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    दिल्ली में मुगलकालीन शहरपनाह को बचाने की कोशिश, 3 महीने में बनेगी एतिहासिक दीवार; गुड़-बेलगिरी से होगी मरम्मत

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 02:18 PM (IST)

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) दरियागंज स्थित मुगलकालीन शाहजहानाबाद की ऐतिहासिक दीवार का संरक्षण और मरम्मत कार्य अगले तीन महीनों में पूरा करेगा। इस ...और पढ़ें

    शाहजहानाबाद की प्राचीन दीवार (कश्मीरी गेट) जिसने सदियों से सल्तनतों को बनते- बिगड़ते देखा। फोटो: आर्काइव

    शाहजहानाबाद की प्राचीन दीवार (कश्मीरी गेट) जिसने सदियों से सल्तनतों को बनते- बिगड़ते देखा। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. दरियागंज में शाहजहानाबाद की ऐतिहासिक दीवार का संरक्षण कार्य

    2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 67 लाख रुपये की परियोजना

    3. पारंपरिक चूने, बेलगिरी और गुड़ से होगी मरम्मत

    वीके शुक्ला, नई दिल्ली। मुगलकालीन शाहजहानाबाद शहर की ऐतिहासिक दीवार के दरियागंज स्थित हिस्से का संरक्षण और मरम्मत कार्य अगले तीन महीनों में पूरा किया जाएगा।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इसके लिए करीब 67 लाख रुपये की परियोजना तैयार की है। विभाग ने इस कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं। वर्ष 1657 में बलुआ पत्थर से निर्मित शाहजहानाबाद को दिल्ली का सातवां ऐतिहासिक शहर माना जाता है।

    13 प्रवेश और 14 छोटे द्वार थे 

    लगभग 13 मीटर ऊंची और छह किलोमीटर लंबी इस पत्थर एवं मलबे की दीवार में कभी 13 विशाल प्रवेश द्वार और 14 छोटे द्वार थे। अब कई हिस्सों में दीवार और प्रवेश द्वार गायब हैं।

    परियोजना में करीब 43.48 लाख रुपये निर्माण सामग्री की खरीद पर खर्च किए जाएंगे, जबकि लगभग 23 लाख रुपये कुशल श्रमिकों, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य कार्यों पर व्यय होंगे।

    मरम्मत के दौरान चूने के पारंपरिक मिश्रण में बेल का गूदा (बेलगिरी) और गुड़ का शीरा मिलाया जाएगा। बेलगिरी चूने को समय से पहले सूखने से बचाकर उसकी मजबूती बढ़ाएगी, जबकि गुड़ शीरा प्लास्टिसाइज़र और जल-अवरोधक के रूप में काम करेगा।

     250 घन मीटर पत्थर लगेंगे निर्माण में 

    निर्माण कार्य में करीब 250 घन मीटर पत्थरों के टुकड़ों का भी उपयोग किया जाएगा। दिसंबर 2025 में सामने आई एक रिपोर्ट में सामने आया था कि शाहजहानाबाद की संरक्षित दीवार के बचे हुए कई हिस्से ढहने के बाद उन स्थानों पर अतिक्रमण का खतरा बना हुआ है।

    खबरें और भी

    बता दें कि वर्ष 1657 में बलुआ पत्थर से निर्मित शाहजहानाबाद को दिल्ली का सातवां ऐतिहासिक शहर की अंग्रेजों के शासनकाल के बाद दीवार काे अधिक नुकसान पहुंचा है।

    वर्षों की उपेक्षा तथा अनियंत्रित निर्माण ने इसकी स्थिति और खराब कर दी। दरियागंज का हिस्सा आज भी सबसे बेहतर संरक्षित माना जाता है, लेकिन अब इसे भी संरक्षण की आवश्यकता है।

    शाहजहानाबाद की शहरपनाह (सिटी वाल)

    • निर्माण- लालकिला का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1639-1648 के बीच कराया।
    • इसके शहर की इस बाहरी दीवार की कुल लंबाई- लगभग 6 किलोमीटर
    • शुरुआत में मिट्टी की दीवार थी, बाद में 1657 में लाल पत्थर और मलबे से मजबूत किया गया।
    • शाहजहानाबाद की दीवार लाल किले को केंद्र मानकर पूरे पुराने शहर को घेरे हुए थी।
    • यह लाल किला से राजघाट, निगमबोध घाट, कश्मीरी गेट, मोरी गेट, कबूली गेट, लाहौरी गेट, फतेहपुरी क्षेत्र, अजमेरी गेट, तुर्कमान गेट, दिल्ली गेट, दरियागंज व यमुना नदी के किनारे से होते हुए वापस लालकिले तक आती थी।

    कभी इस शहर के 13 प्रमुख द्वार थे। इनमें कश्मीरी गेट, अजमेरी गेट, तुर्कमान गेट, दिल्ली गेट, मोरी गेट के आसपास का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो चुका है और केवल अवशेष हैं। कबूली, फराशखाना, निगमबोध, राजघाट और अन्य कई द्वार समय के साथ समाप्त हो गए हैं। शाहजहानाबाद की मूल दीवार अब केवल कुछ हिस्सों में दिखाई देती है।

    इसमें दरियागंज (दिल्ली गेट के आसपास), कश्मीरी गेट के दोनों ओर तथा लाल किले की बाहरी किलेबंदी से जुड़ा हिस्सा है तथा कुछ छोटे अवशेष मोरी गेट क्षेत्र में भी मौजूद हैं।

    यह मुगल राजधानी शाहजहानाबाद की सुरक्षा का मुख्य घेरा थी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में इसी दीवार और इसके द्वारों पर अंग्रेजों और भारतीय सैनिकों के बीच भीषण लड़ाई हुई थी।

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