दिल्ली भाजपा की नई टीम में निगम चुनाव पर जोर, सभी वर्गों को मिला प्रतिनिधित्व
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने आगामी नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी नई टीम घोषित की है। इसमें सभी वर्गों, जैसे अनुसूचित जाति, ओबी ...और पढ़ें

दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा। (फाइल फोटो)
HighLights
हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली भाजपा की नई टीम घोषित की।
आगामी नगर निगम चुनावों पर विशेष ध्यान दिया गया।
अनुसूचित जाति, ओबीसी, महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिला।
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पदभार संभालने के लगभग डेढ़ माह बाद अपनी नई टीम घोषित कर दी है। इसमें अगले वर्ष होने वाले नगर निगम चुनाव को ध्यान में रखकर सभी वर्गों को साधने का प्रयास किया गया है। विष्णु मित्तल को फिर से महामंत्री बनाया गया है, वहीं पूर्व उपाध्यक्ष योगिता सिंह को भी महामंत्री का दायित्व सौंपा गया है।
इनके अलावा कोई भी अन्य महामंत्री या उपाध्यक्ष अपनी कुर्सी बचाने में सफल नहीं रहा। सभी मंत्री भी बदल दिए गए हैं। पूर्व मंत्रियों में से विनोद बछेती, सारिका जैन और सोना कुमारी को पदोन्नत कर उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अन्य छह नेता इस बार पद पाने से वंचित रह गए।
घोषित 38 पदाधिकारियों में से 19 पदाधिकारी पिछली टीम में भी दायित्व संभाल रहे थे। इस प्रकार 50 प्रतिशत पदाधिकारी पहली बार या एक अंतराल के बाद फिर से प्रदेश पदाधिकारी बनाए गए हैं। इस बार एक भी सांसद या विधायक को टीम में स्थान नहीं मिला है।
योगेंद्र चांदोलिया और कमलजीत सहरावत को सांसद चुने जाने के बाद भी वीरेंद्र सचदेवा की टीम में महामंत्री पद पर बनाए रखा गया था। इसी तरह सांसद बांसुरी स्वराज प्रदेश मंत्री थीं। कपिल मिश्रा, राजकुमार भाटिया और हरीश खुराना भी विधायक चुने जाने के बाद प्रदेश टीम में बने रहे थे, लेकिन इस बार इनमें से किसी को भी संगठन में स्थान नहीं मिला है।
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एक महिला नेता को भी फिर से यह दायित्व सौंपा गया
वर्ष 2008 के बाद अनुसूचित जाति के किसी नेता (योगेंद्र चांदोलिया) को वीरेंद्र्र सचदेवा की टीम में महामंत्री बनाया गया था। इस बार भी इस वर्ग के नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल गिहारा को इस बार महामंत्री बनाया गया है। इसी प्रकार एक महिला नेता को भी फिर से यह दायित्व सौंपा गया है।
पूर्व की तुलना में इस बार अनुसूचित जाति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। पिछली बार एक उपाध्यक्ष, एक महामंत्री और एक मंत्री का पद इस वर्ग को मिला था, जबकि इस बार दो उपाध्यक्ष, एक महामंत्री और दो मंत्री अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पहले की तुलना में इस वर्ग में पार्टी का आधार बढ़ा है और इसे और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
ओबीसी वर्ग के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई
पूर्व के वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित नेता को भी महामंत्री बनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार वे इस पद से वंचित रह गए। इस कमी को पूरा करने के लिए तीन ओबीसी नेताओं को उपाध्यक्ष और तीन को मंत्री बनाने के साथ-साथ युवा मोर्चा व किसान मोर्चा का अध्यक्ष पद भी दिया गया है। पिछली बार सिर्फ एक उपाध्यक्ष, एक मंत्री और किसान मोर्चा का पद ओबीसी को मिला था। जिलों में भी इस वर्ग के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
पार्टी ने अपने परंपरागत वोट बैंक वैश्य और पंजाबी को भी साधने का प्रयास किया है। वैश्य और जैन समाज के सात नेताओं को महामंत्री व उपाध्यक्ष सहित अन्य पद दिए गए हैं। इसी तरह चार पंजाबी नेताओं को प्रदेश में स्थान मिला है। आठ ब्राह्मण नेता टीम में शामिल किए गए हैं। वहीं, महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक महामंत्री के साथ ही तीन महिला नेताओं को उपाध्यक्ष और दो को मंत्री बनाया गया है। दो उपाध्यक्षों सहित पूर्वांचल से संबंधित चार नेताओं को भी टीम में जगह मिली है।
आठ में से पांच मोर्चों के अध्यक्ष बदल गए
पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष संतोष ओझा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष सीएल मीणा और अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनीस अब्बासी अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे हैं। शेष पांच मोर्चों में नए नेताओं को यह जिम्मेदारी दी गई है। महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष ऋचा पांडेय मिश्रा और ओबीसी मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष सुनील यादव को उपाध्यक्ष बनाया गया है।