'समझौता टूटा तो फिर सड़कों पर उतरेंगे', CJP का सरकार पर बड़ा हमला, FIR वापस लेने की मांग
सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR वापस न लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा न करने पर फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ...और पढ़ें
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CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका का सरकार से एफआईआर उठाने की मांग।
HighLights
सीजेपी ने एफआईआर वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रवक्ता रांका ने हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई की मांग की।
बीजेपी शासित या समर्थित राज्यों में कोई नई FIR न दर्ज हो।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत वापस नहीं ली गईं और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया तो संगठन फिर से अपना आंदोलन शुरू कर सकता है।
रांका ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को टैग करते हुए एक्स पर पोस्ट किया- सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन तोड़ा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में कई लोगों पर निगरानी रखी जा रही है या उन्हें परेशान किया जा रहा है।
Dear @JPNadda @DrJitendraSingh ji,
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 27, 2026
We are observing a complete breach of the agreement regarding no police action against the protestors. Hundreds of students have been arrested in Bihar and Bengal, and hundreds are being surveilled/harrassed in Delhi and other states. Multiple…
प्रदर्शन पर फिर से बैठने के लिए होंगे मजबूर: आशुतोष रांका
रांका ने कहा कि सीजेपी को फिर से प्रदर्शन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा यदि सरकार उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने मांग की कि सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस ली जाएं, छात्रों को रिहा किया जाए और भविष्य में दिल्ली पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों या भाजपा समर्थित राज्यों की पुलिस द्वारा कोई नई एफआईआर न दर्ज की जाए।
रांका ने कहा कि सरकार के साथ हुई लिखित समझौते की प्रति उन्हें कल तक सौंपी जाए और समयसीमा का पालन किया जाए। यह बयान बिहार में 22 और 25 जुलाई के प्रदर्शनों के बाद जारी कानूनी कार्रवाई के बीच आया है, जहां वकीलों का दावा है कि राज्य के विभिन्न थानों में लगभग 200 लोग अभी भी हिरासत में हैं।
कपिल सिब्बल ने छात्रों को कानूनी मदद देने का लिया फैसला
वहीं, सीजेपी ने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता की। कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने सीजेपी के छात्रों को कानूनी सहायता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, वहां-वहां उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की, ताकि कानूनी लड़ाई प्रभावी ढंग से लड़ी जा सके।
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उन्होंने अन्य लोगों से भी इस उद्देश्य के लिए आर्थिक सहयोग करने की अपील की। सिब्बल ने आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) तकनीक के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उन्हें निशाना बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले में सांप्रदायिक (कम्युनल) रंग जोड़ने की कोशिश भी की जा सकती है।
छात्रों को प्रताड़ित या टारगेट न किया जाए: कपिल सिब्बल
उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आंदोलन में शामिल छात्रों को किसी भी तरह से प्रताड़ित या टारगेट न किया जाए। प्रेसवार्ता में सीजेपी ने सरकार से छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को तत्काल वापस लेने और आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग की।