'जानबूझकर नहीं ली अनुमति', पुलिस ने बार-बार किया आग्रह; सौरभ दास और आशुतोष रांका ने नहीं माने नियम
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान नई दिल्ली में हुए उपद्रव की जांच में सामने आया है कि पार्टी प्रवक्ताओं ने पुलिस की अनुमति लेने से इ ...और पढ़ें
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सीजेपी प्रवक्ता ने मार्च के लिए नहीं मानी कानूनी प्रक्रिया।
HighLights
सीजेपी प्रवक्ताओं ने संसद मार्च की अनुमति लेने से किया इनकार।
दिल्ली पुलिस ने नेताओं के खिलाफ सात डीडी एंट्री दर्ज कीं।
बेकाबू भीड़ ने संसद भवन के पास हिंसक प्रदर्शन किया।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली जिले में हुए भीषण उपद्रव के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पार्टी के कारनामों की परतें खुलती जा रही हैं। सीजेपी द्वारा इंटरनेट मीडिया पर देशभर के युवाओं और छात्रों से 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचकर 'संसद मार्च' का आह्वान किया गया था।
इस दौरान दिल्ली पुलिस ने पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर बार-बार लिखित में अनुमति लेने का आग्रह किया था, लेकिन दोनों नेताओं ने पुलिस की बात को सिरे से नकार दिया। नतीजतन, देशभर से जुटी हजारों की बेकाबू भीड़ ने कानून-व्यवस्था को हाथ में लेते हुए संसद की ओर कूच कर दिया था।
रायसीना मार्ग, जंतर-मंतर, संसद मार्ग, जनपथ और टॉलस्टॉय मार्ग पर जब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों के साथ भीषण हिंसक टकराव हुआ। स्थिति तब बेहद गंभीर हो गई जब रायसीना मार्ग पर लगा तीन-स्तरीय बैरिकेड तोड़कर भीड़ संसद भवन के मुख्य गेट के पास तक पहुंच गई। संसद की आंतरिक सुरक्षा में तैनात कमांडो को मजबूरी में भीड़ की तरफ राइफल्स ताननी पड़ी थीं।
16-19 जुलाई के बीच पुलिस बनाती रही दबाव
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 16 से 19 जुलाई के बीच पुलिस हर दिन दोनों प्रवक्ताओं से मिलकर संसद मार्च के लिए लिखित आवेदन देने का दबाव बनाती रही। पुलिस ने उनसे मार्च के रूट, संसद जाने वाले रास्तों और शामिल होने वाले लोगों की अनुमानित संख्या की जानकारी मांगी थी।
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पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया था कि संसद सत्र चालू होने के कारण इस क्षेत्र में कई केंद्रीय मंत्रियों के आवास और संवेदनशील वीवीआईपी सुरक्षा घेरे हैं। ऐसे में बिना अनुमति संसद की ओर बढ़ने से आम जनता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
दोनों प्रवक्ताओं का रुख अड़ियल बना रहा
पुलिस की तमाम अपीलों के बावजूद दोनों प्रवक्ताओं का रुख अड़ियल बना रहा। उनका कहना था कि वे किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं लेंगे और हर हाल में संसद मार्च निकालकर रहेंगे। दोनों नेताओं की इस जिद को देखते हुए संसद मार्ग थाना पुलिस ने 16 से 19 जुलाई के बीच रोजाना उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल सात डीडी एंट्री दर्ज कीं। इन डीडी एंट्री में साफ उल्लेख किया गया है कि सौरभ दास और आशुतोष रांका ने जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बेकाबू होती भीड़ को लगातार भड़काने व उकसाने का काम किया।