दिल्ली में दिग्गजों की सीटों पर भी चली SIR की कैंची, CM रेखा गुप्ता की सीट पर कट गए 30% से ज्यादा वोट
दिल्ली की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में 32.8% से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिसमें विधानसभा क्षेत्रों में 20% से 48% तक का बड़ा अंतर देखा गया है।

दिल्ली में दिग्गजों के विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या पर भी एसआईआर असर पड़ा है। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली में 32.8% से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर
विधानसभा क्षेत्रों में यह अंतर 20% से बढ़कर 48% तक पहुंचा
पूर्व सीएम आतिशी के क्षेत्र में 42% से अधिक नाम हटे
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने विधानसभा क्षेत्रों के बीच मतदाताओं के बाहर होने का बड़ा अंतर सामने रखा है। पूरी दिल्ली में जहां करीब 32.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं, वहीं विधानसभा स्तर पर यह आंकड़ा करीब 20 से बढ़कर 48 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
यानी एक विधानसभा में जहां लगभग हर पांचवां मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर है, वहीं दूसरी विधानसभा में हर दूसरा मतदाता बाहर है।
नेताओं की सीटों पर भी बड़ा अंतर
प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े भी खासे दिलचस्प हैं। पूर्व सीएम आतिशी की कालकाजी सीट पर सिर्फ 57.18 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हुए, यानी करीब 42.8 प्रतिशत मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर रहे।
सीएम रेखा गुप्ता की शालीमार बाग सीट पर डिजिटाइजेशन 69.14 प्रतिशत रहा। वहीं लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा की नई दिल्ली सीट पर यह दर करीब 58.24 प्रतिशत थी, यानी करीब 41.76 प्रतिशत मतदाता अनकलेक्टेबल श्रेणी में रहे।
नई दिल्ली सीट को लेकर अधिकारियों का तर्क भी अलग है। उनके मुताबिक यहां बड़ी संख्या में केंद्रीय सरकारी कर्मचारी रहते हैं और तबादलों के कारण मतदाताओं का स्थान बदलता रहता है। यही वजह है कि यहां अपेक्षाकृत कम डिजिटाइजेशन की उम्मीद पहले से थी।
अल्पसंख्यक बहुल सीटें दिलचस्प हुईं
अल्पसंख्यक बहुल मानी जाने वाली सात विधानसभा सीटों में भी एक जैसा पैटर्न नहीं दिखता। ओखला में 45.32 प्रतिशत मतदाता अनकलेक्टेबल रहे, जबकि चांदनी चौक में यह 38.98 प्रतिशत और बल्लीमारान में 32.65 प्रतिशत रहा।
इसके मुकाबले मुस्तफाबाद में 28.09 प्रतिशत, बाबरपुर में 27 प्रतिशत, मटिया महल में 24.50 प्रतिशत और सीलमपुर में केवल 23.37 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में रहे। यानी इसी समूह की दो सीटों ओखला और सीलमपुर के बीच करीब 22 प्रतिशत अंक का अंतर है।
यह आंकड़ा इस धारणा को भी सीधी चुनौती देता है कि किसी एक सामाजिक या आर्थिक श्रेणी के सभी विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों के बाहर होने की दर समान रही।
अनधिकृत कॉलोनियों, पुनर्वास बस्तियों और घनी आबादी वाले कई क्षेत्रों में भी डिजिटाइजेशन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। किराड़ी में 68.98 प्रतिशत, सुल्तानपुर माजरा में 68.93 प्रतिशत और करावल नगर में 67.19 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हुए।
ओखला में 45.33 प्रतिशत, आरके पुरम में करीब 44.48 प्रतिशत और कस्तूरबा नगर में करीब 44.06 प्रतिशत मतदाता ‘अनकलेक्टेबल’ रहे। यानी इन विधानसभा क्षेत्रों में पांच में से दो से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं।
कहीं डिजिटाइजेशन कम तो कहीं बेहतर
दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा वोट बाहर होने वाले क्षेत्रों का पैटर्न केवल किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिल्ली के कई विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन कम रहा।
ओखला में 54.67 प्रतिशत, आरके पुरम में 55.54 प्रतिशत और कस्तूरबा नगर में 55.97 प्रतिशत फॉर्म ही डिजिटाइज हो सके।
कालकाजी में दर करीब 57.2 % रही
इसके विपरीत उत्तर और पश्चिम दिल्ली के कई विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन काफी बेहतर रहा। रोहिणी के बाद शकूरबस्ती में 81.26 प्रतिशत, राजौरी गार्डन में 79.14 प्रतिशत, मंगोलपुरी में 78.76 प्रतिशत और उत्तम नगर में करीब 77.7 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हुए। बवाना और नरेला में भी यह आंकड़ा 76 प्रतिशत से अधिक रहा।
जहां आंकड़े लगभग बराबर, वहां की तस्वीर(% में)
| विधानसभा | डिजिटाइजेशन (%) | अनकलेक्टेबल/ड्राफ्ट (%) |
| रोहिणी | 83.43 | 16.57 |
| शकूरबस्ती | 81.26 | 18.74 |
| राजौरी गार्डन | 79.14 | 20.86 |
| मंगोलपुरी | 78.76 | 21.24 |
| उत्तम नगर | 77.76 | 22.24 |
| सीलमपुर | 76.63 | 23.37 |
| मटिया महल | 75.50 | 24.50 |
| बाबरपुर | 73.00 | 27.00 |
| मुस्तफाबाद | 71.91 | 28.09 |
| बल्लीमारान | 67.35 | 32.65 |
| चांदनी चौक | 61.02 | 38.98 |
| नई दिल्ली | 58.24 | 41.76 |
| कस्तूरबा नगर | 55.97 | 44.03 |
| आरके पुरम | 55.54 | 44.46 |
| ओखला | 54.67 | 45.33 |
| तुगलकाबाद | 52.15 | 47.85 |
कुल मिलाकर, दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में 13 सीटों पर 40 से 50 प्रतिशत और 34 सीटों पर 30 से 40 प्रतिशत मतदाता ड्राफ्ट रोल से बाहर हैं। सिर्फ 21 सीटों में यह अनुपात 20 से 30 प्रतिशत के बीच है।
इसलिए दिल्ली का औसत 32.8 प्रतिशत पूरे शहर की वास्तविक तस्वीर नहीं बताता। विधानसभा-वार आंकड़े बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में यह असर बहुत सीमित है, जबकि कुछ सीटों पर मतदाता सूची में यह संभावित बदलाव काफी बड़ा है।
