एआइ2379) में अचानक 300 फीट के ड्राप और संदिग्ध तकनीकी खराबी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है और नागर विमानन मंत्रालय ने एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन को तलब कर जवाब मांगा है।

    मंत्रालय में सचिव समीर सिन्हा, डीजीसीए प्रमुख वीर विक्रम यादव और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआइबी) के महानिदेशक जीवीजी युगंधर की मौजूदगी में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें घटना की जवाबदेही, एसओपी के पालन और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर समीक्षा की गई। उधर इस मामले में एएआइबी के नेतृत्व में हो रही बहुस्तरीय जांच में अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी शामिल हो गई हैं।

    तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक मिनट के भीतर नौ फॉल्ट मैसेज दर्ज

    उड़ान के दौरान एयरबस ए320 नियो के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक मिनट के भीतर नौ फॉल्ट मैसेज दर्ज हुए थे। इस असाधारण तकनीकी स्थिति का विश्लेषण करने के लिए फ्रांस की जांच एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंक्वायरी एंड एनालिसिस (बीईए) सक्रिय हो गई है, जबकि विमान निर्माता कंपनी एयरबस की एक विशेष तकनीकी टीम बुधवार को दिल्ली पहुंच रही है।

    यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग आइसीएओ के एनेक्स 13 के तहत हो रहा है, जिसकी नींव 1944 के शिकागो सम्मेलन में रखी गई थी और इसके तहत विमान निर्माता देश को जांच में शामिल होने का कानूनी अधिकार मिलता है।

    जांच टीम 360-डिग्री दृष्टिकोण अपनाते हुए यात्रियों के वीडियो, क्रू के बयानों और रडार डेटा को ब्लैक बॉक्स (एफडीआर और सीवीआर) के साथ टाइम-सिंक कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टर्बुलेंस पहले आया था या हाइड्रोलिक फेलियर।

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    वहीं नियामक स्तर पर डीजीसीए ने ए320 नियो विमानों के हाइड्रोलिक और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के विशेष निरीक्षण के आदेश दिए हैं। प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए पायलटों का दोबारा डोप और अल्कोहल टेस्ट कराकर आधिकारिक रिकार्ड में शामिल किया गया है।

    अंतरराष्ट्रीय सहयोग का पुराना इतिहास

    भारत में विमान दुर्घटनाओं की जांच में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले 1996 के चरखी दादरी हादसे के बाद एनटीएसबी की मदद से अनिवार्य टीसीएएस सिस्टम लागू हुआ था, 2010 के मंगलुरु हादसे के बाद एनटीएसबी और एफएए के सहयोग से पायलट थकान प्रबंधन के कड़े नियम बने थे, तथा 2020 के कोझिकोड हादसे के बाद बोइंग की टीम की मदद से टेबलटाप रनवे सुरक्षा और काकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट में बड़े सुधार किए गए थे।

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