दिल्ली-NCR में प्रदूषण की दस्तक से पहले केंद्र सरकार अलर्ट, 63 निकायों के मेयरों को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 63 नगरीय निकायों के मेयरों से चर्चा ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
केंद्रीय मंत्री ने 63 एनसीआर मेयरों से की चर्चा।
वायु प्रदूषण नियंत्रण में जनभागीदारी पर दिया जोर।
ठोस कचरा प्रबंधन, ग्रीन कवर बढ़ाने पर बल।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में 15 सितंबर के बाद वायु प्रदूषण के बढ़ने की आशंका को देखते हुए बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
इस कड़ी में राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों व अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को एनसीआर में आने वाले 63 नगरीय निकायों के मेयर व प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की है।
साथ ही सभी से वायु प्रदूषण से निपटने जमीनी स्तर पर ही जनभागीदारी का आह्वान किया। मेयर व स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ अपनी तरह का यह पहली बैठक है।
नागरिकों को करें प्रेरित
केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और डेटा-आधारित तरीका जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए और कार्य योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने में जन-प्रतिनिधियों को मुख्य भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने मेयरों व स्थानीय प्रतिनिधियों को उदाहरण पेश करके नेतृत्व करने व नागरिकों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि अनावश्यक प्रदूषण को रोका जा सके और स्वच्छ व स्वस्थ शहरी वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय सबसे पहले कार्रवाई करने वाले होते हैं और यह सही दिशा में उठाए गए कदमों से जबरदस्त बदलाव ला सकते है।
ठोस कचरा प्रबंधन हो प्रभावी, ग्रीन कवर बढ़ाने पर जोर
शहरी क्षेत्रों के तेजी से विस्तार और उसके कारण पैदा होने वाली कचरा प्रबंधन की चुनौती पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जमीन पर ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 व निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2025 को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने मेयरों से कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण व ठोस कचरा प्रबंधन में स्थानीय निकायों की शक्तियों और जिम्मेदारियों को समझें और नागरिकों के लिए ऐसे उदाहरण बनाएं जिनका अनुकरण किया जा सके।
वहीं स्थानीय निकायों से आग्रह किया कि वे सड़कों के किनारे स्थानीय और सूखे का सामना करने वाली घास की प्रजातियां लगाकर ग्रीन कवर बढ़ाएं ताकि धूल से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके।
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