दिल्ली में प्राइवेट प्लॉट मालिकों को DDA का बड़ा तोहफा, खाली जमीन पर निर्माण के लिए बदली पॉलिसी
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने निजी खाली भूखंडों पर निर्माण की अनुमति दी है, बशर्ते वे किसी विशेष सरकारी योजना के तहत न हों। इससे दिल्ली में घरों क ...और पढ़ें
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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने निजी खाली भूखंडों पर निर्माण की अनुमति दी है। इमेज एआई
HighLights
निजी खाली भूखंडों पर निर्माण की अनुमति मिली।
2018 के नियम अभी भी पूरी तरह लागू हैं।
दिल्ली में घरों की कमी दूर होगी, रियल एस्टेट को गति।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में जिन लोगों के पास अपने निजी खाली भूखंड हैं और वे सालों से वहां निर्माण नहीं कर पा रहे थे, उनके लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने नया नोटिस जारी कर साफ किया है कि निजी जमीन मालिक अब अपने भूखंड पर निर्माण शुरू करने के लिए नक्शा पास करवा सकते हैं। बशर्ते यदि वह भूखंड किसी विशेष सरकारी योजना (जैसे लैंड पूलिंग) के तहत अनिवार्य रूप से नहीं रुका हो।
डीडीए ने स्पष्ट किया है कि निजी भूखंडों के विकास को लेकर जो नियम 2018 में बनाए गए थे, वे अब भी पूरी तरह लागू हैं। ऐसे भूखंडों के मालिक अब अपनी जमीन पर निर्माण शुरू करने के लिए बिल्डिंग प्लान (नक्शा) पास कराने का आवेदन कर सकते हैं।
यह आवेदन संबंधित स्थानीय निकाय एमसीडी, एनडीएमसी या सीधे डीडीए को दिया जा सकता है। ध्यान रहे कि यह नियम उन जमीनों पर लागू होगा जो लैंड पूलिंग पॉलिसी अथवा किसी अन्य विशेष पुनर्विकास योजना के दायरे में नहीं आती हैं।
डीडीए अधिकारियों ने बताया कि इसका मकसद दिल्ली में सालों से खाली पड़ी निजी जमीनों का व्यवस्थित विकास करना है ताकि शहर में घरों की कमी को दूर किया जा सके। हालांकि नक्शे का मंजूरी देने से पूर्व सभी नियमों एवं मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि निर्माण नियमानुसार हो सके।
निर्माण पर रोक या देरी के मुख्य कारण
लैंड पूलिंग पाॉलिसी : बाहरी इलाकों (जैसे नरेला, नजफगढ़, बवाना) की बड़ी जमीनों को विकसित करने के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी लाई गई थी। इस कारण कई क्षेत्रों को ''डेवलपमेंट एरिया'' घोषित कर दिया गया था, जिससे वहां व्यक्तिगत स्तर पर नक्शा पास कराने में तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं।
नियमों का अभाव : कई निजी भूखंड ऐसी जगहों पर थे जिनके लिए कोई विस्तृत ''लेआउट प्लान'' तैयार नहीं था। बिना लेआउट प्लान के स्थानीय निकाय नक्शा पास नहीं कर सकते थे।
मास्टर प्लान 2021 की जटिलताएं : मास्टर प्लान के पुराने नियमों के तहत निजी जमीनों के स्वतंत्र विकास के लिए गाइडलाइंस उतनी स्पष्ट नहीं थीं, जितनी अब 2018 की पालिसी व मास्टर प्लान 2041 के ड्राफ्ट में दिखाई दे रही हैं।
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डीडीए के इस निर्णय से क्या होगा लाभ
- दिल्ली के शहरीकृत गांवों और बाहरी दिल्ली के इलाकों में हजारों की संख्या में ऐसे भूखंड हैं, जहां मालिकों के पास जमीन तो है, लेकिन कागजी कार्रवाई और स्पष्ट नियमों के अभाव में वे ईंट भी नहीं रख पा रहे थे।
- नियमों की स्पष्टता न होने के कारण कई लोग मजबूरी में अवैध निर्माण या अनधिकृत कॉलोनियों की ओर रुख करते थे। डीडीए के इस नोटिस का एक बड़ा मकसद यही है कि लोग कानूनी रूप से और नियोजित तरीके से घर बना सकें।
- इन खाली भूखंडों पर निर्माण शुरू होने से दिल्ली में घरों की किल्लत कम होगी और रियल एस्टेट सेक्टर को भी गति मिलेगी।
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