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    दिल्लीवालों को खूब पसंद आ रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल, एक साल में 29% बढ़े EV रजिस्ट्रेशन

    By AgencyEdited By: Sonu Suman
    Updated: Sat, 11 Apr 2026 03:57 PM (IST)

    दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के रजिस्ट्रेशन में 29% की वृद्धि हुई, जो 83,512 से बढ़कर 1.07 लाख हो गए। एनवायरोकैटेलि ...और पढ़ें

    दिल्ली में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स)

    दिल्ली में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स)

    HighLights

    1. दिल्ली में EV रजिस्ट्रेशन में 29% की बढ़ोतरी दर्ज।

    2. नई EV नीति और स्क्रैपेज इंसेंटिव से वृद्धि।

    3. पेट्रोल-सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी घटने की उम्मीद।

    पीटीआई, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के रजिस्ट्रेशन में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनवायरोकैटेलिस्ट्स द्वारा वाहन डैशबोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से यह जानकारी सामने आई है।

    पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिल्ली में 83,512 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 1.07 लाख हो गए। इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाहनों की संख्या भी 6,796 से बढ़कर 8,476 हो गई। हालांकि, पेट्रोल और पेट्रोल-इथेनॉल वाहनों में भी वृद्धि जारी रही। इनकी संख्या 5.30 लाख से बढ़कर 6.21 लाख पहुंच गई। सीएनजी वाहनों में भी उछाल देखा गया, जहां रजिस्ट्रेशन 25,330 से बढ़कर 32,224 हो गए। वहीं डीजल वाहनों की संख्या घटकर 11,498 रह गई।

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई EV पॉलिसी और स्क्रैपेज लिंक्ड इंसेंटिव के कारण आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदारी और तेजी से बढ़ेगी।

    BS-IV वाहनों को स्क्रैप कर नया EV खरीदने पर वित्तीय लाभ

    एनवायरोकैटेलिस्ट्स के सुनील दहिया ने कहा कि EV रजिस्ट्रेशन में मजबूत वृद्धि के बावजूद पेट्रोल और सीएनजी वाहनों की संख्या पर अभी इसका खास असर नहीं पड़ा है। नई नीति के तहत पुराने BS-IV वाहनों को स्क्रैप कर नया EV खरीदने पर वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे EV अपनाने में और तेजी आएगी।

    दिल्ली में कुल वाहन रजिस्ट्रेशन में 17.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 7.21 लाख से बढ़कर 8.50 लाख हो गया। कुल रजिस्ट्रेशन में पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी 73.1 प्रतिशत रही, जबकि EV की हिस्सेदारी 12.7 प्रतिशत हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि नई EV नीति और टैक्स छूट के कारण पेट्रोल-सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम होगी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।

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