बैठकों पर बैठकें, फिर भी नहीं रुकी भीड़; संसद मार्च ने दिल्ली पुलिस की तैयारियों पर उठाए सवाल
दिल्ली पुलिस की लगातार बैठकों के बावजूद, एक लाख प्रदर्शनकारी संसद मार्च करते हुए संवेदनशील इलाकों तक पहुंच गए। नए पुलिस आयुक्त भी स्थिति को नियंत्रित ...और पढ़ें

उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी में की जमकर तोड़फोड़।
HighLights
संसद मार्च में दिल्ली पुलिस की खुफिया विफलता सामने आई।
लाखों प्रदर्शनकारी अति संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने में सफल रहे।
यह घटना 2020 के किसान आंदोलन की याद दिलाती है।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। पूर्व पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा गए और अनुराग कुमार आए, जिसके अगले ही दिन शनिवार को जब वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया तो लोगों को लगा अब इस प्रदर्शन को नियंत्रित कर लिया जाएगा। हालांकि, उसके बाद पुलिस का पूरा इंटेलिजेंस सिस्टम प्रदर्शन की उग्रता को डिजिटल पर चल रही गतिविधियों को भांपने में नाकाम रहा।
पुलिसकर्मियों के छीन लिए हथियार
वांगचुक के घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन और ज्वलंत हुआ लेकिन सोमवार के हालात ने यह स्पष्ट कर दिया पुलिस की सक्रियता से तैयारी नहीं थी। सब बंद के बावजूद इतनी भीड़ वहां पहुंची।
वर्ष 2020 के किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस के इंटेलीजेंस की नाकामी की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं।
उस वक्त लाखों प्रदर्शनकारी पुलिस को चकमा देकर लाल किले तक पहुंच गए थे, जहां उन्होंने न केवल उपद्रव और तोड़फोड़ की थी, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से मारपीट कर हथियार तक छीन लिए थे।
पुलिस की तैयारियों पर खड़ा हुआ सवाल
उस भीषण घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने भविष्य के लिए बड़ा सबक लेने का दावा किया था, लेकिन हाल ही में काकरोच पार्टी के संसद कूच के दौरान बनी स्थिति ने पुलिस के इंटेलीजेंस और रणनीतिक तैयारी पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
काॅकरोच पार्टी द्वारा संसद घेराव के किए गए आह्वान को पुलिस और इंटेलीजेंस ने बेहद हल्के में लिया। इसी का नतीजा रहा कि करीब एक लाख प्रदर्शनकारी नई दिल्ली के बेहद सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों जंतर-मंतर, जनपथ, संसद मार्ग और रायसीना मार्ग समेत आसपास की अन्य सड़कों तक बिना किसी बड़े व्यवधान के पहुंचने में कामयाब हो गए।
संसद की सुरक्षा में लग सकती थी सेंध
हद तो तब हो गई जब रायसीना मार्ग से प्रदर्शनकारियों का बड़ा जत्था संसद भवन के बिल्कुल करीब तक पहुंच गया। स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस को आखिरकार आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। गनीमत रही कि प्रदर्शनकारी अधिक उग्र नहीं हुए, अन्यथा संसद भवन के ठीक बाहर 2020 जैसी कोई बड़ी अप्रिय घटना या गंभीर सुरक्षा चूक हो सकती थी।
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भीड़ को बाहरी सीमा पर ही रोका
सूत्रों की मानें तो इस मामले में दिल्ली पुलिस का इंटेलीजेंस फेल हुआ है। अधिकारियों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि इतनी भारी तादाद में लोग संसद मार्ग और रायसीना मार्ग तक जमा हो जाएंगे और बैरिकेड तोड़कर संसद की तरफ बढ़ने लगेंगे। यदि पुलिस रविवार रात से ही पूरे नई दिल्ली जिले में बहुस्तरीय और मजबूत बैरिकेडिंग कर देती, तो भीड़ को बाहरी सीमाओं पर ही रोका जा सकता था।
संवेदनशील जोन की ओर आने वाले सभी रास्तों को समय रहते सील कर भीड़ को एक जगह केंद्रित होने से रोका जा सकता था। फिलहाल, लुटियंस दिल्ली जैसे अति सुरक्षित क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का बिना रोक टोक पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त बनाया
यह स्थिति तब है जब चार दिन पहले पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा को हटाकर आइबी में 20 साल से तैनात तेज तर्रार माने जाने वाले आइपीएस अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त बनाया गया। माना जा रहा था कि काॅकरोच पार्टी के आंदोलन पर नजर रखने और यह मामला और अधिक न भड़के इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पूरे इलाके को बंधक बनाए रखा
जिम्मेदारी संभालने के लिए बाद से वह लगातार दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों के साथ बैठक भी कर रहे थे। छुट्टी के दिनों में शनिवार व रविवार को भी उन्होंने नई दिल्ली जिला पुलिस के अधिकारियों के साथ बार-बार आपात बैठक की, लेकिन नतीजा सिफर साबित हुआ। करीब नौ घंटे तक प्रदर्शनकारियों ने अति महत्वपूर्ण इलाके जहां से संसद महज चंद कदम की दूरी तक है उस पूरे इलाके को बंधक बनाए रखा।