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    448 एक्स-रे मशीनों का हिसाब गायब, 150 की बेडशीट 450 में खरीदी; 650 करोड़ के दवा घोटाले में स्टॉक ऑडिट से खलबली

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 09:21 PM (IST)

    दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपये के दवा और उपकरण खरीद घोटाले की जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं। स्टॉक ऑडिट में खरीद रिकॉर्ड और वास्तविक ...और पढ़ें

    ऑडिट में दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ऑडिट में दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    HighLights

    1. 650 करोड़ के दवा खरीद घोटाले की जांच तेज।

    2. स्टॉक ऑडिट में खरीद और खपत में भारी अंतर।

    3. 448 एक्स-रे मशीनें और महंगी बेडशीट पर सवाल।

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। 650 करोड़ रुपये के दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले की जांच में अब ऐसे तथ्य सामने आने लगे हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग की खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में खरीद के रिकाॅर्ड तो भारी मात्रा में मिल रहे हैं, लेकिन स्टाॅक ऑडिट के दौरान कई मामलों में उपलब्ध स्टाॅक, वितरण और वास्तविक खपत का हिसाब उनसे मेल ही नहीं खा रहा है।

    बड़े खुलासे होने की संभावना

    आरंभिक जांच में सामने आई इन विसंगतियों के बाद पड़ताल और तेज कर दी गई है। यह भी खंगाला जा रहा है कि खरीदी गई सामग्री वास्तव में अस्पतालों तक पहुंची या नहीं, उसका उपयोग कहां हुआ और उसके समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज कितने विश्वसनीय हैं। यह जानने को अस्पतालों के स्टोर, वितरण रजिस्टर, मांग पत्र, भुगतान रिकाॅर्ड और खपत विवरण का व्यापक मिलान किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

    जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा

    स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) और विभिन्न सरकारी अस्पतालों में चल रहे स्टाॅक ऑडिट के दौरान कई मामलों में रिकाॅर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर मिले हैं। हालांकि ऑडिट अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए परिणाम भी अभी जारी नहीं किए गए हैं। पर, खरीद रिकाॅर्ड, उपलब्ध स्टाॅक और खपत के आंकड़ों के मिलान में सामने आ रही खामियों ने जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा है।

    पूरा हिसाब तत्काल नहीं मिल पा रहा

    सूत्रों का कहना है कि जांच टीम अस्पतालों और विभागीय स्टोरों में दवाओं, ओआरएस, चादरों, सर्जिकल सामग्री और अन्य उपभोग्य वस्तुओं का भौतिक सत्यापन कर रही है। कई मामलों में जिन वस्तुओं की बड़ी मात्रा में खरीद और आपूर्ति का रिकाॅर्ड उपलब्ध है, उनकी वास्तविक उपलब्धता, वितरण और उपयोग का पूरा हिसाब तत्काल नहीं मिल पा रहा है।

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    उपलब्धता तथा उपयोग संबंधी रिकाॅर्ड मिला रहे

    इसी कारण खरीद से लेकर आपूर्ति और खपत तक की पूरी श्रृंखला की दोबारा जांच की जा रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार कुछ अस्पतालों में चादरों और अन्य लिनेन सामग्री की उपलब्धता तथा उपयोग संबंधी रिकाॅर्ड का भी मिलान किया जा रहा है। दवाओं और अन्य सामग्रियों की खरीद मात्रा की तुलना में उपलब्ध स्टाॅक और खपत के आंकड़ों में अंतर के संकेत मिले हैं। इसने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

    इन पर उठे सवाल

    • ओआरएस: शिकायत में दावा है कि 50 लाख सैशे खरीदे, खपत का हिसाब नहीं। लगभग 2.50 रुपये प्रति सैशे की खरीद 15 रुपये में हुई
    • बेडशीट और लिनेन सामग्री: करीब 450 रुपये प्रति बेडशीट की दर से खरीद हुई, जबकि समान गुणवत्ता की सामग्री 150 में अन्य संस्थानों में आपूर्ति, संख्या का पूर्ण मिलान अभी तक नहीं
    • पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें: 448 मशीनों की खरीद में बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के बीच बड़ा अंतर, संख्या का मिलान अभी तक नहीं
    • सर्जिकल सामग्री: ड्रेसिंग, स्यूचर, कैनुला, ग्लव्स और अन्य उपभोग्य वस्तुओं की खरीद में भी अत्यधिक दरों पर खरीद, संख्या और खपत का मिलान नहीं

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