दिल्ली में 2.31 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में 5 गिरफ्तार, क्रिप्टो करेंसी से विदेश भेजते थे रकम
बाहरी-उत्तरी दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से 2.31 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया ह ...और पढ़ें
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बाहरी-उत्तरी जिला साइबर पुलिस की गिरफ्तर में पांच साइबर ठग। (सौ- दिल्ली पुलिस)
HighLights
पांच आरोपित गिरफ्तार, 2.31 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा।
फर्जी खातों से क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेजी जाती थी रकम।
कंबोडिया से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, अन्य की तलाश जारी।
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। फर्जी बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेजने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए, बाहरी-उत्तरी जिला साइबर थाना पुलिस ने पांच आरोपितों को पकड़ा है।
आरोपितों की पहचान राहुल, बंटी, अंकित, सलीम उर्फ ढांचा और नूर आलम के रूप में हुई है। सभी आरोपित नरेला क्षेत्र के रहने वाले हैं। अब तक की जांच में आरोपितों से जुड़े 28 बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनसे संबंधित 43 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज पाई गई हैं।
बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी स्वामी ने बताया कि पुलिस ने आरोपितों से मोबाइल सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, चैट रिकार्ड, लेनदेन लाग और अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए हैं।
आरोपितों की गिरफ्तारी से करीब 2.31 करोड़ रुपये की ठगी का पता चला है। जांच में सामने आया है कि आरोपित प्रति बैंक खाते के लिए 2,500 से 5,000 रुपये कमीशन लेकर गिरोह के मास्टरमाइंड को फर्जी खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे।
इन खातों में देशभर में की गई आनलाइन ठगी की रकम जमा की जाती थी।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत
बाहरी-उत्तरी जिला साइबर थाना एसएचओ गोविंद सिंह ने बताया कि तकनीकी जांच में एक विदेशी ठग का आईपी पता कंबोडिया में ट्रेस किया गया है, जिससे इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
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पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेशी हैंडलर्स की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। साथ ही पूरे वित्तीय लेन-देन की जांच भी की जा रही है।
आरोपितों के खिलाफ कई राज्यों में दर्ज है शिकायतें
बाहरी-उत्तरी जिला साइबर थाना एसएचओ गोविंद सिंह ने बताया कि ठगी की रकम को तुरंत आनलाइन क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफार्म के जरिए यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था।
इसके बाद इस राशि को टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के माध्यम से विदेशी संचालकों तक भेज दिया जाता था, जिससे लेन-देन को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इनके खिलाफ महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों की शिकायतें मिली हैं।