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    दिल्ली में घर बनाना हुआ बेहद आसान, DDA लाया ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम; घर बैठे मिलेगी NOC

    Updated: Tue, 12 May 2026 09:07 PM (IST)

    डीडीए ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट के लिए 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम' शुरू किया है। ...और पढ़ें

    डीडीए ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट के लिए 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम' शुरू किया है। फाइल फोटो

    डीडीए ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट के लिए 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम' शुरू किया है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. एकल खिड़की समाधान: सभी आवेदन एक पोर्टल पर।

    2. आधुनिक तकनीक: एआई और ऑटोमेटेड जांच से सटीकता।

    3. पारदर्शिता: रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल सर्टिफिकेट।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' के विजन को साकार करते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने आनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (ओबीपीएस) के तहत ''सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम'' की शुरुआत की है। एलजी तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर तैयार यह प्रणाली राजणानी की शहरी विकास प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाएगी।

    इस नई प्रणाली की मुख्य विशेषताएं

    • एकल खिड़की समाधान : अब बिल्डिंग प्लान, दस्तावेज़ और सभी प्रकार की एनओसी एक ही पोर्टल पर आनलाइन जमा की जा सकेंगी। आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं होगी।
    • अत्याधुनिक तकनीक : मानचित्रों की जांच के लिए एआइ, आटोमेटेड कंप्लायंस चेक और जियो-टैग्ड मोबाइल निरीक्षण जैसी तकनीकों का समावेश किया गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और सटीकता बढ़ेगी।
    • पारदर्शिता और सुविधा : आवेदक अपने आवेदन की रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे। शुल्क का भुगतान आनलाइन होगा और स्वीकृत होने पर डिजिटल हस्ताक्षरित सर्टिफिकेट घर बैठे प्राप्त किए जा सकेंगे।
    • भ्रष्टाचार और देरी पर लगाम : यह सिस्टम लालफीताशाही और अनावश्यक देरी को समाप्त कर भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करेगा।
    • यह पहल तकनीक-आधारित शासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। एलजी और डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रणाली की प्रभावशीलता की समय-समय पर समीक्षा करेंगे ताकि जनता को बिना किसी बाधा के त्वरित सेवाएं मिलती रहें।

    प्रमुख बदलाव जो किए गए हैं:-

    • जटिल शब्दों को सरल बनाया : 'पूर्ववर्ती प्रक्रियाओं', 'प्रक्रियागत जटिलताओं' जैसे भारी शब्दों की जगह 'पुरानी व्यवस्था' या 'आसान प्रक्रिया' का भाव दिया गया है।
    • बुलेट प्वाइंट्स का प्रयोग : महत्वपूर्ण जानकारी को बिंदुओं में बांटा गया है ताकि पाठक इसे एक नजर में समझ सके।
    • स्पष्ट संदेश : संदेश को सीधा रखा गया है। अब काम जल्दी होगा, आनलाइन होगा और पारदर्शी होगा।

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