रैंकिंग में दिल्ली ने लगाई छलांग, प्रदूषण नियंत्रण की जमीन पर खर्च सुस्त; NCAP फंड का 17% ही इस्तेमाल
दिल्ली स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 21वें स्थान पर आया, जो पिछले साल से बेहतर है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के ...और पढ़ें

धूल प्रदूषण को कम करने के लिए पानी का छिड़काव करता स्माग गन। जागरण आर्काइव
HighLights
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दिल्ली 21वें स्थान पर पहुंचा।
एनसीएपी फंड का केवल 17% ही खर्च हो पाया।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए-पुराने उपाय जारी।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में हवा साफ करने के लिए पिछले एक साल में पुराने उपायों के साथ कई नए प्रयोग भी किए गए, लेकिन स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की रैंकिंग बताती है कि इनका असर अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा है जिसकी राजधानी को जरूरत है।
10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों में दिल्ली 172 अंक के साथ 21वें स्थान पर रही। इसके मुकाबले लखनऊ 198 अंक के साथ पहले और इंदौर 197 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहे। 2025 में राजधानी 32वें स्थान पर रही थी। लेकिन रैंकिंग में यह सुधार दिल्ली की हवा की चुनौती की पूरी तस्वीर नहीं बताता।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) की राशि के इस्तेमाल की धीमी रफ्तार और खर्च के सीमित दायरे ने व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सन 2020-21 से 2025-26 के बीच दिल्ली के लिए एनसीएपी के तहत करीब 113 करोड़ रुपये मंजूर हुए। 99.77 करोड़ आवंटित हुए। इनमें से 23 दिसंबर 2025 तक करीब 81.36 करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन महज 14 करोड़ रुपये खर्च हुए।
यानी जारी राशि का लगभग 17 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ। इतना ही नहीं, 2024-25 में उपलब्ध राशि के मुकाबले खर्च महज दो प्रतिशत रहा और 2025-26 में उस समय तक कोई खर्च ही दर्ज नहीं हुआ था।
यह स्थिति तब है जब एनसीएपी का उद्देश्य केवल सड़क की धूल पर पानी का छिड़काव करना नहीं, बल्कि शहर में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों को नियंत्रित करना है। कार्यक्रम में सड़क और निर्माण की धूल के साथ वाहनों, उद्योगों, कचरा और बायोमास जलाने, निगरानी नेटवर्क तथा अन्य स्रोतों पर कार्रवाई की व्यवस्था है। एनसीएपी के पोर्टल पर शहरों की वायु कार्ययोजनाओं की प्रगति की निगरानी भी की जाती है।
एक साल में क्या नया किया
दिल्ली ने प्रदूषण के 13 हाटस्पाट पर विशेष निगरानी बढ़ाई है। ओखला, द्वारका, अशोक विहार, बवाना, नरेला, मुंडका, पंजाबी बाग, वजीरपुर, रोहिणी, विवेक विहार, आनंद विहार-मंडोली, आरके पुरम और जहांगीरपुरी में सड़क की धूल नियंत्रित करने के लिए पानी के छिड़काव और मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाने का काम किया गया।
ऊंची इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाने की व्यवस्था भी की गई और दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 156 ऐसी मशीनें लगाई जा चुकी हैं।
पुराने उपायों में मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, पानी का छिड़काव, कूड़ा और मलबा हटाना, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, प्रदूषणकारी उद्योगों पर कार्रवाई और खुले में कचरा जलाने पर रोक शामिल हैं। वहीं वाहन प्रदूषण कम करने के लिए बीएस-6 वाहनों, इलेक्ट्रिक वाहनों और पुराने वाहनों को चरणबद्ध हटाने की नीति जारी है।
नया जोर डेटा और तकनीक पर है। दिल्ली में छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र जुड़ने के बाद मॉनिटरिंग नेटवर्क 46 स्टेशनों तक पहुंच गया है। हालांकि विशेषज्ञों ने इनकी भौगोलिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं, क्योंकि बाहरी इलाकों की तुलना में मध्य- दक्षिणी दिल्ली में निगरानी अधिक केंद्रित है।/B
कितने कारगर, कितने नाकाम?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में दिल्ली का वार्षिक पीएम 2.5 और पीएम 10 स्तर 2018-2025 के दौरान सबसे कम रहा, 2020 को छोड़कर। लेकिन यह सुधार प्रदूषण को सुरक्षित स्तर पर लाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे बड़ी समस्या यह है कि दिल्ली अब भी स्रोत पर प्रदूषण घटाने के बजाय कई बार प्रदूषण दिखने के बाद धूल दबाने और तत्काल नियंत्रण वाले उपायों पर ज्यादा निर्भर है।
असली समाधान—‘इवेंट’ नहीं, सालभर की कार्रवाई
- हर हॉटस्पॉट के लिए अलग प्रदूषण-स्रोत आधारित प्लान
- एनसीएपी फंड की त्रैमासिक सार्वजनिक समीक्षा, पैसा खर्च करने की जिम्मेदारी तय
- सिर्फ मशीनें खरीदने के बजाय परिणाम आधारित काम
- सड़क धूल के लिए मरम्मत और सफाई का स्थायी मॉडल
- मलबे और कचरा जलाने पर रियल-टाइम निगरानी
- वाहन और उद्योगों के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारण
- वार्ड स्तर तक एक्यूआई/पीएम2.5 के आधार पर प्रदर्शन की निगरानी
- दिल्ली और एनसीआर के शहरों की एकीकृत कार्ययोजना
बॉक्स-1 : हाल के कुछ वर्षों में दिल्ली की रैंकिंग
| वर्ष | दिल्ली की रैंक | स्कोर |
|---|---|---|
| 2026 | 21वीं | 172 |
| 2025 | 32वीं | 157.3 |
| 2024 | 11वीं | 181 |
| 2023 | 9वीं | 177 |
