अंकित शर्मा हत्याकांड: परिवार का आरोप- हिंदू होने के चलते भाई को मारा, दोस्त ही बन गए कातिल
आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा के परिवार ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों की सजा के बाद अपना दर्द बयां किया। ...और पढ़ें

ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों की सजा से परिवार का दर्द। फाइल फोटो
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ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों की सजा से परिवार का दर्द।
अंकित के भाई ने कहा, दोस्त ही बने कातिल, हिंदू होने पर मारा।
परिवार ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की।
सौरभ पांडेय, पूर्वी दिल्ली। आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य चार को दोषी ठहराए जाने के बाद आइबी कर्मचारी अंकित शर्मा के के माता-पिता और भाई अंकुर की आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। अंकुर ने बताया कि अंकित की हत्या करने वाले कोई और नहीं उनके दोस्त ही थे।
उनपर जहां हमला हुआ, वहां आसपास रहने वाले सभी उन्हें जानते थे, उनके दोस्त थे, फिर भी उनको सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया क्योंकि वह हिंदू थे। उन्होंने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा होनी चाहिए, हालांकि सजा के बाद भी उनके घाव हरे ही रहेंगे।
अंकुर ने दैनिक जागरण से फोन पर बातचीत में बताया कि आज भी उनके परिवार को वह मंजर याद है जब उनके भाई का शव नाले से निकाला गया था। अंकित को आइबी की ओर से ड्यूटी पर वहां भेजा गया था। अंकित को पता था कि जहां वह जा रहे हैं, वहां उनके दोस्त और जानकार हैं। ऐसे में उन्हें जरा भी झिझक नहीं हुई। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनके जानकार ही उनके जान के दुश्मन बन जाएंगे।
उन्होंने कहा कि दोषियों के मन में इतनी कट्टरता थी कि उन्होंने अपने साथ ही रहने वाले दोस्त तक को मौत के घाट उतार दिया। उन्हें दिल्ली पुलिस नहीं बल्क अंकुर ने बताया कि घटना के करीब दो साल बाद उन्हें दिल्ली सरकार के एक विभाग में नौकरी मिल गई थी। लेकिन यह नौकरी भी उनके भाई के खोने का दर्द कम नहीं कर सकी।
किराए पर कमरा लेकर रह रहा परिवार
अंकित के पिता रविंदर शर्मा के अनुसार उनका बेटा देश के लिए शहीद हो गया। उन्हें बेटे पर गर्व है कि वह दंगे के बीच भी अपनी ड्यूटी से नहीं हटा, लेकिन इस बात का दर्द भी है कि वह हमेशा के लिए दूर हो गया। उन्होंने बताया कि बेटे के जाने के बाद उन्हें दर्द भी था और कट्टर लोगों से डर भी।
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यही कारण रहा है कि उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। अब वे गाजियाबाद में किराए के घर पर रहते हैं। उन्होंने बताया कि अभी भी मन में एक डर है, जिसके चलते वह अपनी पहचान तक लोगों से बताने में संकोच करते हैं। पिता ने कहा कि जब परिवार खजूरी रहता था तो हर कोई बेटे को याद करता था, बेटे की प्रशंसा करता था। बेटे को याद करके उन्हें दर्द भी होता था। ऐसे में उन्होंने वहां से मकान बेचने का निर्णय लिया।