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    'जज मत कीजिए महसूस कीजिए', ADHD और ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों का दर्द समझाने के लिए रामजस कॉलेज के छात्रों की पहल 'अनुभव'

    Updated: Fri, 08 May 2026 12:48 AM (IST)

    रामजस कॉलेज के छात्रों ने 'अनुभव' नामक पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य एडीएचडी और ऑटिज्म के प्रति समाज में सही समझ और संवेदनशीलता बढ़ाना है। ...और पढ़ें

    रामजस कॉलेज के छात्रों ने 'अनुभव' नामक पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य एडीएचडी और ऑटिज्म के प्रति समाज में सही समझ और संवेदनशीलता बढ़ाना है। इमेज एआई

    रामजस कॉलेज के छात्रों ने 'अनुभव' नामक पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य एडीएचडी और ऑटिज्म के प्रति समाज में सही समझ और संवेदनशीलता बढ़ाना है। इमेज एआई

    लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। समाज में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (एडीएचडी) और आटिज्म को लेकर जागरूकता तो बढ़ रही है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग इन स्थितियों को सही तरीके से समझ नहीं पाते। अक्सर बच्चों के व्यवहार को अनुशासनहीनता, जिद या ध्यान न देने की आदत मान लिया जाता है।

    इसी सोच को बदलने और लोगों में संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से रामजस कालेज के 20 छात्र “अनुभव” नामक पहल शुरू की गई है।

    यह पहल केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को उन परिस्थितियों का अनुभव कराने पर जोर देती है जिनका सामना एडीएचडी और आटिज्म से जूझ रहे लोग रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं। इसके तहत इंटरैक्टिव गतिविधियां, सिमुलेशन और गेम आधारित लर्निंग के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाने की कोशिश की जाती है कि ऐसे बच्चों और युवाओं के लिए सामान्य माहौल भी कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    परियोजना से जुड़े छात्रा ईशा गुप्ता के अनुसार, अनुभव का मुख्य उद्देश्य लोगों की सोच को 'जज करने' से 'समझने' की ओर ले जाना है। इसके लिए स्कूलों और कंप्यूटर लैब में विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में प्रतिभागियों को ऐसी गतिविधियों से गुजरना पड़ता है जो फोकस, संचार और संवेदनशीलता से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों का एहसास कराती हैं।

    पहल के तहत केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि समाधान आधारित माडल पर भी काम किया जा रहा है। इसमें छात्रों के लिए प्रशिक्षण सामग्री, संवाद कौशल बढ़ाने वाली गतिविधियां और भावनाओं को समझने के तरीके विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही ऐसे बोर्ड गेम और इंटरैक्टिव टूल तैयार किए जा रहे हैं जो बच्चों और अभिभावकों को न्यूरोडाइवर्जेंट चुनौतियों को सरल तरीके से समझने में मदद करेंगे।

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    'अनुभव' से जुड़े सदस्यों का कहना है कि एडीएचडी और आटिज्म से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी समस्या संवाद की कमी है। कई बार शिक्षक, अभिभावक और विशेषज्ञ अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं, लेकिन उनके बीच समन्वय नहीं बन पाता। इसी को ध्यान में रखते हुए भविष्य में एक एआइ आधारित एप्लीकेशन विकसित करने की योजना है, जो छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक मंच पर जोड़ सकेगी। इससे बच्चों की प्रगति, व्यवहार और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

    इस पहल को दिल्ली स्कूल आफ सोशल वर्क का समर्थन भी मिला है। परियोजना टीम का मानना है कि अगर लोग कुछ मिनटों के लिए भी न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्ति की भावनाओं और चुनौतियों को महसूस कर लें, तो समाज में उनके प्रति संवेदनशीलता और स्वीकार्यता दोनों बढ़ सकती हैं।

    एडीएचडी क्या है?

    एडीएचडी एक सामान्य न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार (मस्तिष्क विकास से संबंधित) है, जो ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अत्यधिक सक्रियता और आवेगशीलता के रूप में प्रकट होता है। यह मुख्य रूप से बचपन में शुरू होता है और अक्सर वयस्कता तक बना रहता है, जो स्कूल, कार्यस्थल और सामाजिक जीवन में चुनौतियों का कारण बन सकता है।

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