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    पनप रही सोशल मीडिया के कॉकरोच की राजनीतिक महत्वाकांक्षा, अन्ना हजारे के आंदोलन से हो रही तुलना

    By Rakesh Kumar SinghEdited By: Sonu Suman
    Updated: Thu, 23 Jul 2026 06:23 AM (IST)

    अभिजीत दीपके की 'कॉकरोच जनता पार्टी' मुहिम को सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर अनशन से नई गति मिली। यह आंदोलन अब राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पैदा कर रहा है, ...और पढ़ें

    कॉकरोच जनता पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पनप रही।

    कॉकरोच जनता पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पनप रही।

    HighLights

    1. अभिजीत दीपके ने 'काकरोच जनता पार्टी' मुहिम शुरू की।

    2. सोनम वांगचुक के अनशन से आंदोलन को गति मिली।

    3. अब यह आंदोलन राजनीतिक दल बनने की ओर अग्रसर।

    संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। आप के पूर्व कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने अमेरिका से इंटरनेट मीडिया पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के रूप में व्यंग्यात्मक मुहिम छेड़ी थी, जो इंटरनेट मीडिया से धरातल पर उतरी तो दम तोड़ने लगी। इस मुहिम से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जब जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया तो न सिर्फ इस आंदोलन को आक्सीजन मिली, बल्कि इंटरनेट मीडिया के कॉकरोच में अब राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी पनपने लगी है।

    अब 15 साल पहले अन्ना हजारे के गैर राजनीतिक आंदोलन से निकली पार्टी की तरह ही एक नई राजनीतिक पार्टी के उदय की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। बता दें कि जंतर-मंतर ही वह स्थान है, जहां वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे के आंदोलन से आप का जन्म हुआ था और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं व अनाम चेहरों को राजनीतिक पहचान मिली थी। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका का भी आप से संबंध रहा है।

    जंतर-मंतर पर धरना में महज कुछ सौ लोग ही पहुंचे

    प्रधान न्यायाधीश द्वारा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ युवाओं की तुलना काकरोच से किए जाने के विरोध में दीपके ने इसी वर्ष मई में इंटरनेट मीडिया पर काकरोच जनता पार्टी नाम से अभियान शुरू किया था। इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या एक करोड़ के पार पहुंचने से उत्साहित दीपके छह जून को अमेरिका से दिल्ली आए और नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर धरना दिया, लेकिन वहां महज कुछ सौ लोग ही पहुंचे। इसके बाद वह लखनऊ में छात्रों के एक प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे, किंतु प्रदर्शनकारियों ने उन्हें बोलने तक नहीं दिया। जयपुर में तो उन पर हमला भी हो गया।

    यह आंदोलन चर्चा में तो आ गया, लेकिन अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी

    20 जून से दीपके ने फिर से जंतर-मंतर पर धरना देना शुरू किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट सकी। इसी बीच, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस आंदोलन से जुड़े और 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठ गए। इससे यह आंदोलन चर्चा में तो आ गया, लेकिन अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी। वांगचुक ने जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद मार्च की घोषणा की, तो विपक्षी दलों को मोदी सरकार को घेरने का यह अच्छा अवसर लगा और वामपंथी छात्र संगठनों के साथ-साथ धीरे-धीरे मोदी विरोधी नेता भी इस मंच पर जुटने लगे।

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