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    'UCC से वनवासी समाज पर नहीं लगेगी कोई पाबंदी', जनजातीय महाकुंभ में बोले गृह मंत्री अमित शाह

    Updated: Sun, 24 May 2026 09:37 PM (IST)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रामलीला मैदान में जनजातीय समागम में कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) जनजातियों पर कोई पाबंदी नहीं लगाएगा। उन्होंने ...और पढ़ें

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली स्थित लाल किले पर आयोजित 'जनजातीय संस्कृति समागम' के दौरान धनुष-बाण धारण किया। (फोटो- ANI)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली स्थित लाल किले पर आयोजित 'जनजातीय संस्कृति समागम' के दौरान धनुष-बाण धारण किया। (फोटो- ANI)

    HighLights

    1. यूसीसी जनजातियों पर कोई पाबंदी नहीं लगाएगा।

    2. गुजरात, उत्तराखंड में जनजातियों को यूसीसी से बाहर।

    3. जनजातीय संस्कृति, परंपराओं की रक्षा का संकल्प।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया है कि जनजातियों पर यूनिफार्म सिविल कोड (यूसीसी) से कोई पाबंदी नहीं लगने वाली है। रामलीला मैदान में खचाखच भरे जनजाति सांस्कृतिक समागम में उन्होंने कहा कि एक षड्यंत्र शुरू हुआ है, ये कहा जा रहा है कि यूसीसी जनजातियों को अपनी संस्कृति व परंपराओं के साथ जीने के अधिकार से वंचित करेगा।

    मैं आज इस मंच से नरेन्द्र मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री होने के नाते स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी वनवासी जगत या वनवासी व्यक्ति पर नहीं लगने वाली है। यूसीसी से वनवासियों के अधिकारों का कोई अतिक्रमण नहीं होगा। दो राज्यों गुजरात और उत्तराखंड में हमने यूसीसी को लागू किया है और हमने विशेष प्रविधान करके यूसीसी से सारी जनजातियों को बाहर रखा है।

    यूसीसी से डरने की जरूरत नहीं

    जो लोग ये भेद पैदा कर रहे हैं, मैं उनको बता देना चाहता हूं कि यूसीसी से हमारे किसी वनवासी भाई या जनजाति की परंपराओं से खिलवाड़ नहीं होने वाला है। आप सभी ये संदेश लेकर दिल्ली से जाएं और इस बारे में जनजाति समाज को जागरूक करें कि यूसीसी से डरने की जरूरत नहीं है।

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    शाह ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने सभी को अपने मूल धर्म में सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। लोभ, लालच या जबरन कोई किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता। जनजाति कुंभ में आज आप सभी ये ठान कर जाएं कि हमारा जो भी धर्म है, हम उसकी रक्षा करेंगे। वनवासी प्रकृति की पूजा करते हैं और यही प्रकृति की पूजा हम सभी को सनातन से जोड़ती है।

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    धर्म की रक्षा के इस संकल्प को आज दिल्ली से लेकर जाना है। यही हमें देश और हमारी संस्कति से जोड़कर रखेगा। जो लोग हममें भेद पैदा करना चाहते हैं, उनको मालूम नहीं है कि हजारों साल पहले भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर सभी को बता दिया है कि हम सब एक हैं। भगवान राम ने निषाद राज के पैर धोकर जनजातियों का सम्मान किया था। जो लोग भेद पैदा कर रहे हैं, आज का ये समागम उनके लिए बहुत बड़ा संदेश है।

    कई सालों तक किया जाएगा याद

    यह जनजाति समागम जनजातियों के महाकुंभ के नाते आने वाले कई वर्षों तक याद किया जाएगा। यह जनजाति की पहचान और जनजातियों को एकत्रित करने, एकजुट करने, जनजाति संस्कृति को सुरक्षित रखने का आंदोलन है। यह भगवान बिरसा मुंडा के जनजाति आंदोलन ऊल गुलान के बाद का सबसे बड़ा जनजातीय आंदोलन है, जो पूरे देश को एक करता है। आज का ये आंदोलन हमें और हमारी परंपरा-संस्कृति व धर्म को बचाकर रखेगा।

    आज यहां पर देश के सुदूर इलाकों से परंपरागत वाद्य यंत्रों के साथ गीत गाते और नृत्य करते आप आए हैं तो मैं कहता हूं कि मुझे ऐसा लगता है कि मेरे सामने भगवान बिरसा मुंडा साक्षात उपस्थित हुए हैं। यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की डेढ़ सौवीं जयंती का वर्ष है। ऊल गुलान आंदोलन ने अंग्रेजों को जमीन दिखाने का काम किया था।

    पीएम मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद का सफाया

    उस समय देश में संचार की बेहतर सुविधा न होने के बावजूद भगवान बिरसा मुंडा ने गुजरात से झारखंड तक और पूरे भारत में जनजातियों को ये संदेश पहुंचाया था कि यही हमारा देश है, हमारा धर्म ही सच्चा धर्म है और हमारे जंगलों पर किसी का कब्जा नहीं हो सकता। ये जो जल है, जंगल है पहाड़ी है, ये हमारे वनवासी भाइयों के लिए आस्था का केंद्र है और उनकी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करने का माध्यम भी है।

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से नक्सल समस्या का समाधान हुआ है। मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि आज हमारा देश नक्सल समस्या से पूर्ण रूप से मुक्त हो गया है। जो लोग वनवासी समाज का अधिकार रोक कर बैठे थे, वो समस्या हमने पूर्ण रूप से खत्म कर दी है। अब समय शुरू हो रहा है, जब जनजातीय क्षेत्रों में पहाड़ों में और जंगल में विकास होगा। भाजपा शुरुआत से जनजाति कल्याण को मानती है।

    जनजातियों ने बनाया सबसे बड़ा सस्टेनेबल मॉडल

    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से पहले देश में जनजाति कल्याण मंत्रालय नहीं था, उन्होंने यह मंत्रालय बनाया और जनजातियों को सशक्त करने का काम किया। कांग्रेस के समय देश का जनजाति कल्याण का कुल बजट 28 हजार करोड़ था और प्रधानमंत्री ने उसे एक लाख 50 हजार करोड़ तक बढ़ाने का काम किया है। देश के सर्वोच्च पद पर आजादी के बाद पहली बार संथाल परिवार की द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति बनी हैं। आज उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में जनजातीय मुख्यमंत्री हैं और अभी बंगाल में जनजाति बहुल सभी 16 सीटें भाजपा ने जीती हैं।

    आज दुनिया में जो सबसे बड़ा सस्टेनेबल माडल है तो वह जनजातियों ने बनाया है। जनजातियों ने विविधता में एकता और एकता में विविधता को चरित्रार्थ करने का काम किया है। मध्य प्रदेश का पेसा कानून जनजाति विकास के लिए एक आदर्श कानून है और भाजपा की सभी सरकारें इसे आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। पेसा कानून के लिए भारत सरकार ने एक पेसा सेल भी बनाया है।

    (सभी फोटो- ANI)

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