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    अमित शाह की मौजूदगी उठेगा आरक्षण का मुद्दा, झारखंड से दिल्ली रवाना हुआ आदिवासियों का जत्था

    Updated: Sat, 23 May 2026 06:09 AM (IST)

    दुमका से जनजातीय समाज के प्रतिनिधि दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम के लिए रवाना हुए, जहाँ गृहमंत्री अमित शाह मौजूद रहेंगे ...और पढ़ें

    गोड्डा से जाते हुए आदिवासी। फोटो जागरण

    गोड्डा से जाते हुए आदिवासी। फोटो जागरण

    HighLights

    1. जनजातीय प्रतिनिधि दिल्ली के लाल किला मैदान रवाना।

    2. गृहमंत्री अमित शाह समागम में रहेंगे मौजूद।

    3. आरक्षण और पहचान के मुद्दे पर होगी चर्चा।

    जागरण संवाददाता, दुमका। दिल्ली के लाल किला मैदान में 24 मई को आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम में भाग लेने वाले जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों को दुमका रेलवे स्टेशन से भाजपा कार्यकर्ताओं ने रवाना किया। इस कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह मौजूद रहेंगे

    शुक्रवार को हावड़ा से चलकर वाया दुमका दिल्ली तक जाने वाली एक दिन के लिए बहाल स्पेशल ट्रेन पर बैठ कर यहां के लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए। दिल्ली गए लोग इसी ट्रेन से दुमका लौटेंगे।

    मालूम हो कि 24 मई को जननायक भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के लाल किला मैदान में समागम हो रहा है।

    जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हांसदा के मुताबिक भगवान बिरसा मुंडा देश में स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामुदायिक चेतना के प्रतीक रहे हैं।

    यह समागम एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय आयोजन के रूप में परिकल्पित है। इस कार्यक्रम में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के डेढ़ लाख प्रतिभागियों के हिस्सा लेने की संभावना है।

    अपनी धर्म-संस्कृति, परंपरा के विषय को लेकर जनजातीय समाज राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार एकत्रित हो रहा है। दुमका रेलवे स्टेशन पर कार्यकर्ताओं को विदा करने भाजपा नेता सुरेश मुर्मू, ओम केशरी, मृणाल मिश्रा समेत कई कार्यकर्ता पहुंचे थे।

    पोड़ैयाहाट रेलवे स्टेशन से चढ़ा जत्था

    पोड़ैयाहाट रेलवे स्टेशन से शुक्रवार को आदिवासी समाज के लोग जनजाति सांस्कृतिक समागम एवं विशाल गर्जना रैली में शामिल होने लालकिला मैदान नई दिल्ली के लिए रवाना हुए।लोगों ने कहा कि संथाल परगना के चार जिले के लोग दिल्ली समागम में हजारों हजार की संख्या में भाग लेकर अपनी मांगों को रखेंगे।

    लोगों ने कहा कि जाति की अपनी भाषा धर्म संस्कृति और परंपरागत रीति रिवाज ही उनकी पहचान के मूल्य आधार होते हैं। जन्म विवाह और मृत्यु जैसी संस्कारों से जुड़ी परंपरागत रीति हमें यह पहचान देती है कि हम किस समुदाय और किस जनसमूह के सदस्य हैं।

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    भाषा, धर्म और संस्कृति से ही किसी जाति का अस्तित्व बना रहता है। इसलिए अपनी मातृभाषा धार्मिक विश्वास परंपरागत रीति नीतियों एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य और धर्म है।

    जनजातीय समुदाय के अस्तित्व की लड़ाई

    वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार के आर्थिक प्रलोभनों के माध्यम से भारत के निर्धन जनजातीय समुदायों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है। हाल के वर्षों में कई जनजाति लोग नाम मात्र के लिए जनजाति रह गए हैं और उनकी भाषा धर्म और संस्कृति विकृत होकर लुप्तप्राय अवस्था में पहुंच रही है।

    भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे रोकना हमारा उपदेश से नहीं है, किंतु विचारणीय यह है कि जब कोई व्यक्ति अपना मूल जनजातीय धर्म छोड़कर अन्य धर्म स्वीकार करता है, तो वह पहले अपनी जाति की परंपरागत रीति रिवाज को त्याग देता है और बाद में अपने ही समुदाय के लोगों को नीचा दिखाने अपमानित करने तथा उनके विरुद्ध दुष्प्रचार करने लगता है।

    इसके अतिरिक्त व्यक्ति अपने मूल सामुदाय से अलग होकर भी उस समुदाय के लिए संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण और सुविधाओं का लाभ उठाता रहता है।

    यही इसके साथ-साथ अन्य मांगों को लेकर लाल किला मैदान नई दिल्ली में 24 मई को जनजाति संस्कृत समागम एवं विशाल गर्जना रैली जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले दिल्ली चलो कार्यक्रम में शामिल होना है।

    इस दौरान भाजपा के पूर्व प्रत्याशी गजाधर सिंह, प्रदेश सोशल मीडिया के प्रभारी राजीव भगत भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुरेश भगत ने सभी लोगों को झंडा टोपी देकर रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना किया।

    इस दौरान एक स्वर में सभी लोगों ने भारत माता की जय चांद भैरव अमर रहे सिद्धू कानू अमर रहे, जय श्री राम की नारेबाजी जमकर लगाई।इस दौरान आदिवासी समाज के महिला पुरुष लोग झंडा लेकर शामिल थे।

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