सीजेपी प्रोटेस्ट: हिंसा भड़कती रही और प्रदर्शन का आह्वान करने वाले मंच के पीछे मूकदर्शक बने रहे
सीजेपी के 'संसद कूच' आह्वान पर 20 जुलाई को प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिससे राजधानी लगभग आठ घंटे तक बंधक बनी रही। उग्र भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ की, जि ...और पढ़ें
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20 जुलाई को दिए गए 'संसद कूच' के आह्वान ने राजधानी को करीब आठ घंटे तक बंधक बनाए रखा।
HighLights
20 जुलाई को सीजेपी का 'संसद कूच' हिंसक हुआ।
उग्र भीड़ ने दिल्ली में जमकर उत्पात मचाया।
240 पुलिसकर्मी घायल, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के विरोध और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 20 जुलाई को दिए गए 'संसद कूच' के आह्वान ने राजधानी को करीब आठ घंटे तक बंधक बनाए रखा। जंतर-मंतर से लेकर लुटियंस दिल्ली के प्रमुख मार्ग संसद मार्ग, टॉलस्टॉय मार्ग, जनपथ, कनॉट प्लेस, अशोक रोड और रायसीना मार्ग रणक्षेत्र में तब्दील हो गए थे।
नेतृत्व विहीन और उग्र भीड़ ने पूरे इलाके में जमकर उत्पात मचाया, पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। यदि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान सूझबूझ और धैर्य का परिचय न देते, तो उग्र भीड़ संसद भवन तक प्रवेश कर सकती थी। इस अराजकता ने साबित कर दिया कि उत्पाती भीड़ की कमान गैर सामाजिक तत्वों के हाथ में थी क्योंकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा करने वाले सीजेपी का नेतृत्व उस दौरान भी जंतर मंतर पर ही था।
इंटरनेट मीडिया पर भीड़ जुटाई, पर नेतृत्व नहीं दिया
सीजेपी ने इंटरनेट मीडिया के जरिए देश भर के छात्रों और युवाओं से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। हालांकि, न तो पार्टी के नेताओं को और न ही पुलिस व खुफिया एजेंसियों को इस बात का अंदाजा था कि अचानक लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ेगी। भीड़ को एकत्र तो कर लिया गया, लेकिन मौके पर दिशा-निर्देश देने वाला कोई नेतृत्व मौजूद नहीं था।
20 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे सबसे पहले रायसीना मार्ग और आसपास के इलाकों में जब हिंसा भड़क रही थी, तब प्रदर्शन का आह्वान करने वाले सीजेपी नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर मंच के पीछे ही मौजूद थे। दीपके एक ट्रक (सेफ जोन) पर सवार हो गए थे।
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दोपहर में प्रदर्शनकारी जब उपद्रव मचा रहे थे तब सौरभ दास और आशुतोष रांका दो-तीन घंटे के लिए वार्ता के मकसद से जेपी नड्डा के आवास पर गए। उसके बाद वापस मंच के पास ही आ गए। रातभर भर सीजेपी के सभी प्रमुख नेता मंच के पास ही मौजूद रहे। इनमें कुछ नेता बीच-बीच में भीड़ को शांत रहने की बार-बार अपील तो करते रहे लेकिन अनियंत्रित भीड़ उनकी सुनने को तैयार ही नहीं हुई।
बैरिकेड टूटे, आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने संसद की तरफ जाने वाले कुछ रास्तों पर तीन-तीन और कुछ पर पांच स्तरीय बैरिकेडिंग भी की थी और बसों को आड़े खड़ा कर अभेद्य घेराबंदी की थी। सुबह करीब 11 बजे सबसे अधिक भीड़ पहले रायसीना मार्ग पर पहुंच गई थी। वहां उग्र भीड़ ने दो स्तर के सुरक्षा घेरे यानी मजबूत बैरिकेड को तोड़कर रेल भवन के पास तीसरे बैरिकेड तक पहुंचने की कोशिश की।

रायसीना मार्ग पर करीब 200-200 मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाए गए थे। पुलिस अधिकारी बार-बार भीड़ को शांति बनाए रखने और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील करते रहे लेकिन नेतृत्व विहीन भीड़ किसी की उनकी सुनने को तैयार नहीं थी। दोनों बैरिकेड को तोड़ते हुए भीड़ जब प्रेस क्लब से आगे बढ़ते हुए रेल भवन की तरफ जाने की कोशिश की तब स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा, क्योंकि वहां से महज 300 मीटर की दूरी पर संसद भवन है।
पथराव शुरू हुआ तब कानूनन पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा: DCP
डीसीपी सचिन शर्मा का कहना है कि तीसरे बैरिकेड के पास आने से रोकने पर प्रदर्शनकारियों ने जब पथराव शुरू कर दिया तब कानूनन पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
पुलिस नियम भी यह कहता है कि दो बैरिकेड तोड़कर तीसरे बैरिकेड के पास प्रदर्शनकारियों के पहुंचने और तोड़तोड़ करने पर पुलिस हर जरूरी कदम उठा सकती है। अगर यहां भी पुलिस बल प्रयोग नहीं करती तब अराजक तत्व संसद भवन में भी घुस सकते थे। इसलिए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे।

रायसीना मार्ग पर जब पुलिस हालात संभालने की कोशिश कर रही थी, तभी जंतर-मंतर, संसद मार्ग और जनपथ पर भी उपद्रवियों ने रुक-रुक कर भीषण पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पड़ोसी राज्यों से आए भाजपा-विरोधी क्षेत्रीय दलों के समर्थक भी जंतर-मंतर पर अपने-अपने जत्थों के साथ जुट गए और उपद्रव में शामिल हो गए।
संसद जाने वाली सड़कों पर पांच-पांच स्तरीय बैरिकेडिंग हो रखी थी
जंतर-मंतर, संसद मार्ग, जनपथ व टॉलस्टॉय मार्ग पर संसद की तरफ जाने वाली सड़कों पर पुलिस ने पांच-पांच स्तरीय बैरिकेडिंग कर रखी थी। क्योंकि पुलिस को अंदेशा था कि इन रास्तों से भी प्रदर्शनकारी संसद की तरफ जाने की कोशिश कर सकते हैं। सबसे अधिक उपद्रव संसद मार्ग पर किया गया।

यहां उपद्रवियों ने 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस और सीएपीएफ की 16 गाड़ियों और 100 से अधिक पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस अधिकारियों की जितनी कारें खड़ी थी और पुलिस की मिनी बसें खड़ी थी उन सभी पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा जमा लिया था। संसद मार्ग के दोनों तरफ जितने भी दफ्तर हैं उन सभी में भी तोड़फो़ड़ की। जिससे सभी दफ्तर बंद करके लोग अपनी जान बचाकर वहां से किसी तरह वापस अपने घर चले गए।
बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के बावजूद 240 पुलिस अधिकारी और जवान घायल
संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा का कहना है कि हर बार जब पहले प्रदर्शनकारियों ने भीषण पथराव किया तभी मजबूरन पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े ताकि भीड़ को जल्द नियंत्रित किया जा सके और उन्हें संसद की तरफ जाने से रोका जा सके। सुरक्षा कर्मियों के हेलमेट और बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के बावजूद 240 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हो गए जिनकी एमएलसी बनी।
दोपहर से शुरू हुआ हिंसा और उपद्रव का यह सिलसिला देर रात तक रुक-रुक कर चलता रहा था। सुरक्षा बलों के कड़े रुख और समय पर की गई कार्रवाई के कारण एक बेहद संगीन और भयावह अनहोनी टल गई, इस दौरान पूरी दिल्ली में दहशत का माहौल बना रहा।

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