दिल्ली में नाबालिग से डिजिटल कुकर्म पर कोर्ट का कड़ा रुख, दोषी को 10 साल की जेल; इंस्टाग्राम वीडियो से खुला राज
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 14 वर्षीय पड़ोसी लड़के के यौन उत्पीड़न के दोषी को 10 साल की कड़ी सजा सुनाई है और पीड़ित को 8 लाख रुपये का जुर्माना देने का ...और पढ़ें

कोर्ट ने आरोपी की दलीलों को खरिज कर दिया। फोटो: आर्काइव
HighLights
दोषी को 10 साल की कड़ी कैद, 8 लाख जुर्माना
इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड होने से हुआ खुलासा
पीड़ित बच्चे की गवाही बनी फैसले का आधार
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 14 वर्षीय पड़ोसी नाबालिग लड़के के साथ डिजिटल कुकर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी पर 8 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे पीड़ित बच्चे को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। एडिशनल सेशन्स जज वैभव मेहता ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस घिनौने कृत्य की वजह से मासूम बच्चे को गहरे शारीरिक और मानसिक आघात से गुजरना पड़ा है।
इंस्टाग्राम वीडियो से हुआ खुलासा
यह मामला नवंबर 2023 का है। दोषी मोहम्मद फरीद ने बच्चे को अपने घर बुलाकर उसका यौन उत्पीड़न किया था और इस पूरी वारदात का वीडियो बना लिया था। आरोपी ने बच्चे को धमकी दी थी कि यदि उसने मुंह खोला तो वह उसके पूरे परिवार को जान से मार देगा। इस डर की वजह से बच्चा महीनों तक चुप रहा।
घटना के करीब 10 महीने बाद, जब आरोपी ने उस आपत्तिजनक वीडियो को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया, तब पीड़ित बच्चे ने हिम्मत जुटाई और मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई।
कोर्ट ने खारिज कीं बचाव पक्ष की दलीलें
बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि 10 महीने बाद एफआईआर दर्ज होने से केस संदिग्ध हो जाता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आरोपी के डर और धमकी के कारण बच्चा चुप था, और इंस्टाग्राम पर वीडियो आने के बाद उसका शिकायत करना पूरी तरह तर्कसंगत है।
डिफेंस ने दावा किया कि वीडियो को एडिट किया गया है। कोर्ट ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वीडियो में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या जालसाजी के सबूत नहीं मिले हैं।
आरोपी ने यह भी दावा किया था कि उसे 5,000 से 10,000 रुपये के आपसी लेन-देन के विवाद में झूठा फंसाया जा रहा है, जिसे अदालत ने पूरी तरह निराधार माना।
पीड़ित बच्चे की गवाही बनी सबसे बड़ा आधार
अदालत ने अपने फैसले में 14 वर्षीय पीड़ित की गवाही को माना। जज ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पुलिस शिकायत, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज धारा 164 के बयान और कोर्ट ट्रायल के दौरान बच्चे का बयान पूरी तरह एक समान और अडिग रहा, जो उसकी सच्चाई को साबित करने के लिए पर्याप्त है।