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    शांतिपूर्ण प्रदर्शन या सियासी अखाड़ा? CJP के आंदोलन पर उपद्रवियों का कब्जा

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 07:33 PM (IST)

    परीक्षा व्यवस्था सुधार को लेकर चल रहा सीजेपी का प्रदर्शन 20 जुलाई को संसद मार्च के साथ हिंसक हो गया, जिसमें अराजक तत्वों की घुसपैठ मानी गई है। ...और पढ़ें

    परीक्षा व्यवस्था सुधार को लेकर चल रहा सीजेपी का प्रदर्शन 20 जुलाई को संसद मार्च के साथ हिंसक हो गया। फाइल फोटो

    परीक्षा व्यवस्था सुधार को लेकर चल रहा सीजेपी का प्रदर्शन 20 जुलाई को संसद मार्च के साथ हिंसक हो गया। फाइल फोटो

    HighLights

    1. सीजेपी ने प्रदर्शन में अराजक तत्वों की घुसपैठ स्वीकार की।

    2. जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच हिंसा जारी रही।

    3. सीजेपी ने भाजपा-संघ पर प्रदर्शन बदनाम करने का आरोप लगाया।

    नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर शुरू हुआ सीजेपी का धरना प्रदर्शन 20 जुलाई को संसद मार्च के साथ अराजक तत्वों के कब्जे में जाता दिख रहा है। बृहस्पतिवार को भी जंतर-मंतर पर जारी शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन के बीच टॉलस्टाय रोड व संसद मार्ग पर रह-रहकर हिंसक प्रदर्शन जारी रहा।

    इस दौरान पत्रकारों तथा सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार होता रहा। सुरक्षाकर्मियों पर पानी की बोतलें, पत्थर व लाठी फेंककर उन्हें लाठीचार्ज के लिए उकसाया जा रहा है, जिससे कि माहौल अराजक हो। दैनिक जागरण लगातार बता रहा है कि प्रदर्शन में अराजक तत्व घुसे हुए हैं। बृहस्पतिवार को सीजेपी ने भी इसे मान लिया। सीजेपी के प्रवक्ता ने कहा कि ये अराजक तत्व प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

    ऐसे कई मौके आए जब इसके चलते सुरक्षा बलों व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प होती रही। प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल ऐसे अराजक तत्वों की संख्या हजारों में है, जिनमें से बड़ी संख्या दिल्ली से बाहर वालों की भी है। जिनके पास हिंसा के सामान भी है।

    विरोध प्रदर्शन के इस बदलते स्वरूप से देशभर में इस आंदोलन की नकारात्मक छवि बनने लगी है, जिसने सीजेपी के साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। वैसे, पार्टी के नेताओं द्वारा वालंटियर्स के माध्यम से ऐसे तत्वों पर निगाह रखने तथा संभालने का जिम्मा दिया गया है। पर ऐसा लगता है कि प्रदर्शन अब उसकी पकड़ से बाहर होकर राजनीतिक होता जा रहा है। ऐसे में वह बचाव की मुद्रा में है।

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    अभिजीत दीपके बचाव में खुद आगे आए

    पार्टी अध्यक्ष अभिजीत दीपके बचाव में खुद आगे आए और आरोप लगाया कि छात्रों के चल रहे विरोध-प्रदर्शन को जानबूझकर खराब करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है। उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं पर पत्थर फेंकने और प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। कहा कि एक माह से विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। लेकिन अब प्रदर्शन के जोर पकड़ने के बाद स्थिति बदल गई है।

    जबकि, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं हो सकता है। वे हमारे लोग नहीं है। वह सीजेपी के समर्थक या प्रदर्शनकारी नहीं हो सकते हैं। वालंटियर्स को भी ऐसे तत्वों के बारे में सजग रहने को कहा गया है।

    आगे उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को खत्म करने के लिए भाजपा व संघ द्वारा जानबूझ कर अराजकतत्वों को भीड़ में घुसा दिया गया है। इसी तरह, टॉलस्टाय रोड पर लोगों को हिंसा करने से रोकते एक वालंटियर्स निखिल ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि कौन किस मूड में आ रहा है। जो भी हिंसा कर रहे हैं। उन्हें हाथ जोड़कर पीछे भेज रहे हैं।

    अराजकतत्वों से अब निहंग भी...

    ऐसा कर बाद में टॉलस्टाय रोड पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाबलों के बीच वालंटियर्स ने दो लेयर की सुरक्षा व्यवस्था बनाई ताकि भीड़ कि तरफ से सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर या कोई सामान नहीं फेंका जा सके। वहीं, संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों के लिए दवा लेकर आई पूर्णिमा ने कहा कि यह हिंसा गलत है। इससे आंदोलन मुद्दे से भटक जाएगा। ऐसे अराजकतत्वों से अब निहंग भी निपटने में जुट गए हैं।

    जबकि, मामले के जानकारों के अनुसार, भीड़ में बड़ी संख्या में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र में राजनीति करती राजनीतिक दलों के समर्थक व कार्यकर्ता शामिल हो गए हैं, जो अपनी पार्टी के राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों व युवाओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक बना रहे हैं। यह मौजूदगी 19 जुलाई से ही जंतर-मंतर पर बनने लग गई थी। जो अब सीजेपी के पकड़ से बाहर जाती जा रही है।

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