1 साल की कुर्सी पर सालों से जमे प्रो. विनय पाठक, AIU अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ने पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा सवाल
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) के अध्यक्ष प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। ...और पढ़ें

मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
HighLights
AIU अध्यक्ष प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल पर विवाद।
दिल्ली हाई कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय से मांगा जवाब।
आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल ने दायर की जनहित याचिका।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश के एक हजार से अधिक विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) में अध्यक्ष पद के कार्यकाल को लेकर विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) के अध्यक्ष प्रो. विनय पाठक का एक वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पद पर बने रहने के मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने शिक्षा मंत्रालय से पूछा कि उसने किस अधिकार के तहत एआईयू को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया था। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
रोहतक के आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल ने जनहित याचिका दायर कर शिक्षा मंत्रालय और एआईयू के खिलाफ प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल बढ़ाए जाने को चुनौती दी है। याचिका के अनुसार, एआईयू के उपनियमों के तहत अध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
प्रो. विनय पाठक का कार्यकाल 30 जून 2025 को समाप्त हो गया था, लेकिन वह शिक्षा मंत्रालय के जून 2025 के उस आदेश का हवाला देकर पद पर बने रहे, जिसमें एआईयू के पुनर्गठन पर विचार के लिए गठित समिति की रिपोर्ट आने तक या अधिकतम छह माह तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षा मंत्रालय से पूछा कि उसने ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार किस कानून या प्रविधान के तहत प्राप्त किया।
शिक्षा मंत्रालय ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि उसका आदेश केवल एआईयू के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया था। मंत्रालय ने यह भी कहा कि एआईयू एक स्वायत्त संस्था है और अध्यक्ष के कार्यकाल संबंधी विवाद में उसकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
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वहीं, एआईयू ने याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता संस्था के मामलों से जुड़ा नहीं है, इसलिए उसे याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। एआईयू के अनुसार, पुनर्गठन का प्रस्ताव फरवरी 2024 में गवर्निंग काउंसिल के प्रस्ताव के आधार पर शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुनर्गठन के प्रस्ताव को एआईयू की जनरल काउंसिल से मंजूरी नहीं मिली थी और इसी आधार पर अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ाया गया।