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    3 साल बाद जागी दिल्ली सरकार, DCPCR को मिला नया अध्यक्ष; जागरण की खबर का दिखा असर

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 08:30 PM (IST)

    दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) को तीन साल बाद नया नेतृत्व मिला है, जिसमें ओम प्रकाश व्यास अध्यक्ष और चार सदस्य नियुक्त किए गए हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. DCPCR को तीन साल बाद मिला नया अध्यक्ष और सदस्य।

    2. ओम प्रकाश व्यास बने अध्यक्ष, चार नए सदस्य नियुक्त।

    3. बच्चों के मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद।

    रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। लगभग तीन वर्षों से अध्यक्ष और सदस्यों के अभाव में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) को आखिरकार नया नेतृत्व मिल गया है।

    दिल्ली सरकार ने आयोग का पुनर्गठन करते हुए ओम प्रकाश व्यास को अध्यक्ष व राहुल गौतम, कुंदन कंसकार, स्वाति गुप्ता और मोनिका शर्मा को सदस्य नियुक्त किया है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। सभी नियुक्तियां पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी और इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। ओम प्रकाश व्यास वर्ष 2025 में तीन वर्ष के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष पद के लिए नियुक्त हुए थे।

    सरकार को कई बार जवाब देना पड़ा

    यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब आयोग पिछले तीन वर्षों से लगभग निष्क्रिय स्थिति में था। नियमित अध्यक्ष का पद जुलाई 2023 से रिक्त था और सदस्यों के पद भी खाली पड़े थे। आयोग का काम महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव अतिरिक्त प्रभार के रूप में संभाल रही थीं। इस दौरान नियुक्ति प्रक्रिया दो बार शुरू हुई, लेकिन किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी थी। मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में भी लगातार सुनवाई होती रही और सरकार को कई बार जवाब देना पड़ा।

    10-11 कर्मचारी संभाल रहे व‍िभाग

    दैनिक जागरण ने तीन जुलाई के अंक में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता से आयोग की बदहाल स्थिति को सामने लाया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि आयोग के कार्यालय में सन्नाटा पसरा है, कई कमरे बंद हैं, बच्चों के लिए बना चिल्ड्रन्स कार्नर वीरान पड़ा है और पूरे कार्यालय का काम महज 10-11 कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।

    साथ ही यह भी उजागर किया गया था कि राजधानी में स्कूलों में बुलिंग, यौन उत्पीड़न, पाक्सो, शिक्षा से वंचित होने और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों के बढ़ने के बावजूद बच्चों के अधिकारों की सबसे महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था बिना स्थायी नेतृत्व के काम कर रही है।

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    नीतिगत सिफारिशें भी अधिक प्रभावी

    विशेषज्ञों के अनुसार आयोग के पुनर्गठन से बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आने, शिकायतों पर स्वत संज्ञान लेने, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, पाक्सो, बाल श्रम, बाल विवाह, शिक्षा के अधिकार और किशोर न्याय से जुड़े मामलों की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। आयोग अब विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सरकार को नीतिगत सिफारिशें भी अधिक प्रभावी ढंग से दे सकेगा।

    अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा

    हालांकि, आयोग में अभी भी छह में से केवल चार सदस्यों की नियुक्ति हुई है, यानी दो सदस्य पद अभी भी रिक्त हैं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरपूर बचपन का हकदार है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और डीसीपीसीआर का मजबूत एवं सक्रिय होना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग का नया नेतृत्व संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करते हुए बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

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