नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया और राहुल गांधी को दिल्ली हाई कोर्ट से मिला जवाब दाखिल करने का समय
दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की याचिका पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दि ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को दिया जवाब दाखिल करने का समय।
HighLights
सोनिया-राहुल को नेशनल हेराल्ड मामले में मिला तीन सप्ताह का समय।
ईडी ने ट्रायल कोर्ट के आरोप पत्र रद्द करने के फैसले को चुनौती दी।
अगली सुनवाई 10 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट में होगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप पत्र रद करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ ईडी की अपील याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी सहित अन्य को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
ट्रायल कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। अदालत ने समय देते हुए मामले की सुनवाई 10 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
सोनिया-राहुल के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगी समय
सुनवाई के दौरान सोनिया व राहुल गांध की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की। वहीं, दूसरी तरफ ईडी की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने बहुत बड़ी गलती की है और हाई कोर्ट से दो महीने पहले समय मिलने के बावजूद प्रतिवादियों ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया है।
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यह पूरी तरह से कानून का सवाल है। जवाब दाखिल करने के लिए दो महीने पहले समय दिया गया था। एसजी के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि अगर जवाब अभी तक दाखिल नहीं किया गया है, तो उसे तीन सप्ताह के अंदर दाखिल किया जाए।
पिछले साल कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा था जवाब
22 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने मामले पर सोनिया व राहुल के अलावा अन्य आरोपितों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 16 दिसंबर को आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि बगैर प्राथमिकी के इस मामले में जांच एजेंसी की शिकायत पर संज्ञान लेना कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है।
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अदालत ने यह भी कहा था कि पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत मिलने और उसके बाद 2014 में समन का आदेश जारी होने के बावजूद सीबीआइ ने मामले में प्राथमिकी नहीं की थी।
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