दिल्ली ही नहीं, देश के इन शहरों में भी मौजूद है 'जंतर-मंतर', जयपुर के महाराज ने करवाया था इनका निर्माण
दिल्ली के अलावा भारत के कई शहरों में जंतर-मंतर मौजूद हैं, जिनका निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई जयसिंह ने करवाया था। ...और पढ़ें

देश में और कहां-कहां है जंतर-मंतर? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में मौजूद ऐतिहासिक इमारतों में जंतर-मंतर का नाम भी शामिल है। आजकल यह ऐतिहासिक इमारत काफी चर्चा में भी है, लेकिन क्या आप जानते हैं दिल्ली के अलावा भारत के और भी राज्यों में जंतर-मंतर है?
जी हां, 18वीं शताब्दी में जयपुर के राजा महाराजा सवाई जयसिंह ने दिल्ली के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी विशाल वेधशालाएं बनवाई थीं, जिन्हें जंतर-मंतर के नाम से जाना जाता है। आइए जानें भारत में और किन-किन जगहों पर जंतर-मंतर देख सकते हैं।
जंतर-मंतर का मतलब क्या है?
जंतर-मंतर संस्कृत के शब्द यंत्र और मंत्र से मिलकर बने हैं। इनका मतलब है गणना करने वाले उपकरण। पत्थरों और संगमरमर से बनाई गई ये संरचनाएं सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की सही स्थिति और ग्रहणों की भविष्यवाणी करने के लिए बनाई गई थीं।
ऐसा कहा जाता है कि जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह उस समय खगोलीय घटनाओं का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पीतल और धातु के छोटे उपकरणों की जगह कुछ ऐसा चाहते थे, जो बिल्कुल सही नतीजे दे। इसलिए उन्होंने बड़े पत्थरों और संगमरमर का इस्तेमाल करके 5 शहरों में जंतर-मंतर वेधशालाओं का निर्माण करवाया।
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देश में कहां-कहां है जंतर-मंतर?
- दिल्ली- यहां मौजूद जंतर-मंतर सबसे पहला और पुराना है। इसे 1724 में बनवाया गया था। यह कनॉट प्लेस के पास स्थित है। इसका इस्तेमाल पहले साल के सबसे बड़े दिन और रात पता करने के लिए किया जाता था।
- जयपुर- ये जंतर-मंतर इन सभी वेधशालाओं में सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित अवस्था में मौजूद है। इसे 1734 में बनवाया गया था। इसमें दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी स्थित है, जिसे वृहत् सम्राट यंत्र कहा जाता है। यह घड़ी 2 सेकंड की सटीकता के साथ समय बताती है। इसकी वास्तुकला के कारण इसे साल 2010 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया था।
- उज्जैन- यह शहर प्राचीन काल से ही भारतीय खगोल शास्त्र और समय गणना का केंद्र रहा है। इसे 1725 में बनवाया गया था। जंतर-मंतर बनाने के लिए उज्जैन को इसलिए चुना गया था, क्योंकि यह प्राचीन भारत के बिल्कुल मध्य में था।
- वाराणसी- यहां का जंतर-मंतर पवित्र गंगा नदी के तट पर मशहूर मानमंदिर घाट के ऊपर स्थित मानसिंह महल की छत पर बना हुआ है। 1737 में बना यह जंतर-मंतर आकार में थोड़ा छोटा है, लेकिन इसकी स्थिति और बनावट बेहद अनोखी है।
- मथुरा- पांचवा जंतर-मंतर मथुरा में बना था। हालांकि, आज के समय में सिर्फ 4 ही जंतर-मंतर मौजूद हैं। मथुरा में बना जंतर-मंतर 1857 के संग्राम से पहले ही टूट चुका था।