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    प्लास्टिक की पैकिंग में सामान खरीदा तो देना पड़ेगा एक्स्ट्रा चार्ज; क्या है DRS, जिसे दिल्ली सरकार लाने जा रही?

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 08:40 PM (IST)

    दिल्ली सरकार प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए 'जमा वापसी योजना' (DRS) लागू करने पर विचार कर रही है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधि ...और पढ़ें

    दिल्ली में डीआरएस लागू होगा, प्रस्ताव बनाने का दिया गया निर्देश। फोटो: एआई जनरेटेड

    दिल्ली में डीआरएस लागू होगा, प्रस्ताव बनाने का दिया गया निर्देश। फोटो: एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. दिल्ली सरकार लाएगी प्लास्टिक कचरे के लिए DRS योजना

    2. उपभोक्ता खाली बोतल लौटाकर जमा राशि वापस पाएगा

    3. योजना का लक्ष्य अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण कम करना

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए अब 'डिपाॅजिट रिटर्न स्कीम' (डीआरएस) यानी जमा वापसी योजना लागू करने पर विचार कर रही है।

    पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को एक महीने के भीतर इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को रोकना और शहर की अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना है।

    क्या है डिपॉजिट रिटर्न स्क्रीम?

    डीआरएस एक प्रोत्साहन आधारित प्रणाली है। इसके तहत जब कोई उपभोक्ता प्लास्टिक की बोतल जैसी गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तु खरीदता है, तो उसे कीमत के साथ एक छोटी सी अतिरिक्त राशि (डिपाजिट) जमा करनी होगी।

    जब वह खाली बोतल या वस्तु को निर्धारित संग्रह केंद्रों पर वापस करेगा तो वह राशि उसे वापस मिल जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान, पर्यावरण मंत्री ने नालों में फंसने वाले प्लास्टिक, जल प्रदूषण और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट पर चिंता जताई।

    दिल्ली की शहरी चुनौतियों को देखते हुए फैसला

    उन्होंने कहा, यह योजना अन्य राज्यों में सफल रही है। दिल्ली की शहरी चुनौतियों को देखते हुए हमें भी इसे अपनाना चाहिए ताकि कचरा प्रबंधन में तत्काल व ठोस सुधार दिख सके।

    मंत्री ने पर्यावरण विभाग को मौजूदा डीआरएस माडलों का अध्ययन करने और दिल्ली की स्थितियों के अनुसार एक अनुकूल ढांचा तैयार करने का आदेश दिया है। इस प्रस्ताव में वित्तीय तंत्र, संस्थागत व्यवस्था और हितधारकों की जिम्मेदारियों का पूरा खाका शामिल होगा।

    कई राज्यों में पहले चल रहा डीआरएस

    वहीं अधिकारियों के अनुसार, गोवा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इस तरह की प्रणाली के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। वैश्विक स्तर पर 40 से अधिक देशों में यह माडल लागू है, जहां प्लास्टिक रिकवरी की दर 90 प्रतिशत से भी अधिक है।

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    उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना की सफलता के लिए जनता की भागीदारी अनिवार्य है। यह पहल न सिर्फ प्रदूषण कम करेगी बल्कि सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से कचरे को अवसर में बदलने का काम करेगी।

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